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Uttarkashi News: बीमार युवक को 12 किमी पैदल चलकर डंडी-कंडी से पहुंचाया सड़क तक

Thu, 17 Sep 2026 06:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी Updated Thu, 17 Sep 2026 06:56 PM IST
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A sick young man was transported to the road using a makeshift stretcher (dandi-kandi) after a 12-km trek on foot.
पैदल रास्ता भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने के साथ ही झाड़ियों से पटा होने से दिक्कत
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लिवाड़ी के लिए 2013 में स्वीकृत हो गई थी सड़क लेकिन अब तक नहीं बनी
उत्तरकाशी। मोरी विकासखंड के लिवाड़ी गांव में सड़क सुविधा की बदहाली एक बार फिर सामने आई। गांव के 21 वर्षीय नवीन की तबीयत बिगड़ने पर ग्रामीण उसे डंडी-कंडी के सहारे करीब 12 किलोमीटर पैदल चलकर जखोल तक सड़क मार्ग पर लाए। जिस पैदल रास्ते से युवक को लाया गया, वह भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त है और झाड़ियों व घास से पटा है।
ग्रामीणों के मुताबिक लिवाड़ी के लिए सड़क वर्ष 2013 में स्वीकृत हुई थी। करीब 13 साल बाद भी सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब तीन से चार किलोमीटर हिस्सा अब भी बाकी है। वहीं रालासों से लिवाड़ी की ओर बनने वाला पुल करीब छह साल से लंबित है। पुल के अभाव में ग्रामीण लकड़ी के फट्टों के सहारे गदेरा पार कर रहे हैं।
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बरसात में तेज बहाव के बीच यहां से आवाजाही करना जोखिम भरा हो जाता है। ग्रामीण दिनेश सिंह, मुलायम रावत, जगमोहन रावत और गुरुदेव रावत ने बताया कि जिलाधिकारी और प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा कुछ समय पहले क्षेत्र का निरीक्षण कर चुके हैं। इसके बावजूद स्थिति नहीं बदली। ग्रामीणों ने सड़क और पुल की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन भी किए।
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उनका कहना है कि पिछली बार विरोध में चुनाव का बहिष्कार तक किया गया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि पिछली बार लोनिवि ने यहां ट्रॉली लगाई थी लेकिन इस बार वह भी नहीं है। ऐसे में आपात स्थिति में ग्रामीणों के सामने पैदल रास्ते और डंडी-कंडी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। 13 साल बाद भी सड़क अधूरी और छह साल से पुल लंबित होना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
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