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इमरान का 'नया पाकिस्तान', हर साल हजारों लड़कियों का होता है धर्मांतरण, बुजुर्गों से कराई जाती है शादी
Tue, 29 Dec 2020 03:30 PM IST
अनवर अंसारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: अनवर अंसारी
Updated Tue, 29 Dec 2020 03:30 PM IST
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पाक में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार
- फोटो : PTI
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पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के बारे में दुनियाभर के देश जानते हैं। वहीं, बताया गया है कि हर साल पाकिस्तान में 1,000 लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन कर उन्हें मुस्लिम बनाया जाता है। इसके पीछे की वजह लड़कियों की शादी उनसे अधिक उम्र के पुरुषों से करवाना है। इससे एक बार फिर प्रधानमंत्री इमरान खान के उस वादे की पोल खुल गई है, जिसमें वो कहते रहे हैं कि देश में अल्पसंख्यकों के साथ अच्छा बर्ताव किया जाता है।
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14 की उम्र में नेहा का जबरन धर्मांतरण कराया और...
नेहा नाम की एक ऐसी ही पीड़ित लड़की ने बताया कि 14 साल की उम्र में उसका जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया और उसे ईसाई से मुस्लिम बना दिया गया। इसके बाद उसकी शादी एक 45 वर्षीय आदमी से करवा दी गई। फिलहाल नेहा का पति जेल में है और वह कम उम्र में शादी एवं दुष्कर्म के आरोपों का सामना कर रहा है।
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नेहा धार्मिक अल्पसंख्यकों की लगभग 1,000 लड़कियों में से एक हैं, जिन्हें हर साल पाकिस्तान में इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए मजबूर किया जाता है। इन लड़कियों के धर्मांतरण की प्रमुख वजह गैर-सहमति के तहत होने वाले विवाहों के लिए मार्ग प्रशस्त करना है।
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यह भी पढ़ें: पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की बालिका से दुष्कर्म, जबरन किया धर्म परिवर्तन
लॉकडाउन में बढ़ गए मामले
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि धर्मांतरण के मामलों में लॉकडाउन के दौरान अधिक तेजी आई है, क्योंकि इस दौरान स्कूल बंद हैं और लड़कियों के घर पर रहने के दौरान उनकी निगरानी की जा रही है। इसके अलावा, इंटरनेट पर लड़कियों की तस्करी करने वाले भी अधिक सक्रिय हो गए हैं।
गौरतलब है कि इसी महीने अमेरिका के गृह विभाग ने पाकिस्तान को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए 'विशेष चिंता वाला देश' घोषित किया। हालांकि, पाकिस्तानी सरकार द्वारा लगातार इससे इनकार किया जाता रहा है। यह घोषणा 'अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग' द्वारा किए गए मूल्यांकन पर आधारित थी। इसमें कहा गया कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू, ईसाई और सिख समुदायों की लड़कियों को जबरन धर्म परिवर्तन के लिए अगवा किया गया और उनकी जबरन शादी करवाई गई।
अधिकांश लड़कियां सिंध के हिंदू समुदाय की, पर नेहा ईसाई समुदाय की
हालांकि, अधिकांश धर्म परिवर्तन कराई गईं लड़कियां सिंध प्रांत में रहने वाले हिंदू समुदाय से आती हैं, लेकिन हाल के दिनों में नेहा सहित दो लड़कियों के मामले सामने आए हैं, जो ईसाई समुदाय से जुड़े हुए हैं। इस घटना से पाकिस्तान में उथल-पुथल मच गई है।
माफिया जैसा जाल है धर्मांतरण कराने वालों का
एक कार्यकर्ता जिब्रान नासिर गैर मुस्लिम लड़कियों को जबरन शिकार बनाने वाले नेटवर्क को ‘माफिया’ जैसा बताते हैं। पाकिस्तान के एक स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग का कहना है कि जबरन धर्मांतरण एक मनी-मेकिंग जाल जैसा है, जिसमें शादियां कराने वाले इस्लामी मौलवी से लेकर इन निकाहों को वैध करार देने वाले भ्रष्ट मजिस्ट्रेट और दोषियों के खिलाफ किसी भी तरह की जांच करने से इनकार कर उनकी मदद करने वाले भ्रष्ट पुलिसकर्मी शामिल हैं।
अपने ही फंसाते हैं इस जाल में
आयोग के कार्यकर्ताओं का कहना है कि लड़कियों को जबरन धर्मांतरण के जाल में फंसाने का काम अमूमन उनके अपने जानकार या रिश्तेदार ही करते हैं। कई बार ये काम दुल्हन की तलाश में घूमने वाले तस्कर और ऐसे शक्तिशाली जमींदार भी करते हैं, जिनके कर्ज के बोझ में लड़की के मां-बाप बुरी तरह दबे होते हैं। नेहा को भी सालों पहले खुद जबरन धर्मांतरण का शिकार हुई, उसकी बुआ ही बहकाकर अपने साथ ले गई थी। नेहा की ही बिल्डिंग में रहने वाली उसकी बुआ ने अस्पताल में बीमार को देखने का बहाना बनाकर उसे साथ ले जाने के बाद धर्मांतरण करने वालों के हवाले कर दिया था।