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Gaza Peace Plan: ट्रंप की शांति योजना में क्या खास, गाजा को कौन चलाएगा? किसके लिए कितना हितकारी है प्रस्ताव
Tue, 30 Sep 2025 11:12 PM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन / नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन / नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 30 Sep 2025 11:12 PM IST
सार
Gaza Peace Plan: पश्चिम एशिया में बीते दो साल से हिंसक संघर्ष हो रहा है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है। इसका मकसद इलाके में शांति बहाल कर विकास का मार्ग प्रशस्त करना है। हालांकि, यह तभी सफल हो सकती है जब सभी हितधारक ईमानदारी से समझौता करने को तैयार हों। जानिए क्यों जटिल है ट्रंप का प्रस्ताव और इसका कार्यान्वयन
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गाजा शांति प्रस्ताव किसके लिए कितना हितकारी?
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में गाजा संकट को खत्म करने के लिए 20 बिंदुओं वाला शांति प्रस्ताव पेश किया है। यह योजना न केवल गाजा और इस्राइल बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की राजनीति, सुरक्षा और भविष्य की कूटनीति के लिए अहम मानी जा रही है। यह योजना चार बड़े बिंदुओं पर टिकी है, जिसमें युद्धविराम, शासन व्यवस्था, आर्थिक पुनर्निर्माण और अंतरराष्ट्रीय गारंटी शामिल है। अगर यह योजना लागू होती है तो गाजा का तत्काल मानवीय संकट कम हो सकता है। क्षेत्र में कुछ हद तक शांति लौट सकती है।
युद्धविराम और सुरक्षा ढांचा
ट्रंप ने प्रस्ताव रखा है कि तुरंत युद्धविराम लागू हो और इस्राइल गाजा से चरणबद्ध तरीके से अपनी सेनाएं हटाए। इसके बदले में गाजा से हमलों और रॉकेटों की रोकथाम सुनिश्चित की जाएगी। सुरक्षा निगरानी की बात की जाए तो गाजा में एक बहुराष्ट्रीय फोर्स की तैनाती की बात कही गई है, जिसमें अमेरिका, अरब देशों और संभवतः नाटो देशों की भागीदारी होगी। वहीं हथियारबंदी के तहत हमास और दूसरे उग्रवादी संगठनों को निहत्था करने की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय निगरानी में होगी।
योजना के बिंदु 6 में कहा गया है कि जो हमास सदस्य शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और 'अपने हथियारों को निष्क्रिय करने' के लिए प्रतिबद्ध होंगे, उन्हें माफी दी जाएगी। हमास के जो सदस्य गाजा छोड़ना चाहते हैं, उन्हें सुरक्षित मार्ग दिया जाएगा, जो जॉर्डन, मिस्र, कतर और ईरान हो सकता है। हमास ने लगभग दो दशकों तक गाजा पट्टी पर शासन किया है और इस्राइली रक्षा बलों के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी है, यह समझौता लागू करने के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। वहीं इस्राइल को भी अपना वादा निभाना होगा।
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यह भी पढ़ें - Gaza Peace Plan: 'तीन-चार दिन में शांति योजना पर जवाब दे हमास, वर्ना गंभीर परिणाम होंगे'; ट्रंप ने दी चेतावनी
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युद्धविराम और सुरक्षा ढांचा
ट्रंप ने प्रस्ताव रखा है कि तुरंत युद्धविराम लागू हो और इस्राइल गाजा से चरणबद्ध तरीके से अपनी सेनाएं हटाए। इसके बदले में गाजा से हमलों और रॉकेटों की रोकथाम सुनिश्चित की जाएगी। सुरक्षा निगरानी की बात की जाए तो गाजा में एक बहुराष्ट्रीय फोर्स की तैनाती की बात कही गई है, जिसमें अमेरिका, अरब देशों और संभवतः नाटो देशों की भागीदारी होगी। वहीं हथियारबंदी के तहत हमास और दूसरे उग्रवादी संगठनों को निहत्था करने की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय निगरानी में होगी।
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योजना के बिंदु 6 में कहा गया है कि जो हमास सदस्य शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और 'अपने हथियारों को निष्क्रिय करने' के लिए प्रतिबद्ध होंगे, उन्हें माफी दी जाएगी। हमास के जो सदस्य गाजा छोड़ना चाहते हैं, उन्हें सुरक्षित मार्ग दिया जाएगा, जो जॉर्डन, मिस्र, कतर और ईरान हो सकता है। हमास ने लगभग दो दशकों तक गाजा पट्टी पर शासन किया है और इस्राइली रक्षा बलों के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी है, यह समझौता लागू करने के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। वहीं इस्राइल को भी अपना वादा निभाना होगा।
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शासन व्यवस्था - गाजा को कौन चलाएगा?
