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Crisis deepens in Nepal following floods; the dead are becoming a threat to the living!
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नेपाल में बाढ़ के बाद संकट गहराया, मुर्दे बन रहे जिंदा लोगों के लिए खतरा!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम
Published by: Bhaskar Tiwari
Updated Mon, 31 Aug 2026 01:19 AM IST
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चीन के तिब्बत और नेपाल की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में आई भीषण प्राकृतिक आपदा का असर अब भी बड़े पैमाने पर दिखाई दे रहा है। 26 अगस्त को हिमनद के टूटने और बर्फ-पत्थरों के बड़े पैमाने पर खिसकने के बाद अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में भारी तबाही मचा दी। देखते ही देखते तेज बहाव के साथ पानी, मलबा और चट्टानें कई इलाकों में घुस गईं, जिससे घर, सड़कें, पुल, वाहन और जलविद्युत परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। नेपाल सरकार के मुताबिक राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और हजारों सुरक्षाकर्मियों तथा हेलीकॉप्टरों को अभियान में लगाया गया है। 30 अगस्त को सरकार ने बताया था कि 734 शव बरामद किए जा चुके हैं और करीब 2,498 लोग अब भी लापता हैं। हालांकि, बचाव अभियान के दौरान लगातार शव मिलने के कारण बाद की रिपोर्टों में मृतकों का आंकड़ा 768 और फिर 788 तक पहुंच गया। ऐसे में अंतिम आंकड़ा अभी भी बदल रहा है।
इस त्रासदी का असर नेपाल में रहने वाले लोगों के साथ-साथ विदेशी नागरिकों पर भी पड़ा है। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की बताई जा रही है और भारतीय नागरिकों तथा भारतीय मूल के लोगों के भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। भारत की ओर से भी अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने और राहत अभियान में सहयोग किया जा रहा है। नेपाल में हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन दुर्गम पहाड़ी इलाकों में अब भी राहत और खोज अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। लगातार बारिश, खराब सड़कें, मलबे से बंद रास्ते और नदियों का बदलता जलस्तर बचाव दलों के लिए मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।
सबसे गंभीर समस्या अब शवों के प्रबंधन और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सामने आ रही है। कई प्रभावित इलाकों में पर्याप्त शवगृह और फॉरेंसिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। बड़ी संख्या में बरामद शवों की पहचान करना भी चुनौती बना हुआ है। कुछ स्थानों पर शवों के खराब होने और संक्रमण के संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन को अस्थायी दफन जैसे कदम उठाने पड़े हैं, जबकि डीएनए नमूनों और अन्य पहचान संबंधी जानकारी को सुरक्षित रखा जा रहा है ताकि बाद में परिवारों को शव सौंपे जा सकें।
इस बीच भोटेकोशी नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ने से नई बाढ़ का खतरा भी पैदा हो गया है। अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों के लोगों और बचावकर्मियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। यानी एक तरफ हजारों लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में हैं, तो दूसरी तरफ बचे हुए लोगों के सामने भोजन, साफ पानी, स्वास्थ्य सेवाओं, आश्रय और सुरक्षित आवागमन जैसी बुनियादी जरूरतों का संकट खड़ा है। नेपाल के लिए यह आपदा अब केवल बचाव अभियान तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक गंभीर मानवीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में बदलती जा रही
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