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Medical Education: मेडिकल एजुकेशन का नया हब बन रहा किर्गिस्तान, क्यों भारतीय छात्रों की है ये पहली पसंद?

Sun, 01 Jun 2025 05:54 PM IST
शिव शुक्ला डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Sun, 01 Jun 2025 05:54 PM IST
सार

किर्गिस्तान में मेडिकल शिक्षा अब केवल शहरी छात्रों का सपना नहीं रहा, बल्कि अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों के छात्र भी इसके प्रति आकर्षित हो रहे हैं।

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Kyrgyzstan is becoming new hub of medical education, why is it first choice of Indian students?
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

विदेशों में मेडिकल शिक्षा के परिदृश्य में तेज़ी से बदलाव आ रहे हैं। अब भारतीय छात्र परंपरागत देशों जैसे रूस, यूक्रेन और फिलीपींस की बजाय नए और सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इस बदलाव में सबसे बड़ा नाम सामने आया है-किर्गिस्तान का। किर्गिस्तान का मेडिकल शिक्षा ढांचा अब धीरे-धीरे पारदर्शी और भरोसेमंद बनता जा रहा है। मध्य एशिया का यह शांत और स्थिर देश अपने व्यवस्थित शैक्षणिक वातावरण, भारत-समरूप पाठ्यक्रम और सुरक्षा के मद्देनजर भारतीय छात्रों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। दिल्ली, पटना, भोपाल, रायपुर, जयपुर और दक्षिण भारत के कई शहरों से छात्र अब किर्गिस्तान के संस्थानों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। किर्गिस्तान में आए इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह वहां भारतीय निवेशकों द्वारा स्थापित आधुनिक मेडिकल कॉलेज हैं। इन संस्थानों ने न केवल गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा का मॉडल खड़ा किया है, बल्कि भारत और किर्गिस्तान के बीच शैक्षणिक संबंधों को भी मजबूत किया है।

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पिछले कुछ वर्षों में विदेश में मेडिकल शिक्षा की दिशा में किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में स्थित इंटरनेशनल हायर स्कूल ऑफ मेडिसिन भारतीय छात्रों के लिए एक भरोसेमंद और लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरा है। पाठ्यक्रम भारत की नेशनल मेडिकल कमीशन  के नियमानुसार तैयार किया गया है। कॉलेज को डब्ल्यूएचओ,एफएआईएमईआर और ईसीएफएमजी जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मान्यता प्राप्त है, जिससे यहां पढ़ने वाले छात्रों को यूएसएमएलई और पीएलएबी जैसी विदेशी परीक्षाओं में भाग लेने का अवसर मिलता है। इसके अलावा संस्थान में एमआसीपी (ब्रिटेन की एक विशेष मेडिकल परीक्षा) की तैयारी के लिए बीएपीआईओ (यूके) द्वारा मान्यता प्राप्त कार्यक्रम भी संचालित होता है। प्रवेश प्रक्रिया सीधी और पारदर्शी होती है, किसी एजेंट या बिचौलिए की जरूरत नहीं पड़ती।
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हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक कॉलेज के अनुभव को पूरे देश की स्थिति का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता, लेकिन यह संकेत ज़रूर देता है कि यदि सही दिशा में प्रयास हों, तो चिकित्सा शिक्षा के लिए सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण विकल्प उपलब्ध हैं। मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता का मूल्यांकन केवल फीस या किसी विदेशी मान्यता से नहीं, बल्कि छात्र अनुभव, स्थानीय वातावरण और प्रशिक्षुता की प्रणाली से किया जाना चाहिए। कुछ संस्थानों में अब भारतीय छात्रों के लिए सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिसमें भारतीय खान पान, भाषा सहायता और सांस्कृतिक जुड़ाव शामिल हैं।
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पारदर्शिता और सीधी प्रवेश प्रक्रिया का असर
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश में पढ़ाई के लिए छात्रों को एजेंटों के माध्यम से नहीं, सीधे कॉलेज से संपर्क कर पारदर्शी प्रक्रिया के तहत दाखिला लेना चाहिए। किर्गिस्तान में अब कई संस्थान इस पद्धति को अपना रहे हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका सीमित हो रही है और छात्रों को बेहतर अनुभव मिल रहा है। किर्गिस्तान में भारतीय निवेशकों द्वारा स्थापित कुछ संस्थानों में भारतीय छात्रों के लिए न केवल अकादमिक सुविधा, बल्कि सांस्कृतिक, भाषाई और मानसिक स्वास्थ्य सहयोग की सेवाएं भी दी जा रही हैं। यह छात्रों को विदेश में आत्मनिर्भर और सुरक्षित अनुभव प्रदान करता है।


किर्गिस्तान में मेडिकल शिक्षा अब केवल शहरी छात्रों का सपना नहीं रहा, बल्कि अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों के छात्र भी इसके प्रति आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि, विदेश में पढ़ाई का निर्णय सोच-समझकर, प्रमाणिक स्रोतों से जानकारी लेकर और संस्थानों की सत्यता जांच कर ही करना चाहिए। क्योंकि जहां एक ओर संभावनाएं हैं, वहीं दूसरी ओर भटकाव और छल का खतरा भी बना हुआ है। 

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