सबसे कठिन सवाल यही है। ट्रंप की योजना में कहा गया है कि गाजा का शासन अस्थायी रूप से एक 'ट्रस्टी काउंसिल' संभालेगी। इसमें अरब देशों, अमेरिका और फलस्तीनी प्राधिकरण (पीए) के प्रतिनिधि होंगे। लंबे समय में गाजा और वेस्ट बैंक को मिलाकर एक 'एकीकृत फलस्तीनी प्रशासन' बनाने की कोशिश होगी। हमास को शासन से बाहर रखा जाएगा, हालांकि व्यावहारिक स्तर पर यह चुनौतीपूर्ण है।
इस योजना में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस्राइल गाजा पर कब्जा नहीं करेगा या उसे अपने में नहीं मिलाएगा। इसमें कहा गया है, 'इस्राइल की तरफ से इस समझौते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने के 72 घंटों के भीतर, सभी बंधकों, जीवित और मृत, को वापस कर दिया जाएगा।' सभी बंधकों की रिहाई के बाद, इस्राइल 250 आजीवन कारावास की सजा पाए कैदियों और 7 अक्तूबर 2023 के बाद हिरासत में लिए गए 1700 गाजावासियों को रिहा करेगा। हमास ने अभी भी 48 बंधकों को बंधक बना रखा है, इस्राइल को इनमें से 20 के जिंदा होने की उम्मीद है।
सबसे कठिन सवाल यही है। ट्रंप की योजना में कहा गया है कि गाजा का शासन अस्थायी रूप से एक 'ट्रस्टी काउंसिल' संभालेगी। इसमें अरब देशों, अमेरिका और फलस्तीनी प्राधिकरण (पीए) के प्रतिनिधि होंगे। लंबे समय में गाजा और वेस्ट बैंक को मिलाकर एक 'एकीकृत फलस्तीनी प्रशासन' बनाने की कोशिश होगी। हमास को शासन से बाहर रखा जाएगा, हालांकि व्यावहारिक स्तर पर यह चुनौतीपूर्ण है।
इस योजना में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस्राइल गाजा पर कब्जा नहीं करेगा या उसे अपने में नहीं मिलाएगा। इसमें कहा गया है, 'इस्राइल की तरफ से इस समझौते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने के 72 घंटों के भीतर, सभी बंधकों, जीवित और मृत, को वापस कर दिया जाएगा।' सभी बंधकों की रिहाई के बाद, इस्राइल 250 आजीवन कारावास की सजा पाए कैदियों और 7 अक्तूबर 2023 के बाद हिरासत में लिए गए 1700 गाजावासियों को रिहा करेगा। हमास ने अभी भी 48 बंधकों को बंधक बना रखा है, इस्राइल को इनमें से 20 के जिंदा होने की उम्मीद है।
आर्थिक पुनर्निर्माण और निवेश
ट्रंप की योजना का तीसरा स्तंभ गाजा की बर्बाद अर्थव्यवस्था को खड़ा करना है। ट्रंप ने अरब देशों, अमेरिका और यूरोपीय संघ से फंडिंग की बात कही है। इसके तहत 'गाजा रिकंस्ट्रक्शन फंडट बनाया जाएगा, जिसमें अरब खाड़ी देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थान निवेश करेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर (बिजली, पानी, अस्पताल, स्कूल, पोर्ट, एयरपोर्ट) पर भारी निवेश का खाका है। ट्रंप इसे 'बिजनेस-ड्रिवेन पीस (व्यवसाय-संचालित शांति)' कह रहे हैं- यानि, विकास से आतंक और अस्थिरता को पीछे धकेलना।
फलस्तीन का भविष्य और राज्य का सवाल
इस योजना में दो-राष्ट्र समाधान का संकेत तो है, लेकिन बहुत अस्पष्ट। फलस्तीन को भविष्य में राज्य का दर्जा देने पर विचार होगा, लेकिन पहले शांति और स्थिर शासन जरूरी बताया गया है। इस्राइल की सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता दी गई है।
