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जलवायु परिवर्तन का असर: यूरोप के वाइन उद्योग पर क्यों मंडराया संकट? जानें कैसे बदल रहा सदियों पुराना स्वाद
Fri, 04 Sep 2026 06:00 PM IST
नवीन पारमुवाल
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: नवीन पारमुवाल
Updated Fri, 04 Sep 2026 06:00 PM IST
सार
यूरोप का सदियों पुराना वाइन उद्योग जलवायु परिवर्तन के कारण बड़े संकट का सामना कर रहा है। फ्रांस और स्पेन जैसे पारंपरिक वाइन उत्पादक देश सूखे और गर्मी की मार झेल रहे हैं, वहीं इंग्लैंड और स्वीडन जैसे ठंडे देशों में नई संभावनाएं पैदा हो रही हैं।
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क्यों बदल रहा यूरोप का सदियों पुराना वाइन संसार?
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यूरोप में बढ़ता तापमान अब केवल मौसम और खेती का स्वरूप नहीं बदल रहा, बल्कि सदियों पुरानी वाइन परंपरा को भी प्रभावित कर रहा है। फ्रांस में भीषण गर्मी के कारण अंगूर की कटाई सामान्य समय से काफी पहले शुरू हो गई है, जबकि स्पेन में बढ़ता सूखा और पानी का संकट चिंता बढ़ा रहा है। दूसरी ओर, कभी अंगूर उत्पादन के लिए बहुत ठंडे माने जाने वाले इंग्लैंड, स्वीडन और डेनमार्क जैसे उत्तरी इलाकों में वाइन की नई संभावनाएं उभर रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यूरोप का वाइन उद्योग पूरी तरह दक्षिण से उत्तर की ओर खिसकने की स्थिति में नहीं पहुंचा है।
फ्रांस-24 की रिपोर्ट के अनुसार पहले फ्रांस में अंगूर की कटाई सितंबर के अंत में शुरू होती थी और कई बार नवंबर की शुरुआत तक चलती थी। अब कई क्षेत्रों में यह काम अगस्त के अंतिम सप्ताह में ही शुरू हो गया है। लगातार बढ़ती गर्मी अंगूर को जल्दी पका रही है। दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के गिरोंद क्षेत्र में इस साल जंगल की आग 40 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को प्रभावित कर चुकी है, जिससे देश के महत्वपूर्ण वाइन उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
चीनी बढ़ी, अम्लता घटी
गर्म मौसम में अंगूर जल्दी पकने से उनमें चीनी की मात्रा बढ़ रही है, जबकि अम्लता घट रही है। इससे फ्रांसीसी वाइन के पारंपरिक स्वाद और संरचना में बदलाव की आशंका है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंगूर में सुगंध और स्वाद पूरी तरह विकसित होने से पहले ही चीनी का स्तर बढ़ जाता है। वाइन उत्पादकों को अब तय करना पड़ रहा है कि अम्लता बचाने के लिए अंगूर जल्दी तोड़े जाएं या फिर ऐसा स्वाद स्वीकार किया जाए जो पारंपरिक फ्रांसीसी वाइन से अलग हो।गर्मी से बचने के लिए कुछ उत्पादक रात में कटाई कर रहे हैं, ताकि तेज धूप में अंगूर के ऑक्सीकरण का खतरा कम हो। बेलों पर पत्तियों की प्राकृतिक छतरी बनाने, मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए आवरण फसलों का इस्तेमाल करने और अधिक गर्मी सहने वाली अंगूर किस्में लगाने जैसे उपाय भी किए जा रहे हैं।
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पानी का संकट बढ़ा
यूरोप के वाइन उद्योग के भविष्य में पानी सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। स्पेन करीब 9.30 लाख हेक्टेयर अंगूर क्षेत्र के साथ दुनिया में पहले स्थान पर है। फ्रांस में करीब 7.83 लाख, चीन में 7.33 लाख, इटली में 7.28 लाख और तुर्किये में करीब 4.10 लाख हेक्टेयर में अंगूर की खेती होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक स्पेन के कई वाइन क्षेत्र तेजी से सूख रहे हैं और पानी की कमी भविष्य में बड़े उत्पादन क्षेत्रों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
उत्तर में खुल रही नई राह
जलवायु परिवर्तन का दूसरा पहलू इंग्लैंड में दिख रहा है। कभी बहुत ठंडा माना जाने वाला यह देश अब शैंपेन में इस्तेमाल होने वाली अंगूर किस्मों के लिए अनुकूल हो रहा है। कुछ फ्रांसीसी वाइन उत्पादक भी इंग्लैंड में निवेश कर रहे हैं। डेनमार्क के बोर्नहोम द्वीप तथा स्वीडन और नॉर्वे में भी वाइन उत्पादन की संभावनाएं बढ़ी हैं। कुछ उत्पादक लगातार अच्छी गुणवत्ता की फसल लेकर आर्थिक रूप से टिकाऊ उत्पादन तक पहुंच चुके हैं।
उत्तर भी आसान विकल्प नहीं
