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India-Australia Relations: भारत की यात्रा पर आएंगे ऑस्ट्रेलियाई उप प्रधानमंत्री, इन देशों का भी करेंगे दौरा
Sun, 01 Jun 2025 06:07 PM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कैनबरा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कैनबरा
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 01 Jun 2025 06:07 PM IST
सार
ऑस्ट्रेलिया के उपप्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स 2 जून से 5 जून तक दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के चार देशों – मालदीव, श्रीलंका, भारत और इंडोनेशिया – की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। यह जानकारी ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी की गई है।
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रिचर्ड मार्ल्स, ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री
- फोटो : ANI
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विस्तार
ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री, रिचर्ड मार्ल्स, 2 से 5 जून 2025 तक दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया का दौरा करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और अन्य देशों के साथ कूटनीतिक और रक्षा संबंधों को मजबूत करना है। रिचर्ड मार्ल्स मालदीव, श्रीलंका, भारत और इंडोनेशिया के नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। उनकी भारत यात्रा का यह समय खास है क्योंकि यह ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी की पांचवी सालगिरह के साथ मेल खाता है। यह साझेदारी दोनों देशों के रिश्तों और भारतीय महासागर के क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण को मजबूती प्रदान करती है। इस यात्रा के जरिए ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच रक्षा और कूटनीतिक संबंधों को और भी गहरा किया जाएगा।
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भारत की यात्रा का विशेष महत्व
रिचर्ड मार्ल्स की भारत यात्रा इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी की पांचवीं वर्षगांठ है। यह साझेदारी दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्र में मजबूत सहयोग का आधार है। भारत में वे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध और भी गहरे होने की उम्मीद है।
मालदीव, इंडोनेशिया और श्रीलंका में क्या होगा?
मालदीव और श्रीलंका में रिचर्ड मार्ल्स दोनों देशों के नेताओं से मिलकर ऑस्ट्रेलिया की ओर से दी जा रही मदद पर चर्चा करेंगे। खासतौर से यह मदद इन देशों की संप्रभु क्षमता को मजबूत करने के लिए है। यानी कि यह सहयोग उन्हें अपनी सुरक्षा और रक्षा को मजबूत करने में मदद करेगा। वहीं इंडोनेशिया में वे अपने समकक्ष (रक्षा मंत्री) से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र की प्रतिबद्धता को दोहराएंगे।
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रिचर्ड मार्ल्स ने क्या कहा?
वहीं इस यात्रा से पहले रिचर्ड मार्ल्स ने कहा, 'ऑस्ट्रेलिया अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को बहुत महत्व देता है। हमारा सहयोग इस पूरे क्षेत्र को खुला, समावेशी और लचीला बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है।' उन्होंने यह भी कहा, 'मैं नेताओं से मिलने और इस बात पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हूं कि हम मिलकर कैसे एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध क्षेत्र बना सकते हैं जो सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करता हो।'
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Deputy Prime Minister and Minister for Defence, Richard Marles, will travel to South and Southeast Asia from 2-5 June 2025 for high-level meetings. The Deputy Prime Minister will meet leaders and counterparts in the Maldives, Sri Lanka, India and Indonesia as part of the… pic.twitter.com/fPeoJcvqoz
— ANI (@ANI) June 1, 2025
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भारत की यात्रा का विशेष महत्व
रिचर्ड मार्ल्स की भारत यात्रा इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी की पांचवीं वर्षगांठ है। यह साझेदारी दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्र में मजबूत सहयोग का आधार है। भारत में वे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध और भी गहरे होने की उम्मीद है।
मालदीव, इंडोनेशिया और श्रीलंका में क्या होगा?
मालदीव और श्रीलंका में रिचर्ड मार्ल्स दोनों देशों के नेताओं से मिलकर ऑस्ट्रेलिया की ओर से दी जा रही मदद पर चर्चा करेंगे। खासतौर से यह मदद इन देशों की संप्रभु क्षमता को मजबूत करने के लिए है। यानी कि यह सहयोग उन्हें अपनी सुरक्षा और रक्षा को मजबूत करने में मदद करेगा। वहीं इंडोनेशिया में वे अपने समकक्ष (रक्षा मंत्री) से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र की प्रतिबद्धता को दोहराएंगे।
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रिचर्ड मार्ल्स ने क्या कहा?
वहीं इस यात्रा से पहले रिचर्ड मार्ल्स ने कहा, 'ऑस्ट्रेलिया अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को बहुत महत्व देता है। हमारा सहयोग इस पूरे क्षेत्र को खुला, समावेशी और लचीला बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है।' उन्होंने यह भी कहा, 'मैं नेताओं से मिलने और इस बात पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हूं कि हम मिलकर कैसे एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध क्षेत्र बना सकते हैं जो सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करता हो।'