यह भी पढ़ें - Gaza Crisis: गाजा में शांति स्थापित करने में मदद को तैयार रूस; राष्ट्रपति ट्रंप के प्रयासों का किया स्वागत
गाजा शांति योजना पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
इस्राइल ने योजना के अधिकतर हिस्सों को समर्थन, लेकिन सुरक्षा गारंटी और हमास को बाहर करने की शर्त पर जोर दे रहा है। वहीं फलस्तीनी पक्ष की ओर से मिली जुली प्रतिक्रिया है, लोग राहत और पुनर्निर्माण चाहते हैं, पर हमास और उसके समर्थक इसे कब्जे की वैधता मानते हैं। इस कड़ी में अरब देश- सऊदी अरब और यूएई जैसी ताकतें आर्थिक सहयोग पर सकारात्मक हैं, लेकिन फलस्तीनी राज्य की अस्पष्टता को लेकर संशय में है। जबकि रूस और चीन ने इस पहल का स्वागत किया है, पर अमेरिका-नेतृत्व वाली व्यवस्था पर सतर्कता जताई है। भारत और पाकिस्तान की बात करें तो भारत इस योजना को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम मानता है, वहीं पाकिस्तान फलस्तीन की राज्यसत्ता पर जोर दे रहा है।
ट्रंप की योजना का तीसरा स्तंभ गाजा की बर्बाद अर्थव्यवस्था को खड़ा करना है। ट्रंप ने अरब देशों, अमेरिका और यूरोपीय संघ से फंडिंग की बात कही है। इसके तहत 'गाजा रिकंस्ट्रक्शन फंडट बनाया जाएगा, जिसमें अरब खाड़ी देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थान निवेश करेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर (बिजली, पानी, अस्पताल, स्कूल, पोर्ट, एयरपोर्ट) पर भारी निवेश का खाका है। ट्रंप इसे 'बिजनेस-ड्रिवेन पीस (व्यवसाय-संचालित शांति)' कह रहे हैं- यानि, विकास से आतंक और अस्थिरता को पीछे धकेलना।
फलस्तीन का भविष्य और राज्य का सवाल
इस योजना में दो-राष्ट्र समाधान का संकेत तो है, लेकिन बहुत अस्पष्ट। फलस्तीन को भविष्य में राज्य का दर्जा देने पर विचार होगा, लेकिन पहले शांति और स्थिर शासन जरूरी बताया गया है। इस्राइल की सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता दी गई है।
यह भी पढ़ें - Gaza Crisis: गाजा में शांति स्थापित करने में मदद को तैयार रूस; राष्ट्रपति ट्रंप के प्रयासों का किया स्वागत
गाजा शांति योजना पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
इस्राइल ने योजना के अधिकतर हिस्सों को समर्थन, लेकिन सुरक्षा गारंटी और हमास को बाहर करने की शर्त पर जोर दे रहा है। वहीं फलस्तीनी पक्ष की ओर से मिली जुली प्रतिक्रिया है, लोग राहत और पुनर्निर्माण चाहते हैं, पर हमास और उसके समर्थक इसे कब्जे की वैधता मानते हैं। इस कड़ी में अरब देश- सऊदी अरब और यूएई जैसी ताकतें आर्थिक सहयोग पर सकारात्मक हैं, लेकिन फलस्तीनी राज्य की अस्पष्टता को लेकर संशय में है। जबकि रूस और चीन ने इस पहल का स्वागत किया है, पर अमेरिका-नेतृत्व वाली व्यवस्था पर सतर्कता जताई है। भारत और पाकिस्तान की बात करें तो भारत इस योजना को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम मानता है, वहीं पाकिस्तान फलस्तीन की राज्यसत्ता पर जोर दे रहा है।
योजना के सामने क्या हैं चुनौतियां?
