बिना इंटरनेट भी हो रही ट्रैकिंग: सैटेलाइट और टावर दे रहे आपकी लोकेशन, सरकार कर रही डाटा का इस्तेमाल
सैटलाइट कनेक्टिविटी के लिए जुटाए गए डाटा का इस्तेमाल दुनिया की कई सरकारें और कंपनियां कर रही हैं। इन डाटा से लोगों की माली हालत, खर्च के तरीके, स्वास्थ्य और वित्तीय स्थिति के अलावा लोकेशन को ट्रैक किया जा रहा है।

विस्तार
स्मार्टफोन जितनी सहूलियत वाला गैजेट है, उतनी ही हमारे लिए यह मुसीबत भी है। यदि आपके पास स्मार्टफोन है तो आप समझ लीजिए कि आपका निजी जीवन नहीं है। आपकी सब चीजें सार्वजनिक है। स्मार्टफोन ने हमारी जिंदगी में इस तरह से घुसपैठ बनाई है कि हमसे ज्यादा इसे हमारे बारे में जानकारी हासिल है। आमतौर पर हम ट्रैकिंग से बचने के लिए फोन की लोकेशन और इंटरनेट को बंद कर देते हैं लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इसके बावजूद भी आपकी ट्रैकिंग लगातार हो रही है और यह सब सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए हो रहा है।
वैसे तो आपको ट्रैकिंग इंटरनेट के जरिए ही होती है लेकिन जब आप मोबाइल फोन की लोकेशन ऑफ कर देते हैं तब आपकी ट्रैकिंग मोबाइल टावर और वायरलेस नेटवर्क के जरिए होती है। इस तरह की ट्रैकिंग को सैटेलाइट ट्रैकिंग भी कहा जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लोकेशन ऑफ करने से मोबाइल एप्स के लिए लोकेशन बंद होती है, ना कि मोबाइल फोन के लिए है। मोबाइल फोन की लोकेशन को ऑफ करना बहुत ही मुश्किल है।
सैटलाइट कनेक्टिविटी के लिए जुटाए गए डाटा का इस्तेमाल दुनिया की कई सरकारें और कंपनियां कर रही हैं। इन डाटा से लोगों की माली हालत, खर्च के तरीके, स्वास्थ्य और वित्तीय स्थिति के अलावा लोकेशन को ट्रैक किया जा रहा है। आपको याद ही होगा कि कुछ साल पहले जर्मनी के एक नेता माल्ट स्पित्ज ने एक मोबाइल कंपनी पर सैटेलाइट डेटा ट्रैकिंग को लेकर मुकदमा किया था। माल्ट का दावा था कि लोकेशन ऑफ होने के बाद उनके फोन की ट्रैकिंग की गई।
- जल्द ही एक नए कलर में लॉन्च होने वाला है iPhone 14, देखें संभावित फोटो
- Apple के एक बड़े अधिकारी ने किया इस्तीफे का एलान, इनके कंधों पर थी क्लाउड सर्विस की जिम्मेदारी
- boAt ने भारत में लॉन्च की सस्ती कॉलिंग वाली स्मार्टवॉच, 10 दिनों तक चलेगी बैटरी
- अमेरिका का मेडिकल टेस्ट पास कर गया ChatGPT, UPSC की परीक्षा में हो गया फेल