‘हीरे’ में स्टोर करें ‘डीवीडी’ से भी अधिक डाटा

यदि आपने हीरा पहना हुआ है तो आपको यह मालूम होना चाहिए कि उसमें कई छिद्र होते हैं, जिन्हें आप देख नहीं सकते हैं। लेकिन इस कमी के कारण इंगेजमेंट रिंग के लिए अपने पार्टनर को दोष देने के बजाय उसका शुक्रिया अदा करें, क्योंकि भविष्य में इस अंगूठी के भीतर शादी के फोटो भी स्टोर हो सकेंगे। इसका सीधा सा कारण है कि किसी डीवीडी के मुकाबले एक हीरे में कई लाख गुना डाटा स्टोर किया जा सकता है।
साइंस एडवांस जर्नल में प्रकाशित शोध पत्र में बताया गया है कि हीरे के भीतर कैसे यह डाटा संजोया जा सकता है। इसमें बताया गया है कि चावल के दाने जितने बड़े और किसी पेपर से भी पतले आकार के हीरे में डीवीडी के मुकाबले हजारों गुना अधिक सूचनाएं रखी जा सकती हैं। इसमें ‘टेलीपोर्टेशन’ के समान ‘क्वांटम डाटा स्टोरेज’ की कल्पना से भी अधिक डाटा रखा जा सकता है।
दरअसल, एक अच्छे हीरे में परमाणु आकार का नाइट्रोजन वैकेंसी सेंटर होता है। इनमें कई छिद्र होते हैं जिनमें हीरे के कार्बन स्ट्रक्चर में गुप्त रूप से कई नाइट्रोजन परमाणु बिखरे होते हैं। नाइट्रोजन के पास जहां कार्बन परमाणु खत्म (डीलिट) होते हैं वहां खाली स्थान होता है।
डीवीडी, मैग्नेटिक हार्ड ड्राइव व हीरे में अंतर

यही जगह डाटा छिपाने के लिए सर्वोत्तम होती है। न्यूयॉर्क की सिटी यूनिवर्सिटी से फिजीसिस्टों की एक टीम इसी पर शोध कर रही है। इस टीम के शोधकर्ताओं ने इन छोटी जगहों पर डाटा रीड करने और एनकोड करने के लिए लेजर का इस्तेमाल किया।
इसके बाद इसमें हरी लेजर द्वारा इलेक्ट्रॉन डाले गए और तत्पश्चात लाल लेजर का उपयोग भी किया गया। इस प्रक्रिया के बाद शोधकर्ताओं ने किसी कंप्यूटर के समान डाटा रीड करने में सफलता हासिल की।
डीवीडी, मैग्नेटिक हार्ड ड्राइव व हीरे में अंतर
दरअसल, डीवीडी 2-डी होती है जबकि डायमंड तकनीकी 3-डी होती है। डीवीडी में सिर्फ एक सतह होती है जबकि हीरे के भीतर मल्टीपल परतों में डाटा स्टोर हो सकता है। यह डाटा स्टोरेज डीवीडी की कई लाइब्रेरियों के बराबर हो सकता है। यह स्टोरेज मैग्नेटिक हार्ड ड्राइव के मुकाबले अलग होता है, क्योंकि हीरे लंबे समय तक खत्म नहीं होते, जबकि मैग्नेटिक हार्ड ड्राइव की लाइफ कम होती है। हार्ड ड्राइव को हर बार एक्सेस करते रहने से इसकी सामग्री डी-ग्रेड होती जाती है और 5-10 साल में खत्म भी हो जाती है जबकि हीरे में ऐसा कुछ नहीं होता।
एक भारतीय है इस शोध का मुख्य लीडर
इस महत्वपूर्ण शोध में दुनिया के बड़े बड़े वैज्ञानिकों की टीम काम कर रही है। इस टीम का नेतृत्व सिद्धार्थ धूमकर नाम का एक भारतीय कर रहा है। सिद्धार्थ ने कहा कि हीरे में बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं होती इसलिए यह डाटा स्टोरेज हमेशा के लिए सुरक्षित रह सकता है। उन्होंने बताया कि शोध के लिए जिस हीरे का उपयोग किया गया उसकी कीमत मात्र 10,000 रुपये (150 डॉलर) पड़ी, जो प्रयोग के लिहाज से काफी सस्ती थी। सिद्धार्थ के कम खर्च वाले इस प्लान को लेकर अमेरिका के कई वैज्ञानिकों ने उत्साह जताया है।