गाजा से हमास को पूरी तरह हटाना कठिन होगा। इस योजना को लेकर इस्राइल में भी कड़ा विरोध हो सकता है कि सेना हटे और गाजा को आर्थिक छूट मिले। वहीं इस योजना के तहत फंडिंग की बात करें तो अरब देशों और पश्चिमी शक्तियों से वादे तो मिल सकते हैं, पर असल निवेश कितना होगा, यह सवाल बड़ा है। जबकि योजना की विश्वसनीयता को देखा जाए तो ट्रंप का ट्रैक रिकॉर्ड और उनकी डील मेकर छवि पर भरोसा करने को सभी तैयार नहीं हैं।
ट्रंप के लिए योजना का क्या मतलब?
अगर यह योजना लागू हो जाती है, तो यह ट्रंप की विरासत और नोबेल शांति पुरस्कार पाने की उनकी उम्मीदों को बढ़ावा देगा। पिछली प्रमुख इस्राइल-फलस्तीन शांति योजना, 1990 के दशक के ओस्लो समझौते में, दो पूर्व इस्राइली प्रधानमंत्रियों और फलस्तीनी नेता यासर अराफात को शांति का नोबेल पुरस्कार मिला था। इसके अलावा, इस योजना से ट्रंप को व्यवसायिक रूप से भी लाभ है, जिसमें 'नए गाजा' में होटल, मॉल और अपार्टमेंट बनाने की गुंजाइश है।
गाजा से हमास को पूरी तरह हटाना कठिन होगा। इस योजना को लेकर इस्राइल में भी कड़ा विरोध हो सकता है कि सेना हटे और गाजा को आर्थिक छूट मिले। वहीं इस योजना के तहत फंडिंग की बात करें तो अरब देशों और पश्चिमी शक्तियों से वादे तो मिल सकते हैं, पर असल निवेश कितना होगा, यह सवाल बड़ा है। जबकि योजना की विश्वसनीयता को देखा जाए तो ट्रंप का ट्रैक रिकॉर्ड और उनकी डील मेकर छवि पर भरोसा करने को सभी तैयार नहीं हैं।
ट्रंप के लिए योजना का क्या मतलब?
अगर यह योजना लागू हो जाती है, तो यह ट्रंप की विरासत और नोबेल शांति पुरस्कार पाने की उनकी उम्मीदों को बढ़ावा देगा। पिछली प्रमुख इस्राइल-फलस्तीन शांति योजना, 1990 के दशक के ओस्लो समझौते में, दो पूर्व इस्राइली प्रधानमंत्रियों और फलस्तीनी नेता यासर अराफात को शांति का नोबेल पुरस्कार मिला था। इसके अलावा, इस योजना से ट्रंप को व्यवसायिक रूप से भी लाभ है, जिसमें 'नए गाजा' में होटल, मॉल और अपार्टमेंट बनाने की गुंजाइश है।
अंतर्राष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती
इस योजना के तहत, अमेरिका अरब और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर एक अस्थायी अंतर्राष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (आईएसएफ) विकसित करेगा जिसे गाजा में तुरंत तैनात किया जाएगा। आईएसएफ, मिस्र और जॉर्डन के परामर्श से, जांच-परख वाले फलस्तीनी पुलिस बलों को प्रशिक्षण देगा। दीर्घकालिक आंतरिक सुरक्षा समाधान कहे जाने वाले आईएसएफ, इस्राइल और मिस्र के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा में मदद करेगा। आईएसएफ की तरफ से नियंत्रण स्थापित होते ही आईडीएफ इस क्षेत्र से हट जाएगा। यह वापसी विसैन्यीकरण से जुड़े मानकों, लक्ष्यों और समय-सीमाओं पर आधारित होगी, जिन पर आईडीएफ, आईएसएफ, गारंटर और अमेरिका के बीच सहमति होगी।
यह भी पढ़ें - Gaza Peace Plan: ट्रंप की गाजा शांति योजना का आठ अरब- इस्लामी देशों ने किया स्वागत, कहा- US की साझेदारी जरूरी
शांति योजना में भारत के लिए क्या?
