गुरुग्राम में सैट लाइट मैपिंग से जलभराव वाले क्षेत्र की मैपिंग कर उसका निष्तारण किया जाएगा। गुरुग्राम जलभराव न हो इसके लिए अगले साल तक बिल्डरों को भी अपने क्षेत्र में जल निकासी के लिए लाइन बिछाने का काम करना होगा। गुरुग्राम में हो रही समस्या मानेसर, पटौदी, सोहना, रेवाड़ी में न हो इससे पहले वहां पर प्लानिंग की जरूरत हैं। प्राकृतिक नदी-नालों को पुनर्जीवित करने, इंजेक्शन ट्यूबवेल लगाने और सैटेलाइट मैपिंग से जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान पर जोर रहेगा। केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने गुरुग्राम में हाल ही में हुए जलभराव पर प्रभावित नागरिकों से खेद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, "जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान केवल पानी को पंप करके बाहर निकालने से नहीं होगा। इसके लिए शहर के प्राकृतिक जल निकासी तंत्र को बहाल करना, बारिश के पानी का अधिक से अधिक संचयन करना और भूजल का पुनर्भरण सुनिश्चित करना होगा।" उन्होंने प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ काम करने का निर्देश दिया।