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West Asia Tensions: बेरूत पर हमले की धमकी से बढ़ा तनाव, ईरान ने मध्यस्थों से रोकी बातचीत
Tue, 02 Jun 2026 09:12 PM IST
अमन तिवारी
वर्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
वर्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 02 Jun 2026 09:12 PM IST
सार
इस्रायल की बेरूत पर हमले की धमकी के बाद ईरान ने मध्यस्थों से बातचीत तोड़ दी है। ईरान की मांग है कि बातचीत जारी रखने के लिए लेबनान में पहले युद्धविराम किया जाए। वहीं, अमेरिका और इस्रायल लेबनान के मुद्दे को अलग मान रहे हैं, जिससे बातचीत में गतिरोध पैदा हो गया है।
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अमेरिका, ईरान और इस्राइल का झंडा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ईरान ने इस्रायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी लड़ाई को लेकर मध्यस्थों से बातचीत बंद कर दी है। ईरानी समाचार एजेंसियों फार्स और तस्नीम की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला इस्रायल की उस धमकी के बाद लिया गया है जिसमें उसने बेरूत पर बमबारी की बात कही थी। ये दोनों एजेंसियां ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के करीब मानी जाती हैं।
ईरान ने क्या कहा?
ईरान का कहना है कि लेबनान में जारी संघर्ष अमेरिका के साथ चल रही व्यापक युद्धविराम वार्ता का ही हिस्सा है। दूसरी ओर, इस्रायल और अमेरिका का मानना है कि लेबनान की लड़ाई और ईरान के साथ होने वाली बातचीत दो अलग-अलग विषय हैं। मध्यस्थता में शामिल एक क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को ईरान की ओर से कोई संपर्क नहीं किया गया। ईरान ने शर्त रखी है कि बातचीत आगे बढ़ाने के लिए लेबनान में पहले युद्धविराम लागू होना जरूरी है। ईरान अब इस बात पर अड़ा है कि जब तक लेबनान में शांति नहीं होती, वह चर्चा में शामिल नहीं होगा। इस रुख से क्षेत्र में शांति की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है।
ये भी पढ़ें: अमेरिका: ट्रंप ने पल्टे को बनाया राष्ट्रीय खुफिया विभाग का कार्यवाहक निदेशक, सोशल मीडिया पर की घोषणा
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ट्रंप का दावा
वहीं इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेबनान की राजधानी बेरूत पर बड़े सैन्य हमले से रोक दिया है। ट्रंप के अनुसार, उनकी अपील के बाद नेतन्याहू ने अपने सैनिकों को वापस लौटने का निर्देश दिया। ट्रंप ने सोमवार शाम अपने सोशल मीडिया मंच पर लिखा, 'आज मेरी बीबी नेतन्याहू से बातचीत हुई। मैंने उनसे बेरूत पर बड़े हमले से बचने का अनुरोध किया और उन्होंने अपने सैनिकों को वापस मोड़ दिया। धन्यवाद बीबी।'
यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी मीडिया में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को बेहद तनावपूर्ण और तीखी बताया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, यह फोन कॉल उस समय हुई जब ईरान ने लेबनान पर इस्राइली हमलों के कारण अमेरिका के साथ चल रही बातचीत को समाप्त करने की चेतावनी दी थी। इससे पहले नेतन्याहू ने कहा था कि अगर हिजबुल्ला इस्राइल पर हमले नहीं रोकता तो बेरूत में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।
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ईरान ने क्या कहा?
ईरान का कहना है कि लेबनान में जारी संघर्ष अमेरिका के साथ चल रही व्यापक युद्धविराम वार्ता का ही हिस्सा है। दूसरी ओर, इस्रायल और अमेरिका का मानना है कि लेबनान की लड़ाई और ईरान के साथ होने वाली बातचीत दो अलग-अलग विषय हैं। मध्यस्थता में शामिल एक क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को ईरान की ओर से कोई संपर्क नहीं किया गया। ईरान ने शर्त रखी है कि बातचीत आगे बढ़ाने के लिए लेबनान में पहले युद्धविराम लागू होना जरूरी है। ईरान अब इस बात पर अड़ा है कि जब तक लेबनान में शांति नहीं होती, वह चर्चा में शामिल नहीं होगा। इस रुख से क्षेत्र में शांति की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है।
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ट्रंप का दावा
वहीं इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेबनान की राजधानी बेरूत पर बड़े सैन्य हमले से रोक दिया है। ट्रंप के अनुसार, उनकी अपील के बाद नेतन्याहू ने अपने सैनिकों को वापस लौटने का निर्देश दिया। ट्रंप ने सोमवार शाम अपने सोशल मीडिया मंच पर लिखा, 'आज मेरी बीबी नेतन्याहू से बातचीत हुई। मैंने उनसे बेरूत पर बड़े हमले से बचने का अनुरोध किया और उन्होंने अपने सैनिकों को वापस मोड़ दिया। धन्यवाद बीबी।'
यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी मीडिया में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को बेहद तनावपूर्ण और तीखी बताया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, यह फोन कॉल उस समय हुई जब ईरान ने लेबनान पर इस्राइली हमलों के कारण अमेरिका के साथ चल रही बातचीत को समाप्त करने की चेतावनी दी थी। इससे पहले नेतन्याहू ने कहा था कि अगर हिजबुल्ला इस्राइल पर हमले नहीं रोकता तो बेरूत में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।