फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Man who lived in Charles de Gaulle airport for 18 years dies in airport

France: निर्देशक स्पीलबर्ग की फिल्म द टर्मिनल की प्रेरणा रहे करीमी का निधन, पेरिस एयरपोर्ट पर बिताए थे 18 साल

Sun, 13 Nov 2022 06:24 AM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस। Published by: देव कश्यप Updated Sun, 13 Nov 2022 06:24 AM IST
सार

पेरिस हवाईअड्डा प्राधिकरण के एक अधिकारी के मुताबिक, मेरहान करीमी नास्सेरी नाम के इस व्यक्ति का हवाईअड्डे के टर्मिनल 2एफ में शनिवार को दोपहर के करीब दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।अधिकारी ने कहा कि पुलिस और एक मेडिकल टीम ने उसका इलाज किया लेकिन उसे बचा नहीं पाए।

विज्ञापन
Man who lived in Charles de Gaulle airport for 18 years dies in airport
मेहरान करीमी नास्सेरी (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter

विस्तार

पेरिस के चार्ल्स डी गॉल एयरपोर्ट पर 18 साल तक रहने वाले ईरान से निर्वासित एक व्यक्ति की शनिवार को हवाई अड्डे पर निधन हो गया। एयरपोर्ट अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बता दें कि 2004 में बनी अमेरिकी फिल्म निदेशक स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म 'द टर्मिनल' इसी व्यक्ति की कहानी से प्रेरित थी।

विज्ञापन


पेरिस हवाईअड्डा प्राधिकरण के एक अधिकारी के मुताबिक, मेरहान करीमी नास्सेरी नाम के इस व्यक्ति का हवाईअड्डे के टर्मिनल 2एफ में दोपहर के करीब दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।अधिकारी ने कहा कि पुलिस और एक मेडिकल टीम ने उसका इलाज किया लेकिन उसे बचा नहीं पाए। मेहरान को सर अल्फ्रेड के नाम से भी जाना जाता था।
विज्ञापन


फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, माना जाता है कि करीमी नास्सेरी का जन्म 1945 में ईरानी शहर मस्जिद सुलेमान में हुआ था और उनकी आत्मकथा 'द टर्मिनल मैन' 2004 में प्रकाशित हुई थी। वह 1988 से 2006 तक पेरिस हवाई अड्डे के टर्मिनल एक में रहे। हालांकि इसमें पहले कानूनी अड़चने आई क्योंकि उनके पास रेजीडेंसी के कागजात नहीं थे और बाद में अपनी पसंद के अनुसार वह हवाई अड्डे पर रहने लगे। हवाईअड्डे के अधिकारी ने कहा कि वह हाल के हफ्तों में फिर से हवाईअड्डे पर रह रहे थे। 
विज्ञापन
विज्ञापन


1988 में ब्रिटेन द्वारा शरणार्थी के रूप में राजनीतिक शरण देने से इनकार करने के बाद मेहरान पहली बार हवाई अड्डे पर बस गए थे। ब्रिटेन ने उन्हें इस तथ्य के बावजूद कि उनकी मां स्कॉटिश थी, शरण देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने जानबूझकर खुद को देशविहीन घोषित किया और हवाई अड्डे पर रहने का विकल्प चुना। कहा जाता है कि वह हमेशा अपना सामान अपने साथ रखते थे। 


मेहरान 18 साल तक हवाई अड्डे पर रहने के बाद पहली बार 2006 में अस्पताल में भर्ती होने के वक्त हवाईअड्डे से बाहर निकले थे। हवाई अड्डे पर उन्होंने पढ़ने, डायरी लिखने और अर्थशास्त्र का अध्ययन करने में समय बिताया। स्पीलबर्ग ने उनकी असामान्य स्थिति के आधार पर 2004 में फिल्म 'द टर्मिनल' बनाने का फैसला किया। इस फिल्म में टॉम हैंक्स ने अभिनय किया था। इसमें टॉम हैंक्स ने एक पूर्वी यूरोपीय व्यक्ति की भूमिका निभाई थी, जो अमेरिका में प्रवेश से वंचित होने के बाद न्यूयॉर्क के जॉन एफ कैनेडी हवाई अड्डे पर रहता है, की भूमिका निभाई थी। टॉम हैंक्स अभिनीत 'द टर्मिनल' के अलावा एक जीन रोशफोर्ट अभिनीत 1993 की फ्रांसीसी फिल्म 'टॉम्ब्स डू सिएल' भी मेहरान से प्रेरित थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Entertainment news in Hindi related to bollywood, television, hollywood, movie reviews, etc. Stay updated with us for all breaking news from Entertainment and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed