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'ईरान युद्धविराम का पालन करेगा, इस पर भरोसा नहीं': अमेरिकी सीनेटर ने कहा- तेहरान के नेतृत्व पर भरोसा नहीं

Mon, 29 Jun 2026 02:10 AM IST
Pavan आईएएनएस, वॉशिंगटन
आईएएनएस, वॉशिंगटन Published by: Pavan Updated Mon, 29 Jun 2026 02:10 AM IST
सार

अमेरिकी सीनेटर थॉम टिलिस ने कहा कि पिछले कई महीनों में अनेक युद्धविराम हुए, लेकिन वे लंबे समय तक टिक नहीं पाए। उनके अनुसार, 'यह समझौता 60 दिनों के ढांचे पर आधारित था, लेकिन मुझे नहीं लगता कि ईरान इसका ईमानदारी से पालन करेगा'।

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'No faith that Iran will abide by the ceasefire': US Senator says Tehran's leadership cannot be trusted
थॉम टिलिस, अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने रविवार को कहा कि उन्हें इस बात पर संदेह है कि ईरान अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते का पालन करेगा। उनका कहना है कि तेहरान के नेतृत्व पर भरोसा नहीं किया जा सकता और हालिया सैन्य घटनाक्रमों ने उनकी आशंकाओं को और मजबूत किया है।
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मुझे ईरानी नेतृत्व पर भरोसा नहीं- टिलिस
सीएनएन के कार्यक्रम 'स्टेट ऑफ द यूनियन' में बातचीत के दौरान टिलिस ने कहा, 'मुझे ईरानी नेतृत्व और वहां के मुल्लाओं पर भरोसा नहीं है कि वे अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेंगे। हम पहले से ही इसके संकेत देख रहे हैं'। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि यदि उसने युद्धविराम समझौते का उल्लंघन जारी रखा तो उसके लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
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'पिछले कई महीनों में अनेक युद्धविराम हुए'
रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल में अमेरिकी और ईरानी बलों के बीच फिर से गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई हुई, जिससे इस महीने हुए समझौते की स्थिरता पर सवाल उठने लगे हैं। टिलिस ने कहा कि पिछले कई महीनों में अनेक युद्धविराम हुए, लेकिन वे लंबे समय तक टिक नहीं पाए। उनके अनुसार, 'यह समझौता 60 दिनों के ढांचे पर आधारित था, लेकिन मुझे नहीं लगता कि ईरान इसका ईमानदारी से पालन करेगा'।


उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी नए समझौते को बहुत सख्ती से लागू किए बिना भरोसेमंद नहीं माना जा सकता। तनाव विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ा है, जिसे दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।

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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हालिया घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अमेरिका-ईरान वार्ता के भविष्य को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। हालांकि दोनों देशों ने बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई है, लेकिन बार-बार हो रही सैन्य झड़पों से व्यापक और टिकाऊ समझौते की संभावना पर सवाल उठ रहे हैं।
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