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France: फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नु का इस्तीफा, एक महीने से भी कम समय का रहा कार्यकाल

Mon, 06 Oct 2025 02:19 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 06 Oct 2025 02:19 PM IST
सार

लेकोर्नु के इस्तीफे से फ्रांस में राजनीतिक संकट गहरा गया है और राष्ट्रपति मैक्रों पर भी दबाव बढ़ गया है। मैक्रों अब तक तीन असफल अल्पमत सरकारों का नेतृत्व कर चुके हैं।

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France Prime Minister Sebastien Lecornu has resigned less than a month after being appointed
फ्रांस के पीएम सेबेस्टियन लेकोर्नु (मध्य में) - फोटो : एक्स/Sebastien Lecornu

विस्तार

फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नु ने सोमवार को पीएम पद से इस्तीफा दे दिया। सेबेस्टियन लेकोर्नु का बतौर प्रधानमंत्री कार्यकाल एक महीने से भी कम समय का रहा। इसके साथ ही साल 1958 के बाद सेबेस्टियन लेकोर्नु फ्रांस के सबसे कम समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले नेता बन गए हैं।  
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मंत्रिमंडल के एलान के बाद निशाने पर आए लेकोर्नु
फ्रांस के प्रधानमंत्री का नियुक्ति के कुछ हफ्ते बाद ही इस्तीफा देना, फ्रांस की राजनीति में गहरे संकट का संकेत दे रहा है।  लेकोर्नु को 9 सितंबर को प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त किया गया था। लेकोर्नु को अपने मंत्रिमंडल की घोषणा के बाद ही उनकी अपनी पार्टी और विपक्षी खेमे की आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था। दरअसल लेकोर्नु के मंत्रिमंडल में 18 नामों में से 12 नाम पिछली सरकार में शामिल नेताओं के थे, जिसके बाद लेकोर्नु की आलोचना शुरू हो गई। लेकोर्नु को मंगलवार को अपनी सरकार का रोडमैप बताने के लिए नेशनल असेंबली को संबोधित करना था, लेकिन उससे पहले ही उनका इस्तीफा हो गया। 
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फ्रांस में बढ़ता घाटा और कर्ज बड़ी समस्या
लेकोर्नु के इस्तीफे से फ्रांस में राजनीतिक संकट गहरा गया है और राष्ट्रपति मैक्रों पर भी दबाव बढ़ गया है। मैक्रों अब तक तीन असफल अल्पमत सरकारों का नेतृत्व कर चुके हैं। लेकोर्नु को फ्रांस के बढ़ते घाटे को कम करने के लिए संसद में एक संतुलित बजट पारित कराने का राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण काम सौंपा गया था।2024 में फ्रांस का घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 5.8% और कर्ज 113% था। यह यूरोपीय संघ के नियमों से काफी ज्यादा हैं। यूरोपीय संघ के देश घाटे को 3 प्रतिशत तक सीमित रखते हैं। 

दक्षिणपंथी नेशनल रैली (RN) के नेता जॉर्डन बार्डेला ने पार्टी मुख्यालय में मरीन ले पेन के साथ मीडिया से बात करते हुए संसदीय चुनावों में शीघ्रता का आह्वान किया। राष्ट्रपति खेमे के भीतर भी असंतोष बढ़ रहा था। 


 
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