Social Media Ban: ब्रिटेन में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया होगा बैन, चैटबॉट्स पर भी शिकंजा

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Mon, 15 Jun 2026 01:08 PM IST
सार

Britain To Ban Social Media:

ब्रिटेन की सरकार बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का एलान किया है। प्रस्तावित नियमों के तहत TikTok, Instagram और YouTube समेत कई लोकप्रिय प्लेटफॉर्म बच्चों की पहुंच से बाहर हो सकते हैं।

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सोशल मीडिया पर प्रतिबंध की तैयारी में ब्रिटेन - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    ब्रिटेन ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का कहना है कि यह फैसला बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और खुशहाली को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    लंदन स्थित 10 डाउनिंग स्ट्रीट से देश को संबोधित करते हुए स्टार्मर ने कहा कि यह फैसला उन्होंने केवल प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि छोटे बच्चों के पिता के तौर पर भी लिया है। उन्होंने माना कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों से जुड़े इस तरह के प्रतिबंध को लागू करना आसान नहीं होगा, लेकिन बच्चों की भलाई सबसे ऊपर है।

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    किन प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगा प्रतिबंध?

    • रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रतिबंध दुनिया के कई लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगा। इनमें TikTok, Instagram, Facebook, X, YouTube, Snapchat, Threads, Twitch, Kick और Reddit जैसे नाम शामिल हैं। यदि यह योजना लागू होती है, तो 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चे इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग नहीं कर पाएंगे।
    • हालांकि WhatsApp जैसे मैसेजिंग एप्स इस प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएंगे। वहीं गेमिंग सेवाओं और लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी नए नियम लागू होंगे। ऐसे प्लेटफॉर्म, जहां अजनबी लोग बच्चों से सीधे संपर्क कर सकते हैं, उन्हें आयु सत्यापन प्रणाली के जरिए नियंत्रित किया जाएगा। इस व्यवस्था का अंतिम स्वरूप अभी तय किया जाना बाकी है।

    सिर्फ सोशल मीडिया ही नहीं, चैटबॉट्स पर भी होगी सख्ती

    ब्रिटेन के अखबारद संडे टाइम्सकी रिपोर्ट के अनुसार, सरकार केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं रहना चाहती। प्रस्तावित नियमों में चैटबॉट्स और कुछ गेमिंग एप्स के फीचर्स पर भी प्रतिबंध या कड़े नियंत्रण शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, बड़े किशोरों को देर रात तक सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग से रोकने के लिए डिजिटल कर्फ्यू जैसे उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।

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    बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा सोशल मीडिया: कीर स्टार्मर

    • स्टार्मर का कहना है कि सोशल मीडिया बच्चों को खुश करने के बजाय कई बार उन्हें परेशान और असुरक्षित बना रहा है। उनके मुताबिक, ऑनलाइन बुलिंग और दुर्व्यवहार पहले से आसान हो गया है। इसके अलावा बच्चे ऐसे कंटेंट के संपर्क में आ सकते हैं, जो उनकी मानसिक सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
    • उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि यूजर लंबे समय तक उनसे जुड़े रहें। 'इन्फिनिट स्क्रॉल' जैसे फीचर बच्चों को घंटों स्क्रीन पर व्यस्त रखते हैं। इसका असर उनकी पढ़ाई, किताबें पढ़ने की आदत, दोस्तों के साथ समय बिताने और पर्याप्त नींद लेने पर पड़ता है।

    जनता की राय के बाद लिया गया फैसला

    • यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। सरकार ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक सुझाव मांगे थे, जिसमें माता-पिता, तकनीकी कंपनियों और बच्चों समेत विभिन्न वर्गों से करीब 1.16 लाख प्रतिक्रियाएं मिलीं। बताया गया है कि 2012 में समान विवाह कानून पर रायशुमारी के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक परामर्श था, जिसमें इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
    • ब्रिटेन की संस्कृति मंत्री लिसा नैंडी ने कहा कि अधिकांश लोगों ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध का समर्थन किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल प्रतिबंध ही समाधान नहीं है, बल्कि इसे अन्य सुरक्षा उपायों के साथ लागू किया जाना चाहिए।

    अगले साल से लागू हो सकता है कानून

    • जब उनसे पूछा गया कि यह प्रतिबंध कब लागू होगा, तो स्टार्मर ने बताया कि सरकार ने आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं शुरू कर दी हैं। उनका लक्ष्य अगले साल वसंत ऋतु तक इस कानून को लागू करना है।
    • उन्होंने कहा कि कुछ टेक कंपनियां लोगों को यह विश्वास दिलाना चाहती हैं कि सोशल मीडिया को बदला नहीं जा सकता, लेकिन सरकार इस सोच को स्वीकार नहीं करती। उनके मुताबिक, तकनीक को लोगों की जरूरतों के अनुसार नियंत्रित किया जा सकता है और किया जाना चाहिए।

    दुनिया के कई देश उठा चुके हैं ऐसे कदम

    • ब्रिटेन इस दिशा में कदम उठाने वाला पहला देश नहीं है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देशों ने भी बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाए हैं या उम्र-आधारित प्रतिबंधों की घोषणा की है।
    • विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों की मानसिक सेहत, नींद और पढ़ाई पर असर डाल सकता है। ऐसे में ब्रिटेन का यह फैसला आने वाले समय में अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।
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