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सुक्की से लौटा गंगा सांस्कृतिक यात्रा का जत्था
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
Updated Sat, 13 Feb 2016 10:35 PM IST
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हर्षिल घाटी में भारी बर्फबारी के चलते गंगोत्री जा रहे गंगा सांस्कृतिक यात्रा के जत्थे को सुक्की टॉप से ही लौटना पड़ा। अब यात्रा मनेरी उत्तरकाशी से शुरू होगी।
बता दें कि पूर्वी क्षेत्र संस्कृति केंद्र कोलकाता की ओर से 14 फरवरी को गंगोत्री से गंगा सांस्कृतिक यात्रा का शुभारंभ किया जाना तय था। इसके लिए यात्रा जत्थे में शामिल 160 लोग शनिवार को उत्तरकाशी से गंगोत्री की ओर जा रहे थे।
शाम करीब पांच बजे सुक्की टॉप में भारी बर्फबारी के चलते गंगोत्री हाईवे फिसलन भरा होने के कारण जत्था वहीं से लौट आया। यात्रा के स्थानीय संयोजक रतनमणि नौटियाल ने बताया कि भारी बर्फबारी के चलते वाहन सुक्की टॉप से आगे नहीं बढ़ पाए। जोखिम को देखते हुए यात्री दल वहीं से लौट आया है। अब रविवार को मनेरी उत्तरकाशी से यात्रा का शुभारंभ किया जाएगा।
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पूर्वी क्षेत्र संस्कृति केंद्र कोलकाता के निदेशक ओमप्रकाश भारती ने बताया कि 14 फरवरी को गंगोत्री से शुरू होने वाली यात्रा 13 मार्च को गंगा सागर में संपन्न होगी।
यात्रा का उद्देश्य गंगा की विरासत एवं धरोहर की खोज और दर्शन है। पूर्व में तैयार किए गए गंगा के सांस्कृतिक मानचित्र के अनुसार गंगोत्री से गंगा सागर तक के क्षेत्र में 27 बोली-भाषाएं बोली जाती हैं। यहां नृत्य के 127 रूप हैं तथा 260 लोक गायन शैलियां हैं।
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बता दें कि पूर्वी क्षेत्र संस्कृति केंद्र कोलकाता की ओर से 14 फरवरी को गंगोत्री से गंगा सांस्कृतिक यात्रा का शुभारंभ किया जाना तय था। इसके लिए यात्रा जत्थे में शामिल 160 लोग शनिवार को उत्तरकाशी से गंगोत्री की ओर जा रहे थे।
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शाम करीब पांच बजे सुक्की टॉप में भारी बर्फबारी के चलते गंगोत्री हाईवे फिसलन भरा होने के कारण जत्था वहीं से लौट आया। यात्रा के स्थानीय संयोजक रतनमणि नौटियाल ने बताया कि भारी बर्फबारी के चलते वाहन सुक्की टॉप से आगे नहीं बढ़ पाए। जोखिम को देखते हुए यात्री दल वहीं से लौट आया है। अब रविवार को मनेरी उत्तरकाशी से यात्रा का शुभारंभ किया जाएगा।
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पूर्वी क्षेत्र संस्कृति केंद्र कोलकाता के निदेशक ओमप्रकाश भारती ने बताया कि 14 फरवरी को गंगोत्री से शुरू होने वाली यात्रा 13 मार्च को गंगा सागर में संपन्न होगी।
यात्रा का उद्देश्य गंगा की विरासत एवं धरोहर की खोज और दर्शन है। पूर्व में तैयार किए गए गंगा के सांस्कृतिक मानचित्र के अनुसार गंगोत्री से गंगा सागर तक के क्षेत्र में 27 बोली-भाषाएं बोली जाती हैं। यहां नृत्य के 127 रूप हैं तथा 260 लोक गायन शैलियां हैं।