ISS के 25 साल: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से दिखी दिल्ली की चमक, टोक्यो और सिंगापुर जैसे शहरों को दी टक्कर
ISS Completes 25 Years:
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन ने अपने 25 साल पूरे होने के जश्न में स्पेस के दुनिया के कई चमकदार शहरों की तस्वीरें जारी की। अंतरिक्ष से ली गई नई नाइट इमेज में दिल्ली दुनिया के सबसे चमकदार शहरों में शामिल नजर आई है। तस्वीरों में राजधानी की रोशनी, यमुना नदी का फैलाव और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा साफ दिखाई दे रहा है।

विस्तार
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) ने रात के समय दुनिया के बड़े शहरों की नई तस्वीरें साझा की हैं। इनमें दिल्ली सबसे ज्यादा प्रभावशाली दृश्यों में से एक के रूप में सामने आई है। इन तस्वीरों में राजधानी की जगमगाहट और सड़कों का नेटवर्क साफ दिखाई दे रहा है।
तस्वीर के साथ दिए गए विवरण में बताया गया कि दिल्ली, जिसकी आबादी करीब 3.4 करोड़ है, टोक्यो के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र है। इतनी विशाल आबादी और घनी बसावट के कारण दिल्ली का नाइटस्केप अंतरिक्ष से भी बेहद स्पष्ट और चमकदार नजर आता है।
यमुना नदी और प्रमुख लैंडमार्क भी दिखे
ISS ने बताया कि यह तस्वीर रात 10:54 बजे के आसपास ली गई थी, जिसमें दिल्ली के बीच बहने वाली यमुना नदी साफ नजर आती है। इसके अलावा दाईं ओर का उजला आयताकार क्षेत्र इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो दक्षिण एशिया के सबसे व्यस्त एयर हब में शामिल है। इन रोशनियों से शहर का नक्शा अंतरिक्ष से भी साफ झलकता है।
टोक्यो और सिंगापुर जैसे शहरों के साथ की गई तुलना
ISS ने दिल्ली की तुलना दुनिया के अन्य चमकदार शहरों जैसे टोक्यो, सिंगापुर और साओ पाउलो से की। सिंगापुर की तस्वीर में वह मलेशिया के जोहोर बाहुरू से अलग दिखाई देता है, जबकि एक अन्य तस्वीर में टोक्यो की बे एरिया रात में दमकती नजर आती है। इन छवियों में दिल्ली भी उसी श्रेणी में दिखाई देती है।
स्पेस स्टेशन के 25 साल पूरे
बता दें कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन अपने 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। स्टेशन पर मानव उपस्थिति 2 नवंबर 2000 से लगातार बनी हुई है। यहां पहले दल के रूप में NASA के विलियम शेफर्ड के साथ, रूस के यूरी गिद्जेनको और सर्गेई क्रिकालेव 31 अक्टूबर 2000 को कजाखस्तान से उड़ान भरने के 2 दिन बाद स्टेशन पहुंचे थे।
26 देशों के 300 से अधिक लोग कर चुके हैं यात्रा
पिछले 25 वर्षों में ISS पर 26 देशों के करीब 300 से ज्यादा अंतरिक्ष यात्री जा चुके हैं। यहां हजारों वैज्ञानिक प्रयोग किए गए हैं, जिनका सीधा फायदा पृथ्वी पर विज्ञान, चिकित्सा और तकनीक के विकास में हुआ है। यही स्टेशन भविष्य के चंद्र और मंगल अभियानों के लिए भी नींव तैयार कर रहा है।