हालांकि उत्तर की ओर बढ़ती गर्मी को वाइन उद्योग के लिए सीधा समाधान मानना जल्दबाजी होगी। स्वीडन में वाइन उत्पादन कर रहे फ्रांसीसी उत्पादक रोमां चिशेरी के अनुसार वहां करीब चार हजार हेक्टेयर जमीन संभावित रूप से वाइन के लिए उपयुक्त हो सकती है, लेकिन कठोर सर्दियों में नई बेलों को बचाए रखना बेहद महंगा है। बर्गंडी स्कूल ऑफ वाइन एंड स्पिरिट्स बिजनेस के वरिष्ठ व्याख्याता ह्यूगो सेइली के मुताबिक अभी यूरोप के वाइन उद्योग के नक्शे में बड़े बदलाव की बात करना जल्दबाजी होगी। फिर भी इतना तय है कि बदलती जलवायु में वही उत्पादक आगे रहेंगे, जो खेती के तरीके, अंगूर की किस्म और उत्पादन तकनीक में तेजी से बदलाव कर सकेंगे।
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फ्रांस-24 की रिपोर्ट के अनुसार पहले फ्रांस में अंगूर की कटाई सितंबर के अंत में शुरू होती थी और कई बार नवंबर की शुरुआत तक चलती थी। अब कई क्षेत्रों में यह काम अगस्त के अंतिम सप्ताह में ही शुरू हो गया है। लगातार बढ़ती गर्मी अंगूर को जल्दी पका रही है। दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के गिरोंद क्षेत्र में इस साल जंगल की आग 40 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को प्रभावित कर चुकी है, जिससे देश के महत्वपूर्ण वाइन उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
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चीनी बढ़ी, अम्लता घटी
गर्म मौसम में अंगूर जल्दी पकने से उनमें चीनी की मात्रा बढ़ रही है, जबकि अम्लता घट रही है। इससे फ्रांसीसी वाइन के पारंपरिक स्वाद और संरचना में बदलाव की आशंका है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंगूर में सुगंध और स्वाद पूरी तरह विकसित होने से पहले ही चीनी का स्तर बढ़ जाता है। वाइन उत्पादकों को अब तय करना पड़ रहा है कि अम्लता बचाने के लिए अंगूर जल्दी तोड़े जाएं या फिर ऐसा स्वाद स्वीकार किया जाए जो पारंपरिक फ्रांसीसी वाइन से अलग हो।गर्मी से बचने के लिए कुछ उत्पादक रात में कटाई कर रहे हैं, ताकि तेज धूप में अंगूर के ऑक्सीकरण का खतरा कम हो। बेलों पर पत्तियों की प्राकृतिक छतरी बनाने, मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए आवरण फसलों का इस्तेमाल करने और अधिक गर्मी सहने वाली अंगूर किस्में लगाने जैसे उपाय भी किए जा रहे हैं।
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पानी का संकट बढ़ा
यूरोप के वाइन उद्योग के भविष्य में पानी सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। स्पेन करीब 9.30 लाख हेक्टेयर अंगूर क्षेत्र के साथ दुनिया में पहले स्थान पर है। फ्रांस में करीब 7.83 लाख, चीन में 7.33 लाख, इटली में 7.28 लाख और तुर्किये में करीब 4.10 लाख हेक्टेयर में अंगूर की खेती होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक स्पेन के कई वाइन क्षेत्र तेजी से सूख रहे हैं और पानी की कमी भविष्य में बड़े उत्पादन क्षेत्रों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
उत्तर में खुल रही नई राह
जलवायु परिवर्तन का दूसरा पहलू इंग्लैंड में दिख रहा है। कभी बहुत ठंडा माना जाने वाला यह देश अब शैंपेन में इस्तेमाल होने वाली अंगूर किस्मों के लिए अनुकूल हो रहा है। कुछ फ्रांसीसी वाइन उत्पादक भी इंग्लैंड में निवेश कर रहे हैं। डेनमार्क के बोर्नहोम द्वीप तथा स्वीडन और नॉर्वे में भी वाइन उत्पादन की संभावनाएं बढ़ी हैं। कुछ उत्पादक लगातार अच्छी गुणवत्ता की फसल लेकर आर्थिक रूप से टिकाऊ उत्पादन तक पहुंच चुके हैं।
उत्तर भी आसान विकल्प नहीं
हालांकि उत्तर की ओर बढ़ती गर्मी को वाइन उद्योग के लिए सीधा समाधान मानना जल्दबाजी होगी। स्वीडन में वाइन उत्पादन कर रहे फ्रांसीसी उत्पादक रोमां चिशेरी के अनुसार वहां करीब चार हजार हेक्टेयर जमीन संभावित रूप से वाइन के लिए उपयुक्त हो सकती है, लेकिन कठोर सर्दियों में नई बेलों को बचाए रखना बेहद महंगा है। बर्गंडी स्कूल ऑफ वाइन एंड स्पिरिट्स बिजनेस के वरिष्ठ व्याख्याता ह्यूगो सेइली के मुताबिक अभी यूरोप के वाइन उद्योग के नक्शे में बड़े बदलाव की बात करना जल्दबाजी होगी। फिर भी इतना तय है कि बदलती जलवायु में वही उत्पादक आगे रहेंगे, जो खेती के तरीके, अंगूर की किस्म और उत्पादन तकनीक में तेजी से बदलाव कर सकेंगे।