हांसी। कभी गांव की चौपाल की पहचान मानी जाने वाली चारपाई अब एक बार फिर लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। आधुनिक दौर में जहां फर्नीचर के नए-नए डिजाइन बाजार में आ गए हैं, वहीं देशी चारपाई और चौपाई पलंग की मांग दोबारा बढ़ रही है। आपको बता दे कि हांसी के ढाणा खुर्द गांव के रहने वाले भोले भंडारी ने देशी चारपाई और विशाल पलंग बनाने के लिए न केवल हांसी बल्कि पूरे हरियाणा और देश में पहचान बना चुके हैं। अब उनके यहां एक ऐसा विशाल शाही पलंग तैयार किया जा रहा है, जो झज्जर की एक चौपाल की शान बढ़ाएगा। इस शाही पलंग की लागत करीब 4 लाख 25 हजार रुपये बताई जा रही है। इसकी लंबाई 18 फीट 3 इंच, चौड़ाई 9 फीट 3 इंच और ऊंचाई करीब 4 फीट 6 इंच है। खास बात यह है कि इस पर एक साथ करीब 100 लोग बैठ सकेंगे। पलंग को भव्य और पारंपरिक रूप देने के लिए इसमें करीब 60 किलो पीतल लगाया जा रहा है। इसके पायों और सीढ़ियों को विशेष डिजाइन दिया जा रहा है। सीढ़ियां अशोक स्तंभ के आकार में तैयार की जा रही हैं। कृष्णा देवी ने बताया कि पलंग का ढांचा मजबूत साल की पुरानी लकड़ी से तैयार किया जा रहा है, जबकि इसमें लाल शीशम के पाए लगाए जा रहे हैं। गुजरात के महुवा से मंगाई गई करीब डेढ़ से दो क्विंटल रंगीन रेशमी रस्सियों का इस्तेमाल पलंग की बुनाई में किया जा रहा है। रस्सियों में करीब 22 रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि पलंग को शाही लुक दिया जा सके। भोले भंडारी के यहां सामान्य चारपाई की कीमत करीब 25 हजार रुपये से शुरू होकर लाखों रुपये तक जाती है। वहीं बैठने के पीढ़े की कीमत करीब 4 से 6 हजार रुपये तक बताई जा रही है। भोले भंडारी ने बताया कि विशाल पलंग को तैयार करने में करीब चार महीने से काम चल रहा है। और इसे 20 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद इसे सोंधी गांव की गुलिया खाप चौपाल में पहुंचाया जाएगा। भोले भंडारी ने बताया कि उनके पिता ने करीब 25 साल पहले इस काम की शुरुआत की थी। शुरुआत में सूरजकुंड मेले में उनके बनाए सामान को लोगों ने खूब पसंद किया। इसके बाद उन्होंने देशी चारपाई और बड़े पलंग बनाने का काम आगे बढ़ाया। परिवार के मुताबिक, उनकी बनाई चारपाई और पलंग की मांग सिर्फ हरियाणा तक सीमित नहीं है। दिल्ली और नोएडा से भी लोग इन्हें खरीदने आते हैं, जबकि विदेशों में भी उनके बनाए पलंग और चारपाई पहुंच चुके हैं। भोले भंडारी इससे पहले भी विशाल चारपाई तैयार कर चुके हैं। उनके मुताबिक, करीब 18 फीट लंबी और 9 फीट चौड़ी विशाल चारपाई तैयार की गई थी, जिसका वजन लगभग 9 क्विंटल था।परिवार का कहना है कि देशी लकड़ी, पीतल और पारंपरिक रस्सियों से तैयार होने वाली इन चारपाइयों की खासियत इनकी मजबूती और आकर्षक डिजाइन है। यानी जिस चारपाई को कभी गांव की चौपाल की पहचान माना जाता था, वही चारपाई अब आधुनिक दौर में नए शाही अंदाज के साथ लोगों के घरों और चौपालों तक वापस पहुंच रही है।