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ईरान पर ट्रंप का सख्त रुख: सहयोग न देने वाले सहयोगियों को भी दी चेतावनी, होर्मुज को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

Wed, 18 Mar 2026 06:42 PM IST
Himanshu Singh Chandel वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Wed, 18 Mar 2026 06:42 PM IST
सार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए सहयोगी देशों को चेतावनी दी है। कई नाटो देशों ने सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया है, जिससे अमेरिका और सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और बढ़ती तेल कीमतों ने हालात और गंभीर बना दिए हैं।

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Trump tough stance on Iran Warns allies who dont cooperate there increased concern about starait of Hormuz
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपनी बयानबाजी और तेज कर दी है। उन्होंने साफ संकेत दिया है कि अमेरिका अपने सैन्य अभियान को लेकर पीछे नहीं हटेगा, भले ही सहयोगी देश साथ दें या नहीं। ट्रंप के बयान से साफ है कि पश्चिम एशिया में तनाव अब और बढ़ सकता है।

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ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो ईरान को पूरी तरह खत्म करने तक कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने उन सहयोगी देशों पर भी निशाना साधा जो अमेरिका के सैन्य अभियान में शामिल नहीं हो रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश है और उसे किसी की मदद की जरूरत नहीं है।
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क्या सहयोगियों से बढ़ गया टकराव?
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद साफ दिख रहे हैं। कई नाटो देशों ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया है। कनाडा, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने साफ कहा है कि वे सीधे सैन्य कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेंगे।
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होर्मुज को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होती है। ट्रंप ने पहले सहयोगियों से इस रास्ते की सुरक्षा में मदद मांगी थी, लेकिन कई देशों ने इसमें भी दिलचस्पी नहीं दिखाई। इससे अमेरिका और उसके साझेदारों के बीच दूरी बढ़ती दिख रही है।


तेल की कीमतों पर क्या पड़ा असर?
ईरान और इस्राइल-अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ा है। हमलों और जवाबी कार्रवाई के चलते तेल की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक उछाल आया है। इससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया है।

क्या आगे और बढ़ेगा संकट?
ट्रंप के कड़े बयान और सहयोगियों के पीछे हटने से हालात और जटिल हो गए हैं। कई देश इस संघर्ष से दूरी बनाए रखना चाहते हैं, जबकि अमेरिका आक्रामक रुख अपनाए हुए है। ऐसे में यह साफ है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है।

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