फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Uttarkashi News ›   ‘जीतू बगड्वाल’ नाटक देख भाव विभोर हुए लोग

‘जीतू बगड्वाल’ नाटक देख भाव विभोर हुए लोग

Tue, 04 Feb 2014 02:38 PM IST
Uttar Kashi
Uttar Kashi Updated Tue, 04 Feb 2014 02:38 PM IST
विज्ञापन
चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी)। संवेदना समूह की ओर से आयोजित ‘वीर भड़ जीतू बगड्वाल की लोकगाथा’ का मंचन देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोकगाथा का सजीव मंचन देख दर्शक भाव विभोर हो गए। कार्यक्रम में शामिल काबीना मंत्री प्रीतम सिंह पंवार ने लोक कला, संस्कृति के संरक्षण और संवर्द्धन की मुहिम में जुटे संवेदना समूह को विधायक निधि से दो लाख रुपये देने की घोषणा की।
विज्ञापन

बुधवार देर शाम जीआईसी चिन्यालीसौड़ के प्रांगण में संवेदना समूह के कलाकारों ने ‘जीतू बगड्वाल’ नाटक का मंचन किया। कलाकारों के जीवंत अभिनय, मजबूत संगीत और लाइट एवं साउंड के बेहतर तालमेल के साथ दो घंटे की इस प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा। मार्मिक दृश्य देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गई। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए यमुनोत्री विधायक एवं शहरी विकास मंत्री प्रीतम सिंह पंवार ने कलाकारों को 31 हजार रुपये नकद पारितोषिक दिया। इस कार्यक्रम में एसपी जेआर जोशी और एसडीएम विजयनाथ शुक्ल समेत कई लोग शामिल हुए। आयोजन में नगर पंचायत अध्यक्ष शूरवीर रांगड़, रामसुंदर नौटियाल, हरीश थपलियाल, प्रधानाचार्य बीएस राणा, केपीएस भंडारी और एसओ दिनेश कुमार आदि ने सहयोग किया।
विज्ञापन


बगोड़ी गांव की है कथा
जीतू बगड्वाल की लोकगाथा चिन्यालीसौड़ प्रखंड के बगोड़ी गांव से जुड़ी है। काफी शोध के बाद यह नाटक तैयार किया गया। इतिहास से जुड़े इस तरह के चरित्रों पर नाटक मंचन जोखिम भरा है। क्षेत्र के दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने हमारा उत्साह बढ़ाया। - डा. अजीत पंवार, निर्देशक।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोट.........
पहाड़ के गांवों में कई लोकगाथाएं हैं। हमारी लोक कला और संस्कृति काफी समृद्ध रही है। संवेदना समूह इसके संरक्षण और संवर्द्धन की मुहिम में जुटा है और इसमें सभी के सहयोग से सफलता भी मिल रही है। - जयप्रकाश राणा, अध्यक्ष संवेदना समूह उत्तरकाशी।

नाटक के ये हैं कलाकार
गोविंद बिष्ट, गंगा डोगरा, अंजू, सुरेंद्र नौटियाल, धनपाल, रोशन, सुरेंद्र पुरी, रेनू, अंजुमन, मनवीर रावत, राजेश जोशी, हरदेव पंवार, उत्तम रावत, ओम बधाणी, अजय नौटियाल, सोनाली बिष्ट, संजय पंवार, प्रीति शाह, रिंकी, गिरीश बिजल्वाण, प्रदीप बिष्ट, हुकमदास, गुड्डू आदि।

यह है जीतू बगड्वाल की लोकगाथा
चिन्यालीसौड़। लोकगाथा के अनुसार राजशाही के दौरान बगोड़ी गांव का वीर भड़ जीतू बगड्वाल क्षेत्र का सामंत था। उसकी तांबे की खानों का कारोबार तिब्बत तक फैला था। उसने राजा की ओर से थोपे गए करों का भी विरोध किया था। खेतों में रोपाई के लिए अपनी बहन सोबनी को बुलाने रैथल जाने के दौरान रास्ते में आछरियां (परियां) उस पर मोहित हो गईं। वह उन्हें वापस आने का वचन देकर रोपाई के लिए घर लौटा। तय तिथि को खेतों में रोपाई निपटते ही आछरियों ने उसका हरण कर लिया। तब से जीतू को गढ़वाल और कुमाऊं में विभिन्न स्थानों पर वीर, भड़ और देवता के तौर पर पूजा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed