फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Uttarkashi News ›   शहादत की सूचना मिलते ही शहीद मोहन लाल के गांव में दौड़ पड़ी शोक की लहर

शहादत की सूचना मिलते ही शहीद मोहन लाल के गांव में दौड़ पड़ी शोक की लहर

Fri, 15 Feb 2019 09:47 PM IST
Vijay Lakshmi विजय लक्ष्मी
Updated Fri, 15 Feb 2019 09:47 PM IST
विज्ञापन
शहादत की सूचना मिलते ही शहीद मोहन लाल के गांव में दौड़ पड़ी शोक की लहर
sad - फोटो : amarujala
चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी)। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में बृहस्पतिवार को सीआरपीएफ जवानों पर हुए आतंकी हमले में गांव के सपूत मोहन लाल रतूड़ी के शहीद होने की खबर से चिन्यालीसौड़ ब्लाक का बनकोट गांव शोक में डूब गया। शहीद का परिवार तो देहरादून में रहता है। गांव में रह रहे करीबी परिजन भी यह खबर पाते ही देहरादून रवाना हो गए। ग्रामीणों ने आतंकी हमले पर गहरा रोष जताते हुए सरकार से आतंकवादियों को करारा सबक सिखाने की मांग की।
विज्ञापन

देहरादून से शहीद एएसआई मोहन लाल के भतीजे सूर्यप्रकाश ने शुक्रवार सुबह फोन पर उनकी शहादत की सूचना परिजनों एवं ग्रामीणों को दी। सूचना मिलते ही पूरे गांव में शोक छा गया। शहीद की भाभी पूर्णमासी देवी, बहन माया देवी, भतीजी सुनैना आदि करीबी परिजन तत्काल देहरादून रवाना हो गए। शहीद का परिवार देहरादून में रहता है, जबकि उनकी भाभी समेत अन्य रिश्तेदार गांव में ही रहते हैं।
विज्ञापन

शहीद की भाभी पूर्णमासी देवी ने बताया कि शहीद के पिता मंगलानंद रतूड़ी का आठ वर्ष पूर्व और माता जसोदा देवी का पांच वर्ष पूर्व ही निधन हुआ था। गांव का मकान आपदा में क्षतिग्रस्त होने के बाद मोहन बच्चों की पढ़ाई लिखाई के लिए परिवार को साथ लेकर देहरादून चले गए थे। आजकल वे गांव में अपना नया मकान बनवा रहे थे। उनकी बड़ी बेटी अनुसूया की तीन साल पहले ही पड़ोस के रौंतल गांव में शादी हो चुकी है, जबकि बड़ा बेटा शंकर, बेटी वैष्णवी, गंगा और छोटा बेटा राममूर्ति देहरादून में पढ़ाई कर रहे हैं। शहीद मोहन लाल अपने पीछे पत्नी सरिता देवी समेत भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


सेवानिवृत्ति के बाद फिर गांव में बसने की थी इच्छा
चिन्यालीसौड़। शहीद मोहन लाल रतूड़ी के करीबी बनकोट निवासी प्यार सिंह, विनोद, राजेंद्र सिंह आदि ने बताया कि वे बहुत ही मिलनसार एवं धार्मिक प्रवृत्ति के थे। सेना में भर्ती होने से पहले वे गांव की रामलीला में भगवान राम का पात्र निभाते थे। देश सेवा की इच्छा के चलते वह पारंपरिक कृषि एवं पुरोहित कार्य छोड़कर सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। बच्चों को पढ़ाई के लिए परिवार को देहरादून ले जाने के बावजूद उन्होंने गांव से नाता नहीं तोड़ा। आजकल वे गांव में अपना नया मकान बनवा रहे थे। इसकी देखरेख के लिए बीते दिसंबर में वे गांव आए थे। तब उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद गांव लौट कर खेती-बागवानी तथा समाजसेवा करने की इच्छा जताई थी। ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed