क्या एपल तोड़ पाएगा सैमसंग की बादशाहत, जानिए क्या कहते हैं बाजार के एक्सपर्ट!
भारत में फोल्डेबल स्मार्टफोन बाजार लंबे समय से Samsung के मजबूत प्रभाव में रहा है। कंपनी ने फोल्डेबल सेगमेंट में शुरुआत से ही अलग-अलग कीमत और जरूरत के हिसाब से कई मॉडल पेश किए हैं। दूसरी ओर, Apple ने इस बाजार में एंट्री करते हुए बिल्कुल अलग रणनीति अपनाई है। करीब 3 लाख रुपये की शुरुआती कीमत वाला iPhone Duo सीधे प्रीमियम फोल्डेबल सेगमेंट को निशाना बनाता है। यही कीमत दोनों कंपनियों की रणनीति के बीच सबसे बड़ा अंतर दिखाती है। Samsung की कोशिश जहां फोल्डेबल फोन को ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की है, वहीं Apple अपने पहले फोल्डेबल को एक अल्ट्रा-प्रीमियम प्रोडक्ट के तौर पर पेश कर रहा है। Samsung के पास Galaxy Z Fold और Galaxy Z Flip जैसे अलग-अलग फॉर्म फैक्टर वाले मॉडल हैं, जिससे कंपनी को बाजार के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद ग्राहकों को आकर्षित करने का मौका मिलता है।
खासकर Flip सीरीज अपेक्षाकृत कम कीमत के जरिए उन यूजर्स को फोल्डेबल अनुभव देने की कोशिश करती है जो इस तकनीक को पहली बार आजमाना चाहते हैं। इसके मुकाबले Apple ने फिलहाल कीमत के मामले में कोई बड़ा समझौता नहीं किया है। लगभग 3 लाख रुपये की कीमत इसे आम प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदार की पहुंच से काफी ऊपर रखती है और इसका सीधा मुकाबला उन ग्राहकों से होगा जो कीमत से ज्यादा ब्रांड, डिजाइन, कैमरा, परफॉर्मेंस और Apple के इकोसिस्टम को महत्व देते हैं। Apple की यह रणनीति उसके पारंपरिक बिजनेस मॉडल से भी मेल खाती है, जिसमें कंपनी अक्सर बाजार के सबसे प्रीमियम हिस्से पर ज्यादा ध्यान देती है और हाई मार्जिन वाले डिवाइस के जरिए अपनी ब्रांड वैल्यू मजबूत करती है। वहीं Samsung का फायदा यह है कि वह कई साल से फोल्डेबल तकनीक पर काम कर रहा है और उसके पास हार्डवेयर के साथ-साथ इस कैटेगरी का लंबा अनुभव भी है। फोल्डेबल फोन में सिर्फ स्क्रीन को मोड़ने की तकनीक ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि हिंज की मजबूती, डिवाइस की मोटाई, बैटरी, सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन और लंबे समय तक टिकाऊपन भी ग्राहकों के फैसले को प्रभावित करते हैं। ऐसे में Apple को सिर्फ शानदार हार्डवेयर बनाने से आगे बढ़कर यह साबित करना होगा कि उसका फोल्डेबल अनुभव Samsung से बेहतर या कम से कम अलग क्यों है।
हालांकि Apple की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल यूजर बेस और मजबूत इकोसिस्टम हो सकता है। अगर मौजूदा iPhone यूजर्स बड़ी स्क्रीन और फोल्डेबल डिजाइन की तलाश में हैं, तो वे Apple के नए डिवाइस की ओर आसानी से आकर्षित हो सकते हैं। दूसरी तरफ, Samsung के पास कीमतों की ज्यादा रेंज होने के कारण बाजार को व्यापक स्तर पर कवर करने की क्षमता बनी रहेगी। इसलिए कीमत को देखें तो Apple की रणनीति बाजार की मात्रा से ज्यादा प्रीमियम वैल्यू पर केंद्रित दिखाई देती है, जबकि Samsung की रणनीति विविधता और ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच बनाने की है। आने वाले समय में असली मुकाबला इस बात पर निर्भर करेगा कि ग्राहक Apple के प्रीमियम फोल्डेबल अनुभव के लिए लगभग 3 लाख रुपये खर्च करने को कितने तैयार होते हैं। अगर Apple अपने ब्रांड और इकोसिस्टम की ताकत के दम पर बड़ी संख्या में मौजूदा iPhone ग्राहकों को फोल्डेबल सेगमेंट में खींच लेता है, तो Samsung की बादशाहत को निश्चित रूप से चुनौती मिल सकती है। लेकिन कीमत के मामले में Samsung की व्यापक रेंज उसे फिलहाल एक मजबूत बढ़त देती है।