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अस्थायी पुलिया से जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे ग्रामीण

Tue, 04 Aug 2020 10:58 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2020 10:58 PM IST
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Villagers are risking their lives due to temporary culvert
असी गंगा घाटी क्षेत्र में मानसून सीजन ने ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ा दी हैं। क्षेत्र के गांवों को जोड़ने वाले रास्ते और पैदल पुल वर्ष 2012 की आपदा के बाद से बदहाल पड़े हैं। बार-बार मांग करने पर भी कार्रवाई नहीं होने से मायूस ग्रामीण स्वयं श्रमदान कर कामचलाऊ पुलिया एवं रास्ते बनाकर जोखिम भरी आवाजाही करने को मजबूर हैं।
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वर्ष 2012-13 में असी गंगा में आई बाढ़ ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। इसके बाद सरकार ने बाढ़ में बहे मोटर पुलों का निर्माण तो कराया, लेकिन गंगोरी-संगमचट्टी मोटर मार्ग के साथ ही अगोड़ा आदि गांवों के पैदल संपर्क मार्ग तथा डोडीताल एवं छानियों को जोड़ने वाली पैदल पुलियों की सुध नहीं ली। डोडीताल ट्रैक बदहाल होने से पर्यटकों को खासी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। मोरापड़ा, मोरसुना, सिल्याना, कुचुका, बेबरा एवं मांझी स्थित छानियों तक आवाजाही के लिए ग्रामीण जोन जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
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बेबरा में जड़ी गाड़ पर बीते साल ग्रामीणों द्वारा तैयार की गई अस्थायी पुलिया गदेरे के उफान में बहने के कारण ग्रामीणों का बेबरा और मांझी में बनी छानियों से संपर्क कट गया था।
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अगोड़ा गांव के प्रधान मुकेश पंवार ने बताया कि प्रशासन एवं वन विभाग द्वारा सुध नहीं लिए जाने पर एक बार फिर ग्रामीणों ने श्रमदान कर बेबरा में जड़ी गाड़ पर गिरा हुआ पेड़ डालकर अस्थायी पुलिया तैयार की है। श्रमदान कर अस्थायी पुलिया बनाने वाले मुकेश रावत, जयभगवान, प्रवीण, दीवान सिंह, शरद सिंह, विनोद सिंह आदि ग्रामीणों ने कहा कि ग्रामीण हर साल यहां पुलिया बनाते हैं, जो मानसून सीजन में गदेरे में पानी बढ़ने पर ध्वस्त हो जाती है। उन्होंने बताया कि मोरापड़ा, मोरसुना, सिल्याना आदि की छानियों तक आवाजाही के लिए लगी ट्राली भी खस्ताहाल है।

गंगोरी-संगमचट्टी मोटर मार्ग को दुरुस्त कराने के लिए पीएमजीएसवाई को निर्देश दिए गए हैं। साथ ही राजस्व उपनिरीक्षकों से क्षेत्र में बदहाल पैदल मार्ग एवं पुलियों की सूची मांगी गई है। ताकि शीघ्र आगणन तैयार कराकर आपदा मद से कार्य कराए जा सकें।
देवेंद्र सिंह नेगी, एसडीएम भटवाड़ी उत्तरकाशी।
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