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बग्वाल में दिखे लोक संस्कृति के रंग
Uttar Kashi
Updated Wed, 04 Dec 2013 05:43 AM IST
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उत्तरकाशी। काशीनगरी में मंगसीर की बग्वाल में उत्तराखंड की लोक संस्कृति के विविध रंग देखने को मिले। गढ़वाल राइफल्स के जवानों ने पाइप बैंड के साथ प्रस्तुति दी तो संवेदना समूह ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की विधाआें का प्रदर्शन किया। रामलीला मैदान में ढोल-दमाऊं की थाप पर भैलू खेल कर लोगों ने हर्षोल्लास के साथ बग्वाल (दीपावली) मनाई।
अनघा माउंटेन एसोसिएशन की ओर से भैरवचौक स्थित कंडार देवता मंदिर से बग्वाल कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यहां से ढोल-दमाऊं के साथ नगर में शोभा यात्रा निकाली गई। गढ़वाल राइफल्स के जवानों ने सूबेदार दिलबर सिंह के नेतृत्व में पाइप बैंड की प्रस्तुति दी। इसके बाद रामलीला मैदान में लोगों ने भैलू खेलकर एक दूसरे को बग्वाल की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान आपदा में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए कंडार देवता, विश्वनाथ मंदिर सहित नगर के विभिन्न मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलित किए गए। कार्यक्रम में टिहरी सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, गोपाल रावत, नगर पालिकाध्यक्ष जयेंद्री राणा, एनआईएम के प्राचार्य कर्नल अजय कोठियाल, अनघा माउंटेन एसोसिएशन के अजय पुरी, मेजर आरएस जमनाल, उत्तम गुर्साइं समेत कई लोग शामिल हुए।
इंसेट
इसलिए मनाते हैं मंगसीर की बग्वाल
18वीं सदी में कार्तिक माह की दीपावली के दौरान मलेथा गांव के वीर भड़ माधो सिंह भंडारी गोरखाली के युद्ध में थे। इसके ठीक एक माह बाद जब वे युद्ध में विजय हासिल कर घर पहुंचे तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तब से कार्तिक माह की दीपावली के ठीक एक माह बाद मंगसीर की बग्वाल (दीपावली) मनाई जाती है। जिले के ग्रामीण इलाकों में भी बग्वाल हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।
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अनघा माउंटेन एसोसिएशन की ओर से भैरवचौक स्थित कंडार देवता मंदिर से बग्वाल कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यहां से ढोल-दमाऊं के साथ नगर में शोभा यात्रा निकाली गई। गढ़वाल राइफल्स के जवानों ने सूबेदार दिलबर सिंह के नेतृत्व में पाइप बैंड की प्रस्तुति दी। इसके बाद रामलीला मैदान में लोगों ने भैलू खेलकर एक दूसरे को बग्वाल की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान आपदा में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए कंडार देवता, विश्वनाथ मंदिर सहित नगर के विभिन्न मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलित किए गए। कार्यक्रम में टिहरी सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, गोपाल रावत, नगर पालिकाध्यक्ष जयेंद्री राणा, एनआईएम के प्राचार्य कर्नल अजय कोठियाल, अनघा माउंटेन एसोसिएशन के अजय पुरी, मेजर आरएस जमनाल, उत्तम गुर्साइं समेत कई लोग शामिल हुए।
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इसलिए मनाते हैं मंगसीर की बग्वाल
18वीं सदी में कार्तिक माह की दीपावली के दौरान मलेथा गांव के वीर भड़ माधो सिंह भंडारी गोरखाली के युद्ध में थे। इसके ठीक एक माह बाद जब वे युद्ध में विजय हासिल कर घर पहुंचे तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तब से कार्तिक माह की दीपावली के ठीक एक माह बाद मंगसीर की बग्वाल (दीपावली) मनाई जाती है। जिले के ग्रामीण इलाकों में भी बग्वाल हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।
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