विज्ञापन

Urdu Poetry: मैं किसी और के होंटों से पुकारा जाऊँ

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            तुझ को पा लूँ या तिरे नाम पे वारा जाऊँ
        
                                                    
                            
जंग में हार से बेहतर है कि मारा जाऊँ

ये भी इक ज़ुल्म है मुझ पर कि तिरे होते हुए
मैं किसी और के होंटों से पुकारा जाऊँ

हर दरीचे को नहीं मिलती शु'आ'-ए-महताब
मैं भी क्यूँकर तिरी आँखों से निहारा जाऊँ

कैसे दिखते हैं यहाँ 'इश्क़ में मरने वाले
देखना जब कभी सूली से उतारा जाऊँ

बा'द मरने के जनाज़े से सदा आएगी
पहले महबूब की गलियों से गुज़ारा जाऊँ

~ मुसारिफ़ हुसैन मंसूरी

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile