2030 तक इंसानों से ज्यादा समझदार हो जाएगा AI: Google DeepMind के CEO बोले- तैयारी के लिए अब ज्यादा वक्त नहीं
क्या इंसानों जैसी सोच और समझ रखने वाला AI अब सिर्फ कुछ साल दूर है? गूगल डीपमाइंड के सीईओ डेमिस हैसाबिस का कहना है कि 2030 तक AGI हकीकत बन सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि समाज के पास इसकी तैयारी के लिए ज्यादा समय नहीं बचा है, हालांकि उनका मानना है कि इंसानी रचनात्मकता की अहमियत बनी रहेगी।

विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) के सीईओ डेमिस हैसाबिस (Demis Hassabis) ने एक ऐसी भविष्यवाणी की है, जिसने टेक इंडस्ट्री में नई बहस छेड़ दी है। उनका मानना है कि 2030 के आसपास आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) वास्तविकता बन सकता है। उन्होंने इसे ऐसी तकनीक बताया है, जो मानव इतिहास में एक नए युग की शुरुआत करेगी।
स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस में बातचीत के दौरान हैसाबिस ने कहा कि आने वाले दस साल बाद लोग पीछे मुड़कर देखेंगे और महसूस करेंगे कि वे 'सिंगुलैरिटी' के शुरुआती दौर में खड़े थे। सिंगुलैरिटी वह स्थिति मानी जाती है, जब AI इंसानों से आगे निकलकर खुद को बेहतर बनाना शुरू कर देगा।'तैयारी के लिए ज्यादा वक्त नहीं बचा'
- हैसाबिस का कहना है कि एजीआई के आने से पहले समाज को इसकी तैयारी करनी होगी। आज एआई रोजमर्रा के कामों और कोडिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से अपनी जगह बना रहा है। ऐसे में नौकरियों पर असर पड़ने की चिंता भी बढ़ रही है। उनके मुताबिक, एजीआई सिर्फ साधारण काम नहीं करेगा, बल्कि तर्क करने, फैसले लेने और नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने जैसे जटिल कार्य भी संभाल सकेगा।
- हालांकि हैसाबिस मानते हैं कि AI के दौर में भी इंसानों की कुछ खूबियां सबसे अधिक मूल्यवान रहेंगी। उनका मानना है कि आने वाले पांच वर्षों में क्रिएटिव सोच, बेहतर डिजाइन सेंस, मौलिक विचार और अलग-अलग क्षेत्रों की जानकारी को जोड़कर नए समाधान तैयार करने की क्षमता रखने वाले लोगों की मांग सबसे ज्यादा होगी।
क्या है एजीआई?
सीधे शब्दों में कहें तो एआई (AI - Artificial Intelligence) एक ऐसी तकनीक है जो किसी खास काम को करने के लिए डिजाइन की गई है, जबकि एजीआई यानी आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) भविष्य की एक ऐसी परिकल्पना है जिसमें मशीनों के पास बिल्कुल इंसानों जैसी सोचने, समझने और फैसले लेने की क्षमता होगी। आज हम जिस AI का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसे तकनीकी भाषा में वीक एआई या कमजोर एआई कहा जाता है। एआई सिर्फ उसी काम में माहिर होता है, जिसकी उसे ट्रेनिंग दी जाती है। ये डेटा का विश्लेषण करते हैं और पैटर्न के आधार पर जवाब देते हैं, लेकिन इनके पास इंसानों जैसी चेतना या समझ नहीं है। सिरी (Siri), गूगल असिस्टेंट और सेल्फ-ड्राइविंग कारें कमजोर एआई का उदाहरण हैं।
दूसरी ओर, एजीआई को स्ट्रॉन्ग एआई कहा जाता है। यह एआई का वह स्तर है जो अभी तक हकीकत नहीं बना है, लेकिन वैज्ञानिक इस पर काम कर रहे हैं। AGI एक ऐसा सिस्टम होगा जो किसी भी बौद्धिक काम को बिल्कुल एक इंसान की तरह सीख और समझ सकेगा। अगर AGI को कोई ऐसा काम दिया जाए जो उसने पहले कभी नहीं किया है, तो वह अपने पिछले अनुभवों और 'कॉमन सेंस' का इस्तेमाल करके उसे खुद सीख लेगा। इतना ही नहीं, इसमें तर्क करने, प्लानिंग करने, समस्याओं को सुलझाने, विचारों को समझने और नई परिस्थितियों में खुद को ढालने की भी क्षमता होगी।एजीआई को लेकर क्या है डर?
