स्पैम कॉल को लेकर ट्राई ने दिखाई अपनी सख्ती,टेलीकॉम कंपनियों के लिए जारी किए नए नियम!
मोबाइल पर आने वाली स्पैम और परेशान करने वाली कॉल को रोकने के लिए अब टेलीकॉम कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ाई जा रही है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी TRAI ने अनचाही व्यावसायिक कॉल और मैसेज की पहचान तथा रोकथाम के लिए AI और Machine Learning आधारित तकनीक के इस्तेमाल को मजबूत किया है। नए नियमों और दिशा-निर्देशों का उद्देश्य यह है कि संदिग्ध स्पैम गतिविधियों की पहचान केवल ग्राहक की शिकायत के बाद ही न हो, बल्कि टेलीकॉम कंपनियां अपने नेटवर्क पर मौजूद तकनीकी सिस्टम के जरिए भी ऐसे मामलों का पता लगा सकें और जरूरी कार्रवाई कर सकें।
इस व्यवस्था में AI और Machine Learning आधारित सिस्टम संदिग्ध कॉलिंग पैटर्न और स्पैम गतिविधियों की पहचान करने में मदद करेंगे। अगर किसी कॉल या संचार को संदिग्ध UCC यानी Unsolicited Commercial Communication के रूप में चिन्हित किया जाता है, तो उससे जुड़ी जानकारी संबंधित टेलीकॉम ऑपरेटर तक पहुंचाई जा सकती है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि स्पैम गतिविधि किस नंबर, कनेक्शन या टेलीमार्केटर से जुड़ी है। इसके बाद नियमों के अनुसार संबंधित ऑपरेटर आवश्यक जांच और कार्रवाई कर सकता है।
इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अलग-अलग टेलीकॉम कंपनियों के बीच जानकारी साझा करना है। यदि किसी नेटवर्क पर किसी नंबर या संस्था से जुड़ी संदिग्ध स्पैम गतिविधि सामने आती है, तो उससे संबंधित पहचान संबंधी जानकारी दूसरे ऑपरेटरों के साथ साझा की जा सकती है। इससे किसी स्पैमर के लिए अलग-अलग कंपनियों के नेटवर्क पर कई कनेक्शनों का इस्तेमाल करके अपनी गतिविधि जारी रखना मुश्किल हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति या संस्था के पास एक से ज्यादा कनेक्शन हैं, तो संबंधित नेटवर्क पर उनके दूसरे कनेक्शनों की भी जांच की जा सकती है।
TRAI की व्यवस्था में AI और ML आधारित UCC_Detect जैसे तकनीकी उपायों को भी महत्व दिया गया है। इनका उद्देश्य स्पैम कॉल और संदेशों के पैटर्न को पहचानना तथा संदिग्ध गतिविधियों की समय रहते पहचान करना है। इसके अलावा टेलीकॉम कंपनियों को स्पैम से संबंधित डेटा और संकेतों का विश्लेषण करने के लिए तकनीकी प्रणालियां मजबूत करने की आवश्यकता है। इससे बड़े पैमाने पर होने वाली अनचाही व्यावसायिक कॉलिंग की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
स्पैम करने वाले नंबरों के खिलाफ कार्रवाई के प्रावधान भी मौजूद हैं। नियमों के तहत उल्लंघन पाए जाने पर चेतावनी, उपयोग पर प्रतिबंध या संबंधित टेलीकॉम संसाधनों को डिस्कनेक्ट करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर या बार-बार होने वाले उल्लंघनों की स्थिति में स्पैमर को ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान भी है। हालांकि, किसी नंबर पर कार्रवाई करने से पहले लागू नियमों और जांच प्रक्रिया का पालन किया जाता है।
इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य मोबाइल यूजर्स को लगातार आने वाली अनचाही व्यावसायिक कॉल और मैसेज से राहत दिलाना तथा टेलीकॉम नेटवर्क पर स्पैम गतिविधियों को नियंत्रित करना है। इसके बावजूद ग्राहकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अगर किसी नंबर से संदिग्ध या परेशान करने वाली कॉल आती है, तो उसे रिपोर्ट करना, ब्लॉक करना और उपलब्ध शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल करना चाहिए। इस तरह तकनीक, टेलीकॉम कंपनियों की निगरानी और ग्राहकों की रिपोर्टिंग—तीनों मिलकर स्पैम कॉल और धोखाधड़ी से जुड़े संचार को कम करने में मदद कर सकते हैं।