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भारत: विदेश मंत्री जयशंकर बोले- मौजूदा संघर्षों से निपटने में यूएनएससी की नाकामी सुधार की जरूरत बताती है

Wed, 23 Sep 2026 11:36 PM IST
पवन पांडेय पीटीआई, न्यूयॉर्क
पीटीआई, न्यूयॉर्क Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 23 Sep 2026 11:36 PM IST
सार

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूएनएससी में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि मौजूदा संघर्षों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा खतरों से निपटने में परिषद की असमर्थता सुधार की आवश्यकता दिखाती है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ बदलावों से प्रभावित है और एल.69 तथा सी-10 देश सुधार के प्रयास जारी रखेंगे।

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UNSC's inability to address ongoing conflicts highlights urgency of reform: India
डॉ. एस. जयशंकर, विदेश मंत्री, भारत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार की जरूरत पर एक बार फिर जोर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि दुनिया में तेजी से हो रहे बड़े बदलावों का असर ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों पर पड़ रहा है। ऐसे समय में संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा व्यवस्था कई उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है। जयशंकर ने बुधवार को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में यूएनएससी सुधार को लेकर L.69 समूह की मंत्रिस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता की। बैठक में सेंट लूसिया के विदेश मंत्री अल्वा बैप्टिस्ट भी सह-अध्यक्ष रहे।
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संघर्षों पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत
जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद मौजूदा संघर्षों और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के सामने मौजूद खतरों से प्रभावी तरीके से निपटने में सक्षम नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि यही स्थिति सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत को और स्पष्ट करती है। उन्होंने कहा कि दुनिया में हो रहे अभूतपूर्व बदलावों का सबसे ज्यादा असर ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ रहा है। ऐसे में इन देशों की आवाज और प्रतिनिधित्व को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में उचित जगह मिलना जरूरी है।
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सुधार में देरी को लेकर भारत की चिंता
भारत ने कहा कि यूएनएससी में सुधार लागू करने में लगातार हो रही देरी ऐतिहासिक असमानता को बनाए रखती है। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की मांग करता रहा है। सुरक्षा परिषद में फिलहाल पांच स्थायी सदस्य हैं। इसके अलावा गैर-स्थायी सदस्य भी होते हैं। भारत का कहना है कि आज की वैश्विक परिस्थितियां कई दशक पहले की स्थिति से काफी अलग हैं। इसलिए संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख निर्णय लेने वाली संस्था की संरचना में भी बदलाव होना चाहिए।
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L.69 और C-10 साथ मिलकर कर रहे हैं प्रयास
बैठक में L.69 समूह की भूमिका पर भी चर्चा हुई। यह समूह मुख्य रूप से अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र, एशिया और प्रशांत क्षेत्र के उन देशों को साथ लाता है, जो सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार के पक्ष में हैं। जयशंकर ने कहा कि L.69 और C-10 के सदस्य मिलकर यूएनएससी सुधार की कोशिशों को आगे बढ़ा रहे हैं। C-10 अफ्रीकी संघ से जुड़ा समूह है, जिसमें 10 अफ्रीकी देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर शामिल हैं। भारत का कहना है कि ये देश सुरक्षा परिषद में सुधार से सीधे प्रभावित होने वाले पक्ष हैं और इसलिए उन्हें इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।


81वें महासभा सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर रविवार को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। यूएनएससी में सुधार का मुद्दा भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं में लंबे समय से शामिल रहा है। भारत का जोर सुरक्षा परिषद को ऐसी संस्था बनाने पर है, जिसमें आज की वैश्विक परिस्थितियों और विकासशील देशों की भूमिका को बेहतर तरीके से प्रतिनिधित्व मिले।
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