- एजीआई (AGI) को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह मौजूदा AI से कहीं ज्यादा शक्तिशाली होगा। आज के AI सिस्टम सिर्फ तय किए गए काम करते हैं, लेकिन एजीआई इंसानों की तरह सोचने, तर्क करने, सीखने और नए हालात के मुताबिक खुद को ढालने में सक्षम हो सकता है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसी तकनीक विकसित हो गई, तो यह डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोग्रामर, वकील और रिसर्चर जैसे जटिल काम भी कर सकेगी। इससे बड़ी संख्या में नौकरियों पर असर पड़ सकता है और कई उद्योगों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
- इसके अलावा, अगर AGI गलत हाथों में पहुंच गया या उस पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं रहा, तो इसका इस्तेमाल साइबर हमलों, फर्जी जानकारी फैलाने, निगरानी बढ़ाने और अन्य खतरनाक उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है। यही वजह है कि AI विशेषज्ञ लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि AGI के विकास के साथ-साथ उसके लिए मजबूत सुरक्षा नियम और निगरानी व्यवस्था भी तैयार की जाए, ताकि इस तकनीक का इस्तेमाल मानवता के हित में हो सके।
एजीआई पर टेक दिग्गजों की है अलग-अलग राय
AGI को लेकर अलग-अलग AI एक्सपर्ट्स की राय भी काफी अलग है।
- ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन का कहना है कि दुनिया डिजिटल सुपरइंटेलिजेंस के बेहद करीब पहुंच चुकी है।
- एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई के अनुसार 2026 के आखिर तक बेहद शक्तिशाली AI सिस्टम सामने आ सकते हैं।
- जैक क्लार्क और मरीना फवारो का अनुमान है कि 2027 तक AI ऐसे काम करने लगेगा, जिन्हें इंसानों को पूरा करने में कई हफ्ते लगते हैं।
- वहीं मेटा के मुख्य AI वैज्ञानिक यान लेकन AGI की मौजूदा अवधारणा को खारिज करते हुए कहते हैं कि वर्तमान ट्रांसफॉर्मर मॉडल इंसानों जैसी सोच तक नहीं पहुंच सकते।
- दूसरी ओर DeepMind के मुख्य AGI वैज्ञानिक शेन लेग का अनुमान है कि 2028 तक "मिनिमल AGI" आने की संभावना 50 प्रतिशत है।
एजीआई निगरानी के लिए नया रेगुलेटर बनाने का सुझाव
- हाल ही में डेमिस हैसाबिस ने AI कंपनियों की निगरानी के लिए एक नए वैश्विक मानक संस्थान का भी प्रस्ताव दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका की अगुवाई में एक पब्लिक-प्राइवेट रेगुलेटरी बॉडी बनाई जाए, जो दुनिया के सबसे एडवांस AI मॉडल्स की लॉन्च से पहले जांच करे। जरूरत पड़ने पर यह संस्था पूरे उद्योग में AI विकास की रफ्तार धीमी करने के लिए भी समन्वय कर सके।
- उनका कहना है कि यह संस्था अमेरिकी वित्तीय बाजार की निगरानी करने वाली FINRA की तर्ज पर काम कर सकती है। इसमें इंडस्ट्री की फंडिंग, स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ और ओपन-सोर्स समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हों, जबकि जवाबदेही अमेरिकी सरकार के प्रति रहे।
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