{"_id":"5c489617bdec2232285afe91","slug":"15482610085-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बर्फ से सेब के कई पेड़ गिरे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बर्फ से सेब के कई पेड़ गिरे
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तरकाशी/चंबा। जिले के कई क्षेत्रों में बीस साल बाद हुई भीषण बर्फबारी से कई गांवों में सेब के पेड़ टूट गए हैं। हालांकि किसान इस बर्फबारी को कृषि बागवानी के लिए बेहतर मान रहे हैं। वहीं चंबा में बर्फबारी के बाद फल पट्टी क्षेत्र में सेब और गेहूं की फसलों की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद से काश्तकार खुश हैं।
डोडराक्वार हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगे मोरी प्रखंड के सेवा गांव के प्रधान पटवारी सिंह बताते हैं कि करीब बीस साल बाद उन्होंने क्षेत्र में ऐसी बर्फबारी देखी है। सेवा गांव के बागीचों में सेब के 30 साल पुराने करीब दो सौ पेड़ टूट गए हैं। उनके गांव में करीब पांच फीट बर्फ पड़ी है। नैटवाड़ मोरी के काश्तकार जाजमोहन सिंह का कहना है कि जब सर्दियों में अच्छी बर्फबारी होती है, तो उस साल ओलावृष्टि का खतरा नहीं रहता। निचले क्षेत्रों में गेहूं, सरसों, मटर, मसूर की फसल के साथ ही आगे बोई जाने वाली फसलों के लिए भी यह बारिश बर्फबारी काफी फायदा देने वाली है। कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ के प्रभारी डा. पंकज नौटियाल का कहना है कि फरवरी में भी अभी और बर्फबारी की उम्मीद है। ऐसी स्थिति में सेब की फ्लावरिंग अवधि आगे खिसकेगी। लंबे समय तक वातावरण में आर्द्रता रहने से मार्च-अप्रैल में ओलावृष्टि का खतरा काफी कम हो जाता है।
डोडराक्वार हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगे मोरी प्रखंड के सेवा गांव के प्रधान पटवारी सिंह बताते हैं कि करीब बीस साल बाद उन्होंने क्षेत्र में ऐसी बर्फबारी देखी है। सेवा गांव के बागीचों में सेब के 30 साल पुराने करीब दो सौ पेड़ टूट गए हैं। उनके गांव में करीब पांच फीट बर्फ पड़ी है। नैटवाड़ मोरी के काश्तकार जाजमोहन सिंह का कहना है कि जब सर्दियों में अच्छी बर्फबारी होती है, तो उस साल ओलावृष्टि का खतरा नहीं रहता। निचले क्षेत्रों में गेहूं, सरसों, मटर, मसूर की फसल के साथ ही आगे बोई जाने वाली फसलों के लिए भी यह बारिश बर्फबारी काफी फायदा देने वाली है। कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ के प्रभारी डा. पंकज नौटियाल का कहना है कि फरवरी में भी अभी और बर्फबारी की उम्मीद है। ऐसी स्थिति में सेब की फ्लावरिंग अवधि आगे खिसकेगी। लंबे समय तक वातावरण में आर्द्रता रहने से मार्च-अप्रैल में ओलावृष्टि का खतरा काफी कम हो जाता है।
विज्ञापन