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Devotees will witness eight forms of Lord Ganesha during Ganeshotsav; the festival will be adorned with Bundeli folk art.
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गणेशोत्सव में अष्ट रूपों के होंगे दर्शन, बुंदेली लोककला से सजेगा महोत्सव
नीरज नरवरिया
Updated Tue, 08 Sep 2026 08:08 PM IST
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झांसी। खंडेराव गेट स्थित श्री गणेश सत्संग भवन में भगवान गणपति के अष्ट रूपों की मनोहारी झांकी के साथ बुंदेली लोक संस्कृति की आकर्षक छटा देखने को मिलेगी। महोत्सव में बच्चे और लोक कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। बुंदेली राई, ढाक, गोट और ख्याल गायन समेत विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
श्री गणेश सत्संग भवन में गणेश महोत्सव की शुरुआत वर्ष 1950 में हुई थी। इस बार महोत्सव का 76वां वर्ष मनाया जाएगा। मुख्य संचालक सीताराम कुशवाहा ने बताया कि 11 सितंबर से महोत्सव की शुरुआत होगी। इस दौरान अखंड श्रीरामचरितमानस पाठ और सुंदरकांड का आयोजन किया जाएगा। 13 सितंबर को भव्य मंगल कलश यात्रा निकाली जाएगी। भगवान गणेश के आगमन पर जगह-जगह स्वागत किया जाएगा। 14 सितंबर को विधि-विधान से भगवान गणेश की प्रतिमा विराजमान की जाएगी।
उन्होंने बताया कि गणेश उत्सव में कई धार्मिक और सामाजिक संगठन उत्साहपूर्वक सहयोग करते हैं। बुंदेली लोक कला एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें बुंदेली राई नृत्य विशेष आकर्षण रहेगा।
ख्याल गायन और मटकी नृत्य होगा आकर्षण
महोत्सव में विद्यार्थियों के लिए चित्रकला, मेहंदी, रंगोली, कथक नृत्य और गायन प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। भजन संध्या के साथ बुंदेली ढाक, गोट, ख्याल सम्मेलन, सुआटा और राई नृत्य की प्रस्तुतियां होंगी। राजस्थान का मटकी नृत्य भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेगा।
अष्ट रूपों की सजेगी मनोहारी झांकी
महोत्सव में भगवान गणपति के अष्ट रूपों—वक्रतुंड, एकदंत, महोदर, लंबोदर, विकट, गजानन, धूम्रवर्ण और विघ्नराज—की दिव्य झांकी सजाई जाएगी। झांकी स्थल पर गणेश जी की करीब 500 से 600 लघु प्रतिमाएं भी श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखी जाएंगी। बताया गया कि इनमें कई प्रतिमाएं करीब 50 वर्ष पुरानी हैं।
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