{"_id":"5c8fc46bbdec2213ee5d3e40","slug":"155292589113-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस बार भी ओजरी डबरकोट स्लिप जोन के साये में ही चलेगी यमुनोत्री की यात्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस बार भी ओजरी डबरकोट स्लिप जोन के साये में ही चलेगी यमुनोत्री की यात्रा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बड़कोट (उत्तरकाशी)। पहाड़ की आर्थिकी का प्रमुख आधार चारधाम यात्रा को लेकर शासन-प्रशासन और सरकार कतई सजग नजर नहीं है। यात्रा शुरू होने में महज दो माह शेष हैं, लेकिन अभी तक ओजरी डबरकोट स्लिप जोन वाले हिस्से में सुरक्षित यातायात के इंतजाम नहीं हो पाए हैं। सर्दियों की बरसात में ही यहां भारी मलबा आने और सड़क दलदली होने से यातायात प्रभावित हो रहा है। अभी तक इस हिस्से में सुरक्षित यातायात के लिए स्थायी तो दूर वैकल्पिक इंतजाम भी धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं। इस हाल में यमुनोत्री धाम की यात्रा प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
सितंबर 2017 में यमुनोत्री हाईवे पर सक्रिय हुआ ओजरी डबरकोट भूस्खलन नासूर बनता जा रहा है। करीब तीन सौ मीटर लंबाई में पसर चुके इस भूस्खलन जोन में खड़ी ढाल वाली पहाड़ी से भारी बोल्डरों की बरसात के बीच नीचे दलदली सड़क से वाहनों की आवाजाही जोखिमभरी बनी हुई है। वर्ष 2017 में हिस्से में सुरक्षित यातायात के लिए लोनिवि ने यमुना नदी के किनारे वैकल्पिक सड़क तैयार करने के नाम पर 91 लाख रुपये खर्च किए थे, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो पाया। वर्ष 2018 की यात्रा ओजरी डबरकोट भूस्खलन के चलते प्रभावित हुई। हल्की बरसात में ही यहां भूस्खलन सक्रिय होने के कारण वाहनों की आवाजाही अधिकांश समय ठप ही रही। आए दिन पहाड़ से आते मलबे को साफ करने पर ही एनएच ने बीस लाख से अधिक खर्च कर डाले।
यात्रा शुरू होने में दो माह से भी कम समय बचा है। धरातल पर हाल यह है कि हल्की बरसात में इस हिस्से में यातायात अवरुद्ध हो रहा है। फिलहाल इस हिस्से में सुगम एवं सुरक्षित यातायात के नाम पर सिर्फ मलबा हटाने की व्यवस्था ही लागू रहेगी, जिससे यमुनोत्री धाम की यात्रा इस बार भी प्रभावित होना तय है।
विज्ञापन
ओजरी डबरकोट स्लिप जोन वाले हिस्से में सुरक्षित यातायात के लिए ऑल वेदर रोड के तहत सुरंग का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसकी डीपीआर तैयार की जा रही है। तब तक फिलहाल यहां वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बन पाने के कारण पहाड़ी से मलबा आने पर इसे साफ कर यातायात के इंतजाम किए गए हैं।
नवनीत पांडेय, ईई राजमार्ग निर्माण खंड बड़कोट।
विज्ञापन
सितंबर 2017 में यमुनोत्री हाईवे पर सक्रिय हुआ ओजरी डबरकोट भूस्खलन नासूर बनता जा रहा है। करीब तीन सौ मीटर लंबाई में पसर चुके इस भूस्खलन जोन में खड़ी ढाल वाली पहाड़ी से भारी बोल्डरों की बरसात के बीच नीचे दलदली सड़क से वाहनों की आवाजाही जोखिमभरी बनी हुई है। वर्ष 2017 में हिस्से में सुरक्षित यातायात के लिए लोनिवि ने यमुना नदी के किनारे वैकल्पिक सड़क तैयार करने के नाम पर 91 लाख रुपये खर्च किए थे, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो पाया। वर्ष 2018 की यात्रा ओजरी डबरकोट भूस्खलन के चलते प्रभावित हुई। हल्की बरसात में ही यहां भूस्खलन सक्रिय होने के कारण वाहनों की आवाजाही अधिकांश समय ठप ही रही। आए दिन पहाड़ से आते मलबे को साफ करने पर ही एनएच ने बीस लाख से अधिक खर्च कर डाले।
विज्ञापन
यात्रा शुरू होने में दो माह से भी कम समय बचा है। धरातल पर हाल यह है कि हल्की बरसात में इस हिस्से में यातायात अवरुद्ध हो रहा है। फिलहाल इस हिस्से में सुगम एवं सुरक्षित यातायात के नाम पर सिर्फ मलबा हटाने की व्यवस्था ही लागू रहेगी, जिससे यमुनोत्री धाम की यात्रा इस बार भी प्रभावित होना तय है।
विज्ञापन
ओजरी डबरकोट स्लिप जोन वाले हिस्से में सुरक्षित यातायात के लिए ऑल वेदर रोड के तहत सुरंग का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसकी डीपीआर तैयार की जा रही है। तब तक फिलहाल यहां वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बन पाने के कारण पहाड़ी से मलबा आने पर इसे साफ कर यातायात के इंतजाम किए गए हैं।
नवनीत पांडेय, ईई राजमार्ग निर्माण खंड बड़कोट।