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Uttarkashi News: मुखबा गांव में धूमधाम से मनाया गया सेलकू मेला
Thu, 17 Sep 2026 06:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Thu, 17 Sep 2026 06:52 PM IST
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लोगों ने देव डोलियों के साथ किया रासो-तांदी
उत्तरकाशी। मां गंगा के मायके मुखबा गांव में समेश्वर देवता का पारंपरिक सेलकू मेला धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया गया। दो दिनों तक चले मेले में ग्रामीणों के साथ दूर-दराज के गांवों से पहुंचे लोगों ने देव डोलियों के साथ रासो-तांदी नृत्य कर लोक संस्कृति की अनूठी छटा बिखेरी। मेले के समापन पर ग्रामीणों ने बुग्यालों से लाए गए फूलों को प्रसाद के रूप में ग्रहण कर सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
मेले का शुभारंभ पहले दिन रात को पारंपरिक रूप से भैलू जलाकर किया गया। मेले के दूसरे दिन ग्रामीण ऊंचे बुग्यालों और जंगलों से ब्रह्मकमल, हिसर, गूगल, मासी, जटा और जयाण समेत विभिन्न प्रकार के फूल लेकर पहुंचे। इन फूलों से समेश्वर देवता मंदिर की थात को आकर्षक ढंग से सजाया गया। इसके बाद देवता की विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंदिर के चौक में देवता का आसन लगने के बाद पश्वा ने धारदार डांगरियों (फरसों) पर चलकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।
तीर्थ पुरोहित सुधांशु सेमवाल और डॉ. ब्रदी प्रसाद सेमवाल ने बताया कि सेलकू मेले का ग्रामीणों के लिए धार्मिक और कृषि की दृष्टि से भी विशेष महत्व है। मेले के संपन्न होने के बाद ही खेतों में फसल कटाई का काम शुरू किया जाता है। संवाद
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उत्तरकाशी। मां गंगा के मायके मुखबा गांव में समेश्वर देवता का पारंपरिक सेलकू मेला धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया गया। दो दिनों तक चले मेले में ग्रामीणों के साथ दूर-दराज के गांवों से पहुंचे लोगों ने देव डोलियों के साथ रासो-तांदी नृत्य कर लोक संस्कृति की अनूठी छटा बिखेरी। मेले के समापन पर ग्रामीणों ने बुग्यालों से लाए गए फूलों को प्रसाद के रूप में ग्रहण कर सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
मेले का शुभारंभ पहले दिन रात को पारंपरिक रूप से भैलू जलाकर किया गया। मेले के दूसरे दिन ग्रामीण ऊंचे बुग्यालों और जंगलों से ब्रह्मकमल, हिसर, गूगल, मासी, जटा और जयाण समेत विभिन्न प्रकार के फूल लेकर पहुंचे। इन फूलों से समेश्वर देवता मंदिर की थात को आकर्षक ढंग से सजाया गया। इसके बाद देवता की विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंदिर के चौक में देवता का आसन लगने के बाद पश्वा ने धारदार डांगरियों (फरसों) पर चलकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।
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तीर्थ पुरोहित सुधांशु सेमवाल और डॉ. ब्रदी प्रसाद सेमवाल ने बताया कि सेलकू मेले का ग्रामीणों के लिए धार्मिक और कृषि की दृष्टि से भी विशेष महत्व है। मेले के संपन्न होने के बाद ही खेतों में फसल कटाई का काम शुरू किया जाता है। संवाद
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