भारत के लिए, इस क्षेत्र में शांति, उसके प्रवासी समुदाय, उसके आर्थिक हितों और रणनीतिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। बता दें कि इस्राइल में लगभग 18000 भारतीय हैं, ईरान में लगभग 5000-10000 और पूरे क्षेत्र में लगभग 90 लाख भारतीय हैं। पश्चिम एशिया भारत को उसकी 80 फीसदी तेल आपूर्ति प्रदान करता है। शांति योजना का ऊर्जा की कीमतों पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, प्रमुख अरब देश भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश करने के इच्छुक हैं; शांति से इन योजनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि इसमें पाकिस्तान का भागीदार होना भारत के लिए अच्छी खबर नहीं हैं।
इस योजना से गाजा पर इस्राइल का युद्ध समाप्त हो जाएगा, जिसमें अक्तूबर 2023 में शुरू होने के बाद से कम से कम 66000 लोग मारे गए हैं और 168000 घायल हुए हैं। माना जाता है कि हजारों लोग मारे गए हैं और मलबे के नीचे फंसे हुए हैं। इस युद्ध ने फिलिस्तीन के गाजा पट्टी क्षेत्र को तबाह कर दिया है, हजारों लोगों की जान ले ली है, विस्थापित हुए हैं और नागरिकों को अकाल के खतरे में डाल दिया है। ट्रंप के प्रस्ताव पर सहमति बनते ही युद्ध तुरंत समाप्त हो जाएगा।
इस योजना के तहत, अमेरिका अरब और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर एक अस्थायी अंतर्राष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (आईएसएफ) विकसित करेगा जिसे गाजा में तुरंत तैनात किया जाएगा। आईएसएफ, मिस्र और जॉर्डन के परामर्श से, जांच-परख वाले फलस्तीनी पुलिस बलों को प्रशिक्षण देगा। दीर्घकालिक आंतरिक सुरक्षा समाधान कहे जाने वाले आईएसएफ, इस्राइल और मिस्र के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा में मदद करेगा। आईएसएफ की तरफ से नियंत्रण स्थापित होते ही आईडीएफ इस क्षेत्र से हट जाएगा। यह वापसी विसैन्यीकरण से जुड़े मानकों, लक्ष्यों और समय-सीमाओं पर आधारित होगी, जिन पर आईडीएफ, आईएसएफ, गारंटर और अमेरिका के बीच सहमति होगी।
यह भी पढ़ें - Gaza Peace Plan: ट्रंप की गाजा शांति योजना का आठ अरब- इस्लामी देशों ने किया स्वागत, कहा- US की साझेदारी जरूरी
शांति योजना में भारत के लिए क्या?
भारत के लिए, इस क्षेत्र में शांति, उसके प्रवासी समुदाय, उसके आर्थिक हितों और रणनीतिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। बता दें कि इस्राइल में लगभग 18000 भारतीय हैं, ईरान में लगभग 5000-10000 और पूरे क्षेत्र में लगभग 90 लाख भारतीय हैं। पश्चिम एशिया भारत को उसकी 80 फीसदी तेल आपूर्ति प्रदान करता है। शांति योजना का ऊर्जा की कीमतों पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, प्रमुख अरब देश भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश करने के इच्छुक हैं; शांति से इन योजनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि इसमें पाकिस्तान का भागीदार होना भारत के लिए अच्छी खबर नहीं हैं।
इस योजना से गाजा पर इस्राइल का युद्ध समाप्त हो जाएगा, जिसमें अक्तूबर 2023 में शुरू होने के बाद से कम से कम 66000 लोग मारे गए हैं और 168000 घायल हुए हैं। माना जाता है कि हजारों लोग मारे गए हैं और मलबे के नीचे फंसे हुए हैं। इस युद्ध ने फिलिस्तीन के गाजा पट्टी क्षेत्र को तबाह कर दिया है, हजारों लोगों की जान ले ली है, विस्थापित हुए हैं और नागरिकों को अकाल के खतरे में डाल दिया है। ट्रंप के प्रस्ताव पर सहमति बनते ही युद्ध तुरंत समाप्त हो जाएगा।