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‘गजू मलारी’ की प्रेमगाथा का किया शानदार मंचन
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उत्तरकाशी। रविवार को माघ मेले की सांस्कृतिक संध्या संवेदना समूह के नाम रही। एक बार फिर संवेदना के कलाकारों ने माघ मेला मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। जीतू बगड्वाल, गंगू रमोला, कचड़ू और ओंस्यालू नाटक के बाद उन्होंने रविवार को मेला मंच पर जिले के सुदूरवर्ती पर्वत क्षेत्र की प्रसिद्ध प्रेम गाथा ‘गजू मलारी’ को जीवंत किया।
माघ मेला मंच पर रविवार रात को संवेदना समूह के कलाकारों ने प्रसिद्ध प्रेम गाथा ‘गजू मलारी’ का मंचन किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गंगोत्री के पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण ने संवेदना समूह द्वारा लोक कला संस्कृति के संरक्षण संवर्द्धन में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। नाटक में नायक गजू की भूमिका में विपिन नेगी, मलारी बनी गंगा डोगरा और रणू बने हरदेव पंवार ने अभिनय से सबक मन मोहा। साथ ही मनवीर रावत, रोशन सोनी, उत्तम रावत, प्रियंका गुसाईं, मनमोहन राणा, राजेश जोशी, मनवीर राणा, संजय पंवार, आराधना कुड़ियाल, मनीषा बिष्ट आदि ने भी अभिनय किया। नाटक में लेखक अजय नौटियाल, निर्देशक जयप्रकाश राणा, डा. अजीत पंवार, संजय शाह, गोविंद बिष्ट की महत्वपूर्ण भूमिका रही। नाटक से पूर्व समूह के कलाकारों ने ‘कुसुंबा कुयांण’ गीत नाटिका का मंचन किया। जिला पंचायत अध्यक्ष जशोदा राणा, डुंडा के ब्लाक प्रमुख कनकपाल परमार, प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गिरवीर परमार आदि ने प्रस्तुति की सराहना की। इस मौके पर कुलदीप बिष्ट, मंगला राणा, जितेंद्र राणा, पवन नौटियाल, हर्ष अग्निहोत्री, संतोषी सजवाण, विजेंद्र नौटियाल, मनीष राणा आदि अनेक लोग मौजूद रहे।
यह है ‘गजू मलारी’ की प्रेम गाथा
कथानक के अनुसार भितरी-मसरी निवासी भेड़ पालक गजे सिंह जंगल में घास काटते समय दोणी गांव के थोकदार मौण्या सौंदाण की बेटी मलारी की जान आदमखोर गुलदार से बचाता है। इस दौरान वह मलारी के सौंदर्य पर मोहित हो जाता है। गजू और मलारी के बीच प्रेम परवान चढ़ता है और दोनों एक दूसरे के साथ जीने मरने की कसमें खाते हैं। इस बीच मलारी से एकतरफा प्रेम करने वाला दोणी गांव का रणू नैटवाड़ के मेले में मलारी के साथ अभद्रता करता है, जिस पर गजू उसकी पिटाई कर देता है। तब रणू गांव में मलारी को बदनाम कर देता है, जिससे गुस्साए मलारी के पिता सौंदाण उसे घर में कैद कर देते हैं। गजू के प्रेम में पड़ी मलारी विछोह को सहन नहीं कर पाती और उसकी तबियत खराब हो जाती है। आखिरकार उसके पिता उनके प्यार को स्वीकार कर गजू को बुलाते हैं, लेकिन तब तक मलारी अपने प्राण त्याग देती है।
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माघ मेला मंच पर रविवार रात को संवेदना समूह के कलाकारों ने प्रसिद्ध प्रेम गाथा ‘गजू मलारी’ का मंचन किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गंगोत्री के पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण ने संवेदना समूह द्वारा लोक कला संस्कृति के संरक्षण संवर्द्धन में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। नाटक में नायक गजू की भूमिका में विपिन नेगी, मलारी बनी गंगा डोगरा और रणू बने हरदेव पंवार ने अभिनय से सबक मन मोहा। साथ ही मनवीर रावत, रोशन सोनी, उत्तम रावत, प्रियंका गुसाईं, मनमोहन राणा, राजेश जोशी, मनवीर राणा, संजय पंवार, आराधना कुड़ियाल, मनीषा बिष्ट आदि ने भी अभिनय किया। नाटक में लेखक अजय नौटियाल, निर्देशक जयप्रकाश राणा, डा. अजीत पंवार, संजय शाह, गोविंद बिष्ट की महत्वपूर्ण भूमिका रही। नाटक से पूर्व समूह के कलाकारों ने ‘कुसुंबा कुयांण’ गीत नाटिका का मंचन किया। जिला पंचायत अध्यक्ष जशोदा राणा, डुंडा के ब्लाक प्रमुख कनकपाल परमार, प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गिरवीर परमार आदि ने प्रस्तुति की सराहना की। इस मौके पर कुलदीप बिष्ट, मंगला राणा, जितेंद्र राणा, पवन नौटियाल, हर्ष अग्निहोत्री, संतोषी सजवाण, विजेंद्र नौटियाल, मनीष राणा आदि अनेक लोग मौजूद रहे।
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यह है ‘गजू मलारी’ की प्रेम गाथा
कथानक के अनुसार भितरी-मसरी निवासी भेड़ पालक गजे सिंह जंगल में घास काटते समय दोणी गांव के थोकदार मौण्या सौंदाण की बेटी मलारी की जान आदमखोर गुलदार से बचाता है। इस दौरान वह मलारी के सौंदर्य पर मोहित हो जाता है। गजू और मलारी के बीच प्रेम परवान चढ़ता है और दोनों एक दूसरे के साथ जीने मरने की कसमें खाते हैं। इस बीच मलारी से एकतरफा प्रेम करने वाला दोणी गांव का रणू नैटवाड़ के मेले में मलारी के साथ अभद्रता करता है, जिस पर गजू उसकी पिटाई कर देता है। तब रणू गांव में मलारी को बदनाम कर देता है, जिससे गुस्साए मलारी के पिता सौंदाण उसे घर में कैद कर देते हैं। गजू के प्रेम में पड़ी मलारी विछोह को सहन नहीं कर पाती और उसकी तबियत खराब हो जाती है। आखिरकार उसके पिता उनके प्यार को स्वीकार कर गजू को बुलाते हैं, लेकिन तब तक मलारी अपने प्राण त्याग देती है।
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