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डुंडा ब्लॉक में गैंग रेप के बाद अज्ञात लोगों ने की नाबालिग दलित किशोरी की हत्या
Updated Sat, 18 Aug 2018 10:56 PM IST
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उत्तरकाशी। डुंडा ब्लॉक के एक गांव की एक नाबालिग के साथ कुछ अज्ञात लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी। शनिवार तड़के ग्रामीणों का नाबालिग का शव एक मोटर पुल के पास पड़ा मिला। वहीं घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने पुल पर ही शव के साथ धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही विधायक, डीएम और एसपी मौके पर पहुंचे। उधर, पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर कई संदिग्धों को पकड़कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार देर रात डुंडा ब्लॉक की एक 12 वर्षीय दलित बच्ची अपने घर में सो रही थी। इस बीच कुछ अज्ञात लोगों ने घर की बिजली की लाइन काटकर उसका अपहरण कर लिया। घटना के वक्त बच्ची की बड़ी दीदी रिश्तेदारी में गई हुई थी और घर में माता-पिता थे। बच्ची की मां मानसिक रूप से कमजोर है, जबकि पिता को सुनाई नहीं देता है, जिससे घर में अज्ञात लोगों के आने और बच्ची के ले जाने की उनको भनक नहीं लग पाई।
शनिवार सुबह पांच बजे गांव के लोग देवीधार-रनाड़ी मोटर मार्ग से गुजर रहे थे, तो उन्हें बच्ची का क्षत-विछत शव दिखा। बच्ची के पूरे शरीर पर जख्मों के निशान थे। इससे आक्रोशित ग्रामीण बच्ची के शव के साथ पुल पर ही जाम लगाकर धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों ने एक स्वर में आरोपियों को जनता के हवाले करने की मांग की।
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वहीं सूचना मिलने पर घटना स्थल पहुंचे विधायक गोपाल रावत, डीएम डा. आशीष चौहान व एसपी सुखवीर सिंह मौके पर पहुंचे। काफी समझाने के बाद ग्रामीण शांत हुए और करीब तीन घंटे बाद ग्रामीणों ने जाम खोला। पुलिस बच्ची का शव जिला अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए ले गई, लेकिन ग्रामीण जिला अस्पताल ही पहुंच गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। ग्रामीणों ने आरोपियों को उनके हवाले करने या फिर फांसी की सजा देने की मांग की। समाचार लिखे जाने तक जिला अस्पताल में ग्रामीण डटे हुए हैं।
उधर, पुलिस ने टिहरी जिले के थत्यूड़ और कैंपटी में कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है। उनसे घटना को लेकर पूछताछ की जा रही है। हालांकि तनाव के हालात को देखते हुए पुलिस प्रशासन फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रहा है। वहीं ग्रामीणों का दवा है कि आरोपी बिहार मूल के मजदूर थे, जो लंबे समय से क्षेत्र के ही एक बीएड कालेज में मजदूरी कर रहे थे।
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जानकारी के अनुसार शुक्रवार देर रात डुंडा ब्लॉक की एक 12 वर्षीय दलित बच्ची अपने घर में सो रही थी। इस बीच कुछ अज्ञात लोगों ने घर की बिजली की लाइन काटकर उसका अपहरण कर लिया। घटना के वक्त बच्ची की बड़ी दीदी रिश्तेदारी में गई हुई थी और घर में माता-पिता थे। बच्ची की मां मानसिक रूप से कमजोर है, जबकि पिता को सुनाई नहीं देता है, जिससे घर में अज्ञात लोगों के आने और बच्ची के ले जाने की उनको भनक नहीं लग पाई।
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शनिवार सुबह पांच बजे गांव के लोग देवीधार-रनाड़ी मोटर मार्ग से गुजर रहे थे, तो उन्हें बच्ची का क्षत-विछत शव दिखा। बच्ची के पूरे शरीर पर जख्मों के निशान थे। इससे आक्रोशित ग्रामीण बच्ची के शव के साथ पुल पर ही जाम लगाकर धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों ने एक स्वर में आरोपियों को जनता के हवाले करने की मांग की।
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वहीं सूचना मिलने पर घटना स्थल पहुंचे विधायक गोपाल रावत, डीएम डा. आशीष चौहान व एसपी सुखवीर सिंह मौके पर पहुंचे। काफी समझाने के बाद ग्रामीण शांत हुए और करीब तीन घंटे बाद ग्रामीणों ने जाम खोला। पुलिस बच्ची का शव जिला अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए ले गई, लेकिन ग्रामीण जिला अस्पताल ही पहुंच गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। ग्रामीणों ने आरोपियों को उनके हवाले करने या फिर फांसी की सजा देने की मांग की। समाचार लिखे जाने तक जिला अस्पताल में ग्रामीण डटे हुए हैं।
उधर, पुलिस ने टिहरी जिले के थत्यूड़ और कैंपटी में कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है। उनसे घटना को लेकर पूछताछ की जा रही है। हालांकि तनाव के हालात को देखते हुए पुलिस प्रशासन फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रहा है। वहीं ग्रामीणों का दवा है कि आरोपी बिहार मूल के मजदूर थे, जो लंबे समय से क्षेत्र के ही एक बीएड कालेज में मजदूरी कर रहे थे।