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Defence Pact: ऑस्ट्रेलिया और पापुआ न्यू गिनी के बीच ऐतिहासिक रक्षा संधि, चीन की चुनौती से निपटने की तैयारी

Mon, 06 Oct 2025 12:47 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेलबर्न
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेलबर्न Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 06 Oct 2025 12:47 PM IST
सार

समझौते को लेकर पापुआ न्यू गिनी स्थित चीनी दूतावास ने एक बयान जारी किया था। उस बयान में चीन ने कहा कि द्विपक्षीय समझौता विशेष प्रकृति का नहीं होना चाहिए और न ही ये किसी संप्रभु देश को किसी भी कारण से किसी तीसरे देश के साथ सहयोग से प्रतिबंधित करना चाहिए।

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Australia and Papua New Guinea sign historic defence treaty that raises China concern
रक्षा संधि पर हस्ताक्षर करते दोनों देशों के नेता - फोटो : एक्स/एंथनी अल्बानीज

विस्तार

ऑस्ट्रेलिया और पापुआ न्यू गिनी के नेताओं ने सोमवार को ऐतिहासिक रक्षा संधि पर हस्ताक्षर कर दिए। इस रक्षा संधि के जरिए दोनों देश प्रशांत महासागर में चीन के दबदबे को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। चीन का भी मानना है कि यह संधि उसे अनुचित रूप से निशाना बनाती है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने इस समझौते को एक पारस्परिक रक्षा संधि बताया जो उनके रक्षा बलों और सैन्य कर्मियों के बीच एकीकरण करेगी। 
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ऑस्ट्रेलिया और पापुआ न्यू गिनी के बीच इस तरह की पहली संधि
यह ऑस्ट्रेलिया और उसके सबसे करीबी पड़ोसी और पूर्व उपनिवेश पापुआ न्यू गिनी के बीच इस तरह की पहली संधि है। इस रक्षा संधि के अलावा ऑस्ट्रेलिया का, अमेरिका और न्यूजीलैंड के साथ भी गठबंधन स्तरीय सुरक्षा समझौता है, जो साल 1951 में हुआ था। ऑस्ट्रेलिया और पापुआ न्यू गिनी की संसद से मंजूरी मिलने के बाद इस संधि पर दोनों देशों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए। संधि पर हस्ताक्षर के बाद मीडिया से बात करते हुए ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बानीज ने कहा कि 'ऑस्ट्रेलिया के लिए यह बहुत सम्मान की बात है कि उसका निकटतम पड़ोसी उसका नया सहयोगी बन गया है।'
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चीन ने बयान जारी कर कहा- समझौते में किसी तीसरे देश से सहयोग को प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए
अल्बानीज ने आगे कहा, 'दोनों देश इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि हम ऐसी कोई भी गतिविधि नहीं करेंगे या कोई भी समझौता नहीं करेंगे जिससे इस संधि के कार्यान्वयन में बाधा आए।' बीते दिनों ऑस्ट्रेलिया और पापुआ न्यू गिनी के बीच हुए इस समझौते को लेकर पापुआ न्यू गिनी स्थित चीनी दूतावास ने एक बयान जारी किया था। उस बयान में चीन ने कहा कि द्विपक्षीय समझौता विशेष प्रकृति का नहीं होना चाहिए और न ही ये किसी संप्रभु देश को किसी भी कारण से किसी तीसरे देश के साथ सहयोग से प्रतिबंधित करना चाहिए। दूतावास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, 'इसे किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाने या उसके वैध अधिकारों और हितों को कमजोर करने से भी बचना चाहिए।'


चीन की चिंताओं को पापुआ न्यू गिनी ने खारिज किया
मारापे ने सोमवार को कहा 'पापुआ न्यू गिनी की विदेश नीति: सभी के मित्र, किसी के शत्रु नहीं की रही है और ये संधि भी उस नीति को कमजोर नहीं करती है।' उन्होंने कहा कि 'हम पारदर्शी रहे हैं। हमने चीन को बताया है कि ऑस्ट्रेलिया, हमारा पसंदीदा सुरक्षा साझेदार बन गया है और वे इसे समझते हैं।' गौरतलब है कि हाल के वर्षों में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया, दोनों ने पापुआ न्यू गिनी के साथ सैन्य संबंध बढ़ाए हैं, जिसे प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने में एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखा जाता है।

चीन ने सोलोमन द्वीप समूह के साथ एक सुरक्षा समझौता किया, जिससे दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में एक चीनी नौसैनिक अड्डा स्थापित होने की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया ने साल 2022 से पापुआ न्यू गिनी के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना शुरू कर दिया, जिसे प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे को रोकने के तौर पर देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया फिजी के साथ भी एक द्विपक्षीय रक्षा समझौते पर बातचीत कर रहा है।

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