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Uttarkashi News: स्वरोजगार की मिसाल बना ट्राउट मछली उत्पादन
Mon, 12 Jan 2026 04:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Mon, 12 Jan 2026 04:48 PM IST
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सिंगोट गांव की समिति हर साल तीन टन मछली का कर रही उत्पादन
आईटीबीपी और स्थानीय बाजार में हो रही सप्लाई
उत्तरकाशी। डुंडा ब्लॉक के सिंगोट गांव में ट्राउट मत्स्य पालन का प्रयोग सफल साबित हो रहा है। गांव की श्री नागराजा मत्स्य जीवी उत्पादन सहकारी समिति हर वर्ष यहां लगभग तीन टन ट्राउट मछली उत्पादन कर रही है। जिसकी सप्लाई आईटीबीपी और स्थानीय बाजार में हो रही है।
ग्रामीणों ने मत्स्य पालन को सहकारिता विभाग से जुड़कर श्री नागराजा मत्स्य जीवी उत्पादन सहकारी समिति का गठन किया था। आज समिति आत्मनिर्भरता और रोजगार की सशक्त मिसाल बन चुकी है। सिंगोट निवासी विनय कलूड़ा बताते हैं कि समिति ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत मत्स्य विभाग से 44 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया, जिसमें 50 प्रतिशत सब्सिडी दी गई। गांव में ही आजीविका सृजन के उद्देश्य से समिति की ओर से 20 ट्राउट मछली टैंक और 6 स्थानीय मछली टैंक स्थापित किए गए हैं, जिससे प्रतिवर्ष 20 से 22 लाख रुपये का उत्पादन हो रहा है।
ट्राउट मछली 60 हजार रुपये प्रति क्विंटल और स्थानीय मछली 300 रुपये प्रति किलो की दर से बेची जा रही है। भविष्य में समिति का लक्ष्य उत्पादन बढ़ाकर 5 टन और वार्षिक आय 30 लाख रुपये तक पहुंचाना है। वर्तमान में समिति से 34 सदस्य जुड़े हैं। इसके अलावा 14 अन्य लोगों को भी रोजगार से जोड़ा गया है।
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विनय ने बताया कि समिति की ट्राउट मछली की आपूर्ति मुख्य रूप से आईटीबीपी मातली को की जा रही है। पहले बीज विभाग से उपलब्ध की जाती थी। अब विभागीय प्रशिक्षण के बाद समिति स्वयं मछली बीज उत्पादन कर अन्य उत्पादकों को भी 5 रुपये प्रति पीस की दर से उपलब्ध करा रही है।
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आईटीबीपी और स्थानीय बाजार में हो रही सप्लाई
उत्तरकाशी। डुंडा ब्लॉक के सिंगोट गांव में ट्राउट मत्स्य पालन का प्रयोग सफल साबित हो रहा है। गांव की श्री नागराजा मत्स्य जीवी उत्पादन सहकारी समिति हर वर्ष यहां लगभग तीन टन ट्राउट मछली उत्पादन कर रही है। जिसकी सप्लाई आईटीबीपी और स्थानीय बाजार में हो रही है।
ग्रामीणों ने मत्स्य पालन को सहकारिता विभाग से जुड़कर श्री नागराजा मत्स्य जीवी उत्पादन सहकारी समिति का गठन किया था। आज समिति आत्मनिर्भरता और रोजगार की सशक्त मिसाल बन चुकी है। सिंगोट निवासी विनय कलूड़ा बताते हैं कि समिति ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत मत्स्य विभाग से 44 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया, जिसमें 50 प्रतिशत सब्सिडी दी गई। गांव में ही आजीविका सृजन के उद्देश्य से समिति की ओर से 20 ट्राउट मछली टैंक और 6 स्थानीय मछली टैंक स्थापित किए गए हैं, जिससे प्रतिवर्ष 20 से 22 लाख रुपये का उत्पादन हो रहा है।
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ट्राउट मछली 60 हजार रुपये प्रति क्विंटल और स्थानीय मछली 300 रुपये प्रति किलो की दर से बेची जा रही है। भविष्य में समिति का लक्ष्य उत्पादन बढ़ाकर 5 टन और वार्षिक आय 30 लाख रुपये तक पहुंचाना है। वर्तमान में समिति से 34 सदस्य जुड़े हैं। इसके अलावा 14 अन्य लोगों को भी रोजगार से जोड़ा गया है।
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विनय ने बताया कि समिति की ट्राउट मछली की आपूर्ति मुख्य रूप से आईटीबीपी मातली को की जा रही है। पहले बीज विभाग से उपलब्ध की जाती थी। अब विभागीय प्रशिक्षण के बाद समिति स्वयं मछली बीज उत्पादन कर अन्य उत्पादकों को भी 5 रुपये प्रति पीस की दर से उपलब्ध करा रही है।