फतेहाबाद जिले में वीरवार सुबह हुई अचानक बारिश ने अनाज मंडियों में खुले में रखे धान को भिगो दिया, जिससे किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ गई है। सुबह करीब पांच बजे शुरू हुई इस बरसात ने धान की खरीद, उठान और फसल को सुरक्षित रखने की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंडियों में खुले में रखी धान की ढेरियों पर पानी पड़ने से फसल को नुकसान होने की आशंका है, और किसानों को अब धान को सुखाने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने की चिंता सता रही है। जिले में हुई बारिश के दौरान जाखल क्षेत्र में सबसे अधिक 36 एमएम बरसात दर्ज की गई। इसके अलावा टोहाना में 17 एमएम, फतेहाबाद में 10 एमएम, भुना में नौ एमएम, कुलां में छह एमएम, भट्टूकलां में पांच एमएम और रतिया में तीन एमएम बारिश हुई। इस बरसात से मौसम में ठंडक महसूस की गई। खुले में रखी फसल पर पड़ा बारिश का पानी धान की खरीद के सीजन में मंडियों में बड़ी मात्रा में फसल पहुंच रही है। ऐसे में सुबह हुई बारिश ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है। मंडियों में खुले में रखी धान की ढेरियों पर पानी पड़ने से नमी बढ़ने की आशंका है, जिससे फसल को सुखाने में अतिरिक्त समय लग सकता है। किसानों को डर है कि धान में नमी बढ़ने से खरीद और उठान की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। बारिश से खरीद और उठान पर असर की आशंका मंडी में धान को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल और अन्य व्यवस्थाओं की आवश्यकता होती है। सुबह हुई बरसात के बाद किसानों और आढ़तियों का ध्यान भीगी फसल को सुरक्षित रखने पर केंद्रित रहा। यदि मौसम साफ होने के बाद धूप निकलती है तो धान को सुखाने में मदद मिल सकती है, लेकिन लगातार बारिश होने पर परेशानी बढ़ने की आशंका है। टोहाना में स्थिति गंभीर टोहाना की एडिशनल अनाज मंडी में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक रही। वीरवार सुबह करीब पांच बजे से शुरू हुई तेज बारिश ने मंडी में खुले में पड़े धान को भिगो दिया। मंडी में सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान की बोरियां भी उठान न होने के कारण पानी में भीग गईं, जिससे किसानों और आढ़तियों को भारी नुकसान की आशंका है। सामाजिक कार्यकर्ता सत्यवान नैन द्वारा जारी एक वीडियो में मंडी परिसर में चारों ओर पानी भरा हुआ दिखाया गया, जिसमें धान की बोरियां पानी में डूबी हुई थीं और कई जगह तिरपाल उड़ने से ढेर भीग गए थे। खुले में पड़ा धान नालियों के पानी में बहता हुआ भी नजर आया। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि भीगे धान की जल्द खरीद और उठान सुनिश्चित किया जाए ताकि उन्हें और अधिक नुकसान का सामना न करना पड़े।