1 अक्तूबर से इन नियमों में हुआ बदलाव जानें आम उपभोक्ता पर क्या होगा असर?
LPG उपभोक्ताओं के लिए सबसे अहम बदलाव है। सब्सिडी वाली घरेलू LPG रिफिल को विनियमित कीमत पर बुक करने और लागू सब्सिडी पाने के लिए Biometric Aadhaar Authentication (BAA) पूरा करना जरूरी हो गया है। सरकार के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं का सत्यापन पहले ही हो चुका है, उन्हें दोबारा कुछ करने की जरूरत नहीं है। सत्यापन डिलीवरी के समय, LPG वितरक के कार्यालय में या संबंधित तेल कंपनी के मोबाइल ऐप के जरिए किया जा सकता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने BAA नहीं कराया है, उनके लिए LPG पूरी तरह बंद नहीं होगी; वे अपनी पसंद दर्ज करके सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं, जबकि सब्सिडी वाली दर का लाभ लेने के लिए प्रमाणीकरण जरूरी है।
बैंक ग्राहकों के लिए भी कुछ बदलाव हैं। उदाहरण के लिए, SBI के कुछ सैलरी पैकेज खाताधारकों के लिए दूसरे बैंकों के ATM पर मुफ्त लेनदेन की मासिक सीमा 10 से घटाकर 5 की गई है। इसका मतलब है कि निर्धारित मुफ्त सीमा पार करने वाले ग्राहकों को लागू शुल्क देना पड़ सकता है।
दिल्ली-NCR के वाहन मालिकों के लिए वैध PUC प्रमाणपत्र और भी महत्वपूर्ण हो गया है। 1 अक्टूबर से पेट्रोल पंपों पर ऐसे वाहनों को ईंधन देने पर रोक लागू की गई है जिनका वैध Pollution Under Control प्रमाणपत्र नहीं है। इसलिए वाहन मालिकों को ईंधन भरवाने से पहले अपने PUC की वैधता जांच लेनी चाहिए।
एक और बड़ा बदलाव UPI में 15 अक्टूबर से आएगा। ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI भुगतानों पर 0.4% MDR लागू होगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि NPCI के अनुसार यह शुल्क सीधे उपभोक्ता से वसूलने के लिए नहीं है; इसलिए सामान्य ग्राहक के लिए हर बड़े UPI भुगतान पर अलग से शुल्क लगना जरूरी नहीं है। कुछ क्षेत्रों में फ्लैट MDR और छोटे व्यापारियों के लिए छूट जैसी व्यवस्थाएं भी हैं।
कुल मिलाकर, आम उपभोक्ता के लिए सबसे तत्काल प्रभाव LPG सब्सिडी के लिए Aadhaar biometric authentication, ATM उपयोग की सीमाओं और दिल्ली-NCR में PUC अनुपालन से जुड़ा है। वहीं UPI का बदलाव 15 अक्टूबर से प्रभावी होगा। इसलिए उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे अपने LPG KYC, वाहन PUC और बैंक खाते से संबंधित नियमों की स्थिति समय रहते जांच लें।