दुःख उठाने वाला प्रायः टूट जाया करता है, परंतु दुःख का साक्षात् करने वाला निश्चय ही आत्मजयी होता है।
- श्रीनरेश मेहता
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'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- सम, जिसका अर्थ है- समान, तुल्य, बराबर। प्रस्तुत है प्रेमलता त्रिपाठी की कविता- देह माटी का खिलौना
दीप सम जलते रहें हम
राह सत बढ़ते रहें हम।
मन गहन चिंतन करो क...और पढ़ें
इस समय में बोलना कितना कठिन है
और चुप रहना कठिन उससे अधिक !
खो गयीं जयकार में सौ प्रार्थनाएं
अट्टहासों में घुली हर एक सिसकी
इन्द्रजालों में फँसी है एक पीढ़ी
कौन पहचाने यहाँ आवाज किसकी ...और पढ़ें
तुझ को पा लूँ या तिरे नाम पे वारा जाऊँ
जंग में हार से बेहतर है कि मारा जाऊँ
ये भी इक ज़ुल्म है मुझ पर कि तिरे होते हुए
मैं किसी और के होंटों से पुकारा जाऊँ
हर दरीचे को नहीं मिलती शु'आ'-ए-महताब
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1-
इक चेहरे पर रोज़ गुज़ारा होता है
प्यार किसी को कब दोबारा होता है
मैं तुम पर हर बार भरोसा करता हूँ
इतना सच्चा झूठ तुम्हारा होता है
तुम मेरे इस दिल को पागल मत कहना
अपना बच्चा सब को प्...और पढ़ें
सहर से शाम तक लब हम न खोलेंगे
तेरी इस चुप्पी को लेकर ही सो लेंगे
बसी है यादें रग-रग में मेरे सारी
सभी से हम भी छुप छुप कर ही रो लेंगे
कटी टहनी की माफ़िक ही हैं मुरझाए
लहू के अश्कों से दामन भिगो लेंगे...और पढ़ें
तुमको ही ढूँढती हर ओर हैं बेकल आँखें
जुस्तजू में तेरी ही बहती मुसलसल आँखे
आज भी यादें सुहानी बसी हैं आँखों में
रात भर सोने को तरसे हैं ये बोझल आँखें
हिज्र के ग़म को हमेशा छुपा कर रखा है
हाल दिल का ब...और पढ़ें
ऐ ख़ुदा अब गम से मुझको तू रिहाई दे
बोझ सी इस ज़िंदगी से अब विदाई दे
जब मोहब्बत की तू ने राहे जुदा कर दीं
रुसवा कर मुझको नहीं अब तो बुराई दे
दूर इक दूजे से हमको होना था शायद
फ़ायदा क्या कोई क्यूँ तुमक...और पढ़ें
जीना भी इक कला है बनो इक मिसाल तुम
हर ख़्वाब पूरा होगा करो इक बवाल तुम
सुख-दुख का सिलसिला है ये जीवन भी उम्र भर
इस ज़िंदगी में होना नहीं पाएमाल तुम
मक़सद जो करना है तुम्हें हासिल तो डरना मत
मंज़िल से...और पढ़ें
तन मन भिगोती हैं मेरा, बारिश ये यादों की
बातें भी सारी रह गईं, जैसे के ख़्वाबों की
जब याद करना, चाहते ही तुम नहीं तो, क्या
मैं याद अब दिलाऊँ, तुम्हें बातें वादों की
मैं हिज्र की रुदाद, बयाँ किससे अब करूँ...और पढ़ें