Singapore: भीषण गर्मी को मात देने के लिए सिंगापुर ने खोजा अनोखा जुगाड़, अपनाई 140 साल पुरानी कूलिंग तकनीक

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Sun, 14 Jun 2026 09:57 PM IST
सार

District Cooling System:

क्या 140 साल पुरानी कोई तकनीक आज की भीषण गर्मी से राहत दिला सकती है? दुनिया के दूसरे सबसे अमीर देश सिंगापुर ने बिल्कुल यही कमाल किया है। भारी-भरकम एसी के बजाय जमीन के नीचे पाइपलाइन बिछाकर इमारतों को ठंडा रखने की अनोखी 'डिस्ट्रिक्ट कूलिंग' तकनीक के बारे में विस्तार से जानिए।

singapore revives 140 year old underground district cooling technology to beat heat wave
डिस्ट्रिक्ट कूलिंग सिस्टम - फोटो : अमर उजाला (एआई जनरेटेड)

    विस्तार

    जरा सोचिए, बाहर चिलचिलाती धूप हो, लेकिन आपके घर की दीवारें और कमरे बिना किसी एयर कंडीशनर के ही ठंडे रहें। यह कोई कहानी नहीं है, बल्कि दुनिया के दूसरे सबसे अमीर देश सिंगापुर की असलियत है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्रति व्यक्ति सबसे ज्यादा एसी सिंगापुर में ही इस्तेमाल होते हैं। एसी से भले ही इंसान को राहत मिल जाए, लेकिन इससे भारी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं और वैश्विक औसत से दोगुनी रफ्तार से गर्म हो रहे सिंगापुर के लिए यह एक 'सुसाइड मिशन' जैसा था।

    इसी खौफनाक चक्र को तोड़ने के लिए सिंगापुर ने अपने पुंगोल इलाके में जमीन के नीचे पांच किलोमीटर लंबी पाइपलाइनों का जाल बिछा दिया है। इस नेटवर्क के जरिए इमारतों को ठंडा रखा जा रहा है, जिससे बिजली की भारी बचत हो रही है।कैसे काम करती है 19वीं सदी की यह तकनीक?

    'डिस्ट्रिक्ट कूलिंग' के नाम से मशहूर इस प्रणाली में एक बड़े केंद्रीय प्लांट के अंदर पानी को ठंडा किया जाता है। इसके बाद इस चिल्ड वॉटर को जमीन के नीचे बिछी पाइपलाइनों के जरिए अलग-अलग इमारतों तक पहुंचाया जाता है, जहां यह अंदर की गर्म हवा को सोखकर कमरों को ठंडा कर देता है। गर्मी सोखने के बाद यह पानी वापस उसी प्लांट में लौट आता है, जहां इसे फिर से ठंडा करके इस्तेमाल में लाया जाता है।यह कोई नया आविष्कार नहीं है, बल्कि इस कॉन्सेप्ट की शुरुआत एक सदी से भी पहले हुई थी। अकादमिक शोध के अनुसार, साल 1889 में अमेरिका के कोलोराडो स्थित डेनवर शहर में पहली बार अमोनिया या खारे पानी का इस्तेमाल करके ऐसा ही डिस्ट्रिक्ट कूलिंग सिस्टम तैयार किया गया था। यह भी पढ़ें: US ने सभी विदेशी यूजर्स पर लगाया AI बैन: आखिर दुनिया के लिए क्यों बंद हुए Anthropic के दो सबसे ताकतवर AI मॉडल?

    एयर कंडीशनर की तुलना में कम बिजली खपत

    ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर अपनी जरूरत की ज्यादातर ऊर्जा दूसरे देशों से आयात करता है, इसलिए यह तकनीक उसके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह सिस्टम पारंपरिक एयर कंडीशनर के मुकाबले 30 से 50 प्रतिशत तक कम बिजली खर्च करती है। हालांकि, यह भी बताया कि इस नेटवर्क को तैयार करने में इसके आकार के हिसाब से करोड़ों डॉलर की भारी लागत आती है।वर्तमान में सिंगापुर के कम से कम आठ जिलों में यह नेटवर्क काम कर रहा है। साल 2006 में शुरू हुआ मरिना बे का कूलिंग प्लांट आज दुनिया का सबसे बड़ा अंडरग्राउंड डिस्ट्रिक्ट कूलिंग सिस्टम बन चुका है। अब शहर की कई नई परियोजनाओं और इमारतों को भी इसी नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है।

    बढ़ती गर्मी ने बढ़ाई जरूरत

    सिंगापुर में तापमान वैश्विक औसत के मुकाबले दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है। यही वजह है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्रति व्यक्ति एसी के इस्तेमाल के मामले में सिंगापुर सबसे आगे है। लेकिन ज्यादा एसी चलने से बिजली की मांग और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है, जिससे गर्मी का एक दुष्चक्र बन जाता है।

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    इस चक्र को तोड़ने के लिए सरकार ने हाल ही में लोगों और सरकारी दफ्तरों को अपने परिसरों में एसी का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस पर रखने की सलाह दी है। इसके अलावा, समुद्र का जलस्तर बढ़ने और जलवायु परिवर्तन से देश को बचाने के लिए सरकार ने 100 अरब सिंगापुर डॉलर (करीब 77 अरब अमेरिकी डॉलर) का भारी-भरकम बजट भी तय किया है।दुनिया की सबसे बड़ी डिस्ट्रिक्ट कूलिंग कंपनियों में से एक एंजी (Engie) अकेले पुंगोल इलाके में दो सिस्टम चला रही है, जो करीब 8,000 सरकारी आवासों को यह सुविधा दे रहे हैं। कंपनी का अनुमान है कि सिंगापुर में इसकी मौजूदा 323,000 रेफ्रिजरेशन टन की क्षमता अगले एक दशक में दोगुनी हो जाएगी। इसके साथ ही मलेशिया और फिलीपींस में भी इसी अवधि में डिस्ट्रिक्ट कूलिंग क्षमता के दोगुने होने की उम्मीद है।

    चुनौतियां भी कम नहीं

    बिजली बचाने और पर्यावरण को फायदा पहुंचाने के बावजूद इस तकनीक की अपनी कुछ बड़ी सीमाएं हैं। डिस्ट्रिक्ट कूलिंग सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने के लिए बहुत भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया में डेटा सेंटर्स का विस्तार हो रहा है और जल संकट एक गंभीर वैश्विक चिंता का विषय बनता जा रहा है, पानी की यह भारी खपत आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

    फिर भी सिंगापुर इसे अपनी दीर्घकालिक जलवायु रणनीति का अहम हिस्सा मानता है। सरकार बढ़ते तापमान और समुद्र स्तर के खतरे से निपटने के लिए लगभग 100 अरब सिंगापुर डॉलर निवेश करने की योजना पर काम कर रही है, जिसमें डिस्ट्रिक्ट कूलिंग सिस्टम की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

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