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US: 'राजनीतिक एजेंडे पर सहमति के बदले फंडिंग का फायदा', नौ शीर्ष विश्वविद्यालयों पर ट्रंप प्रशासन का दबाव

Thu, 02 Oct 2025 11:43 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 02 Oct 2025 11:43 PM IST
सार

Trump Universities Funding: ट्रंप प्रशासन ने 9 शीर्ष अमेरिकी विश्वविद्यालयों से कॉम्पैक्ट फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस पर सहमति जताने की मांग की। इसके बदले में फंडिंग और व्हाइट हाउस कार्यक्रमों में प्राथमिकता मिलेगी।

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Trump Administration Asks 9 US Universities to Sign Political Compact for Federal Funding Priority
Donald Trump - फोटो : PTI

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने उच्च शिक्षा संस्थानों पर दबाव बनाते हुए नौ शीर्ष विश्वविद्यालयों से अपने राजनीतिक एजेंडे पर सहमति जताने की अपील की है। इसके बदले इन विश्वविद्यालयों को फेडरल फंडिंग में प्राथमिकता देने और व्हाइट हाउस के कार्यक्रमों में विशेष पहुंच देने का प्रस्ताव रखा गया है।

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कॉम्पैक्ट फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस इन हायर एजुकेशन
व्हाइट हाउस की ओर से भेजे गए 10 पन्नों के इस समझौते को कॉम्पैक्ट फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस इन हायर एजुकेशन नाम दिया गया है। यह समझौते में स्कूलों से प्रवेश, महिलाओं के खेल, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, छात्र अनुशासन और कॉलेज की सामर्थ्य सहित अन्य विषयों पर सरकार की प्राथमिकताओं को स्वीकार करने के लिए कहा गया है।
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इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से विश्वविद्यालयों को कुछ संघीय अनुदानों तक प्राथमिकता से पहुंच मिलेगी, लेकिन सरकारी धन केवल उन्हीं स्कूलों तक सीमित नहीं होगा, यह जानकारी व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने दी, जिन्हें इस योजना पर सार्वजनिक रूप से चर्चा करने का अधिकार नहीं था और उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया।
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एसोसिएटेड प्रेस द्वारा गुरुवार को प्राप्त इस समझौते में विश्वविद्यालयों से लिंग की सरकारी परिभाषा को स्वीकार करने और इसे परिसर के शौचालयों, लॉकर रूम और महिला खेल टीमों पर लागू करने के लिए कहा गया है। इस समझौते के तहत कॉलेजों को प्रवेश प्रक्रिया में जाति, लिंग या अन्य सामाजिक कारकों को ध्यान में रखने से रोका जाएगा और सभी छात्रों के लिए SAT या ACT टेस्ट अनिवार्य किया जाएगा। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या स्नातक स्तर पर 15% तक सीमित करने और एक ही देश से आने वाले छात्रों की संख्या 5% से अधिक न होने की शर्त भी शामिल है।

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10 पृष्ठों का प्रस्तावित समझौता इन विश्वविद्यालयों को भेजा गया
वेंडरबिल्ट, पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय, डार्टमाउथ कॉलेज, दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, टेक्सास विश्वविद्यालय, एरिज़ोना विश्वविद्यालय, ब्राउन विश्वविद्यालय और वर्जीनिया विश्वविद्यालय। यह स्पष्ट नहीं है कि इन स्कूलों का चयन कैसे और क्यों किया गया, और क्या इसी तरह के प्रस्ताव अन्य कॉलेजों को भी दिए जा सकते हैं।

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नए अवसर का स्वागत- विन एल्टाइफ
बोर्ड ऑफ रीजेंट्स के अध्यक्ष केविन एल्टाइफ के एक बयान के अनुसार, टेक्सास प्रणाली के नेता इस बात से सम्मानित हैं कि ऑस्टिन परिसर को इस समझौते और इसके संभावित वित्तीय लाभों का हिस्सा चुना गया। एल्टाइफ ने कहा कि आज हम अपने सामने आए नए अवसर का स्वागत करते हैं और हम इस पर ट्रंप प्रशासन के साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं। अन्य कॉलेजों के प्रतिनिधियों ने टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत जवाब नहीं दिया।

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प्रशासन ने संघीय निधि पर अपने नियंत्रण का इस्तेमाल कई अन्य कॉलेजों में दबाव बनाने के लिए किया है, हार्वर्ड और कोलंबिया सहित कई कॉलेजों में अनुसंधान निधि में कटौती की है क्योंकि वह स्कूलों के प्रशासन और नीतियों में बदलाव की मांग कर रहा है।

अमेरिकी छात्रों की ट्यूशन फीस पर सीमा तय करनी होगी
इस समझौते के तहत किसी भी कॉलेज के स्नातक पाठ्यक्रमों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का नामांकन 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। साथ ही, किसी एक देश से आने वाले छात्रों की संख्या कुल नामांकन का 5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकती। समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले विश्वविद्यालयों को अगले पांच वर्षों तक अमेरिकी छात्रों की ट्यूशन फीस पर सीमा तय करनी होगी। इसके अलावा, सबसे धनी विश्वविद्यालयों को कठिन विज्ञान कार्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों से पूरी तरह ट्यूशन फीस माफ़ करनी होगी।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी सख्त नियम तय किए गए हैं। कॉलेजों को यह सुनिश्चित करना होगा कि परिसर में सभी तरह के विचारों को समान रूप से प्रोत्साहन मिले। इसमें उन संस्थागत इकाइयों को बदलना या समाप्त करना भी शामिल है, जो जानबूझकर रूढ़िवादी विचारों का विरोध करती हैं, उनका अपमान करती हैं या उनके खिलाफ हिंसा भड़काती हैं।

हर विश्वविद्यालय को सालाना छात्रों और शिक्षकों का सर्वेक्षण कराना होगा, ताकि समझौते के पालन की समीक्षा हो सके। इन नियमों को न्याय विभाग लागू करेगा। नियम तोड़ने पर संस्थान को कम से कम एक वर्ष के लिए समझौते के लाभों से वंचित किया जाएगा, और दोहराव की स्थिति में यह अवधि दो वर्ष तक बढ़ सकती है।

समझौते में साफ कहा गया है कि यदि कोई उच्च शिक्षा संस्थान इन शर्तों के तहत मिलने वाले संघीय लाभों को छोड़ना चाहे, तो वह अपने अलग मूल्य और मॉडल विकसित करने के लिए स्वतंत्र होगा।

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