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एससीओ: बिश्केक से क्या लेकर लौट रहे पीएम नरेंद्र मोदी? रूस-चीन-ईरान समेत इन देशों से साधा राष्ट्रीय हित

Tue, 01 Sep 2026 08:15 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 01 Sep 2026 08:15 PM IST
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PM Narendra Modi SCO Summit Kyrgyzstan Bishkek Russia China Iran Vladimir Putin Xi Jinping news updates
एससीओ शिखर सम्मेलन में चीन-रूस के राष्ट्राध्यक्षों के साथ पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
26 वें एससीओ शिखर सम्मलेन से बड़ा लक्ष्य साधकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत लौट रहे हैं। यात्रा के दौरान उन्होंने आधा दर्जन से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ वार्ता करके राष्ट्रीय हित साधा। एससीओ सदस्यों से आतंकवाद पर दोहरा मानदंड न अपनाने और कनेक्टिविटी के नाम पर देशों की संप्रभुता, अखंडता का सम्मान करने पर जोर दिया।
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12-13 सितंबर को भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 होना है। प्रधानमंत्री ने इसे सफल बनाने के लिए व्यक्तिगत रूप से एससीओ में उपस्थित सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया। इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ प्रधानमंत्री की भेंट, द्वपक्षीय वार्ता और तीनों नेताओं के बॉडी लैंग्वेज महत्वपूर्ण रहे। रूस के राष्ट्रपति के साथ प्रधानमंत्री एक बार फिर कार डिप्लोमेसी करते दिखे। 2025 में चीन में भी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति इस तरह की बॉडिंग दिखा चुके हैं। इसके साथ-साथ प्रधानमंत्री ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ भी चर्चा की। यह भारत और ईरान के आपसी संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। 
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भारत ने एससीओं के मंच से दो बिन्दुओं पर बहुत स्पष्टता से अपनी बात रखी। पहले बिन्दु में आतंकवाद और उसे मिलने वाली वित्तीय मदद निशाने पर रही। भारत ने साफ कहा कि आतंकवाद को लेकर दोहराया मानदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए। भारत ने 2006-07 से आतंकवाद को वित्तीय मदद के मामले में घेर रखा है। प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ के मंच से इसको लेकर फिर आह्वान किया। भारत का साफ कहना है कि आतंकवाद को सह, वित्तीय मदद और इसके इकोसिस्टम को ध्वस्त किया जाना आवश्यक है। दूसरा मुद्दा , कनेक्टिविटी का रहा। भारत ने स्पष्ट किया कि वह आपसी कनेक्टिविटी के पक्ष में है। लेकिन कनेक्टिविटी के मामले में राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।

भारत करेगा पहले एससीओ सभ्यता संवाद मंच का आयोजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में ‘एससीओ सभ्यता संवाद मंच’का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने पारस्परिक सांस्कृतिक संबंध को मजबूती देने के लिए इसकी वकालत की थी। एससीओ के सदस्य देशों ने इसे स्वीकार कर लिया और इसका पहला सत्र भारत में ही आयोजित किया जाएगा। इस तरह से भारत ने एससीओ में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। इससे देशों के बीच में लोगों से लोगों का संबंध, विश्वास तथा एक-दूसरे को जानने समझने को बल मिलेगा।

अब बात भारत के कारोबारी हित की 
किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव से प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय चर्चा को नया आयाम दिया। छात्रों की आवाजाही, कारोबारी रिश्ते, वाणिज्यिक सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। आर्मेनिया को भारत की कुछ रक्षा कंपनियां साजो-सामान की आपूर्ति करती हैं। इसके अलावा आर्मेनिया के साथ भारत तमाम क्षेत्र में कारोबारी रिश्ते को आगे बढ़ा सकता है। दोनों देशों के नेताओं ने इसकी न केवल संभावनाएं तलाशी, बल्कि आगे बढ़ना का संकल्प दिखाया। लाओस के राष्ट्राध्यक्ष के साथ भी चर्चा में दोनों देशों के आपसी हितों पर चर्चा हुई।  

युद्ध से मानवता का भला कहां?
प्रधानमंत्री अपनी बात कह जाते हैं। भारत के विश्वसनीय सामिरक साझीदार देश रूस के राष्ट्रपति से फिर उन्होंने भारत का पक्ष रखने में कोई संकोच नहीं किया। यूक्रेन के साथ रूस के जारी युद्ध को अब खत्म करने की दिशा में प्रयास करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने मानवता, संवाद और आपसी मुद्दे सुलझाने के लिए इसे महत्वपूर्ण बताया। 
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