रतिया नगरपालिका के सफाई कर्मचारियों और फायर ब्रिगेड कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को शुक्रवार को पूरा एक महीना हो गया। सरकार द्वारा मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिए जाने और लगातार अनदेखी किए जाने के विरोध में कर्मचारियों ने शुक्रवार को अनोखे और प्रतीकात्मक तरीके से अपना रोष जाहिर किया। प्रदर्शन के दौरान 10 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से मुंडन करवाया, जिनमें 6 फायर ब्रिगेड कर्मचारी और 4 नगर पालिका के सफाई कर्मचारी शामिल रहे। फायर ब्रिगेड कर्मचारी नेता एवं जिला अध्यक्ष रघुबीर सिंह ने बताया कि राज्य कमेटी के आह्वान पर कर्मचारी पिछले 30 दिनों से लगातार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार की ओर से कोई संतोषजनक समाधान नहीं किया गया, जिसके चलते कर्मचारियों में भारी रोष है। रघुबीर सिंह ने कहा कि हिंदू मान्यताओं और संस्कृति में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर मुंडन करवाने की परंपरा है। कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले एक महीने से जनता की स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़े कर्मचारी आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों की ओर कोई ध्यान नहीं दे रही। इसी रोष के चलते कर्मचारियों ने राज्य सरकार को प्रतीकात्मक रूप से ‘मृत’ मानते हुए सामूहिक मुंडन करवाया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन सरकार तक अपनी पीड़ा और नाराजगी पहुंचाने का एक प्रतीकात्मक माध्यम है। कर्मचारी नेता ने आरोप लगाया कि सरकार अब कर्मचारियों पर दबाव बनाने के लिए सख्त कार्रवाई कर रही है। रघुबीर सिंह के अनुसार, हाल ही में 14 पक्के कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, जबकि फायर ब्रिगेड के 10 राज्य स्तरीय नेताओं को नौकरी से बर्खास्त करने की कार्रवाई की गई है। इसके अलावा विभिन्न जिलों में यूनियन पदाधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी सरकार की ऐसी कार्रवाई और कथित दबाव से पीछे हटने वाले नहीं हैं। जब तक सरकार उनकी मांगों को लिखित रूप में स्वीकार नहीं करती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। रघुबीर सिंह ने बताया कि रतिया में कुल 62 कर्मचारी हड़ताल पर बैठे हैं, जिनमें 10 फायर ब्रिगेड कर्मचारी शामिल हैं। शुक्रवार को हुए सामूहिक मुंडन में कुल 10 कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। इनमें 6 फायर ब्रिगेड कर्मचारी और 4 नगर पालिका के सफाई कर्मचारी शामिल रहे। कर्मचारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं और सरकार से बातचीत के माध्यम से समाधान की उम्मीद रखते हैं। उनका कहना है कि जब तक मांगों पर लिखित सहमति नहीं बनती, तब तक उनका आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।