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ईरान की चुनौती का जवाब बनेगा आईएमईसी: ट्रंप बोले- भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप कॉरिडोर से घटेगी निर्भरता

Thu, 24 Sep 2026 05:10 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 24 Sep 2026 05:10 AM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप कॉरिडोर को ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक मार्ग के तौर पर महत्वपूर्ण बताया है। कॉरिडोर का उद्देश्य भारत, खाड़ी देशों और यूरोप के बीच रेल, समुद्री, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत करना है। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और राजनीतिक अस्थिरता के कारण परियोजना के कुछ हिस्सों की गति प्रभावित हुई है।

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IMEC to counter challenge posed by Iran Trump says India West Asia-Europe corridor will reduce dependency
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप कॉरिडोर को ईरान समस्या का समाधान बताया। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर मध्य पूर्व के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को होर्मुज से दूर ले जाने में भूमिका निभाएगा। खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ बैठक में ट्रंप ने कहा कि पड़ोसी देशों में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के हमलों ने इस बात की आवश्यकता साबित कर दी है कि ऊर्जा आपूर्ति के लिए वैकल्पिक रास्ते बनाए जाएं। सितंबर 2023 में नई दिल्ली जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान कॉरिडोर के लिए हस्ताक्षर किए गए थे, जिनमें भारत, अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ शामिल हैं। एजेंसी

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परियोजना के मुख्य बिंदु और प्रस्तावित मार्ग
कॉरिडोर में दो मुख्य मार्ग शामिल हैं। एक पूर्वी मार्ग, जो भारत को अरब खाड़ी से जोड़ता है और एक उत्तरी मार्ग, जो खाड़ी को यूरोप से जोड़ता है।

बहु-आयामी नेटवर्क: इसमें एक लागत प्रभावी रेलवे नेटवर्क शामिल होगा, जो समुद्री और सड़क परिवहन को गति देगा। इसके अलावा, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए केबल और क्लीन हाइड्रोजन के निर्यात के लिए पाइपलाइन बिछाई जाएगी।
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रणनीतिक लाभ: यह कॉरिडोर भारत-यूरोप के बीच पारगमन समय को 40% से अधिक कम कर देगा। इसे चीन की 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' और ईरान-नियंत्रित समुद्री रास्तों के एक प्रमुख विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
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नई रेल लाइनों और बंदरगाहों पर काम शुरू, लेकिन रफ्तार धीमी
यूरोप में नई रेल लाइनों व बंदरगाहों पर काम शुरू हो चुका है, पर राजनीतिक अस्थिरता के कारण कोई अंतिम समय सीमा तय नहीं है। भारत-यूएई के बीच व्यापारिक आधार मजबूत हुआ है और डिजिटल इकोसिस्टम पर सहमति बनी है।

यूएई-सऊदी रेल नेटवर्क पर निर्माण जारी: यूएई और सऊदी अरब के आंतरिक रेल नेटवर्क पर निर्माण कार्य पहले से जारी है। हालांकि, यूएई के अल-गुवैफात और सऊदी अरब के हराध के बीच 269 किमी की रेलवे ट्रैक लिंक पर अभी भी निर्माण की आवश्यकता है।

ग्रीन हाइड्रोजन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: फ्रांस, इटली व सऊदी अरब में हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स पर काम आगे बढ़ रहा है, जिन्हें आईएमईसी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। आधिकारिक तौर पर अप्रैल 2025 से प्रमुख बंदरगाहों, हाई-वे और रेलवे लिंक्स से संबंधित बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी दर्ज की गई है।


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पश्चिम एशिया में तनाव से परियोजना के सामने चुनौती
पश्चिम एशिया में तनाव और इस्राइल-अरब क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति के कारण जॉर्डन और इस्राइल (हाइफा पोर्ट) के बीच बनने वाले क्रॉस-बॉर्डर रेलवे लिंक पर काम की गति धीमी रही है। सऊदी अरब और इस्राइल को जोड़ने वाले रेल लिंक के लिए राजनीतिक स्थिरता और बहुपक्षीय सहमति की प्रतीक्षा है।

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