हे शुभारंभ हो शुभारंभ मंगल बेला आई .. सपनों की देहरी पर दिल की बाजी रे शहनाई.. शहनाई .. गरबा गीतों की धुन पर नाच रही थीं कोरियाई और जापानी और दर्शक बने झूम रहे थे गुजराती समाज के लोग। नवरात्रि पर गुरुग्राम के गुजराती समाज की ओर से सेक्टर 72 स्थित अनंता बैंक्वेट हॉल में नौ दिनों का गरबा उत्सव मना रहे हैं। इस मौके पर बुधवार की शाम इस कार्यक्रम में जापानी और कोरियाई मित्रों के छैल छबीली समूह ने गरबा और डांडिया प्रस्तुति से समां बांधा। गुजराती समाज के इस आयोजन में भारतीय संस्कृति, लोक परंपरा और अंतरराष्ट्रीय मित्रता का अनूठा संगम पेश करते हुए जापानी और कोरियाई छैल छबीली समूह ने गरबा और डांडिया प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया।
समूह के सदस्यों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ पारंपरिक भारतीय गरबा एवं डांडिया की मनमोहक प्रस्तुति दी। भारतीय लोक संस्कृति के प्रति उनके लगाव, समर्पण और उत्साह ने उपस्थित लोगों को विशेष रूप से प्रभावित किया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों, गरबा की लयबद्ध थाप और डांडिया की खनक ने उत्सव के माहौल को और भी जीवंत बना दिया।
गुरुग्राम के श्री गुजराती समाज से जुड़े जापानी और कोरियाई मित्रों की यह पहल भारतीय संस्कृति के प्रति उनके प्रेम और विभिन्न संस्कृतियों को करीब लाने की भावना का सुंदर उदाहरण रही। गरबा और डांडिया के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक परंपराएं भाषा एवं देश की सीमाओं से परे लोगों को आपस में जोड़ती हैं।
गुजराती समाज के अध्यक्ष अविनाश त्रिवेदी ने बताया कि छैल छबीली समूह की प्रस्तुति ने न केवल गरबा महोत्सव की रौनक बढ़ाई, बल्कि भारत और जापान और कोरिया के बीच सांस्कृतिक मित्रता और आपसी सद्भाव को भी एक नई अभिव्यक्ति दी। यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक विरासत को साझा करने और विभिन्न देशों के लोगों के बीच आत्मीयता एवं सौहर्द को बढ़ावा देने का एक सराहनीय उदाहरण बना।