शहर में मॉनसून के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए आईआईटी गांधी नगर ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में शहर में 257 ऐसे पॉइंट चिह्नित किए गए हैं जहां हर साल जलभराव होता है। जापानी सलाहकार कंपनी निपॉन कोइ के साथ मिलकर इस रिपोर्ट के आधार पर काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य बारिश के पानी को भूमिगत करने और नूंह की तरफ निकालने की योजना बनाना है। सिविक एजेंसियां इस रिपोर्ट के आधार पर शहर में चार मुख्य पॉइंट पर काम करेंगी। इन प्रयासों से जल निकासी का स्थायी समाधान खोजने का प्रयास किया जाएगा। एक माह के भीतर इन योजनाओं का असर दिखने लगेगा। अधिकारी पीसी मीणा ने मंगलवार को इंजीनियरिंग विंग के अधिकारियों के साथ बैठक भी कर चुके हैं। उन्होंने भविष्य में बनने वाली सड़कों, सरफेस ड्रेन और मेनहोल सहित सभी प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर की जीआईएस टैगिंग करवाने के निर्देश दिए। इससे हर कार्य की लोकेशन और स्थिति का डिजिटल रेकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब किसी भी बड़े काम को सीधे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। रिपोर्ट में स्क्रीनिंग, सेटिंग, फिल्ट्रेशन और वॉटर क्वालिटी पर काम करने की आवश्यकता बताई गई है।