प्रतिबंधित आतंकी संगठन टीटीपी के हालिया ताबड़तोड़ हमलों और अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच मुख्य सीमा पर लगातार फायरिंग ने पाकिस्तान की नींद उड़ाकर रख दी है। नकदी संकट से जूझ रहे देश को गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल बुधवार को काबुल पहुंचा।
इस प्रतिनिधिमंडल ने तालिबानी शासन के कार्यवाहक उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर से मुलाकात की और आतंकरोधी उपायों समेत सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। इस उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब उनके पड़ोसी देश के साथ संबंध लगातार बिगड़ रहे हैं।
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काबुल में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल
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पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं ये नेता और अधिकारी
उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में ख्वाजा आसिफ के साथ इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के प्रमुख नदीम अंजुम, विदेश सचिव असद मजीद खान, अफगानिस्तान प्रभारी उबैदुर रहमान निजामानी और अफगानिस्तान के लिए पाकिस्तान के विशेष प्रतिनिधि मोहम्मद सादिक शामिल हैं।
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पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय
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सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर चर्चा के लिए काबुल में है प्रतिनिधिमंडल: विदेश मंत्रालय, पाकिस्तान
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि रक्षा मंत्री के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल आतंक रोधी उपायों सहित सुरक्षा संबंधी मसलों पर चर्चा करने के लिए अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार के अधिकारियों से मिलने के लिए आज काबुल में है।
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पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता में अफगान नेता व अधिकारी
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अफगान मंत्रिपरिषद ने बयान में क्या कहा?
अफगान मंत्रिपरिषद (प्रधानमंत्री) की ओर से एक बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय संपर्क, व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। इसमें कहा गया है कि अफगान उप प्रधानमंत्री ने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल से पाकिस्तान की जेलों में बंद तालिबान के कैदियों को रिहा करने को कहा। उन्होंने तोरखम और चमन के दो प्रमुख बॉर्डर क्रॉसिंग पॉइंट पर ज्यादा सुविधाओं को लेकर भी बात की।
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मुल्ला बरादर के साथ ख्वाजा आसिफ, नदीम अंजुम
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राजनीतिक और सुरक्षा मामलों से न प्रभावित हो व्यापार: अब्दुल गनी बरादर
बयान में बरादर के हवाले से कहा गया कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान पड़ोसी हैं और उनके बीच सौहार्दपूर्ण संबंध होने चाहिए। अफगानिस्तान का इस्लामिक अमीरात, पाकिस्तान के साथ वाणिज्यिक और आर्थिक संबंधों का विस्तार चाहता है, क्योंकि इस तरह के संबंध दोनों देशों के हित में हैं। बयान में कहा गया कि राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों को दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक मामलों को प्रभावित नहीं करना चाहिए। उसे राजनीति व सुरक्षा से जुड़ी परेशानियों से अलग रखा जाना चाहिए।