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एक बार फिर पर्वतारोहियों और रोमांच के शौकीन ट्रैकर्स से गुलजार हुआ गंगोत्री हिमालय
Updated Wed, 19 Sep 2018 10:00 PM IST
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उत्तरकाशी। गंगोत्री हिमालय क्षेत्र एक बार फिर पर्वतारोहियों और रोमांच के शौकीन ट्रैकर्स से गुलजार हो गया है। आजकल करीब आधा दर्जन पर्वतारोही दल विभिन्न हिमशिखरों पर आरोहण अभियान में जुटे हैं, जबकि दो दर्जन से अधिक ट्रैकर्स ने गंगोत्री-कालिंदी-बद्रीनाथ ट्रैक पर कदम बढ़ाए हैं।
सतोपंथ हिमशिखर पर सफल आरोहण कर सेना की सैकेंड जाट मुल्तान रेजीमेंट का पर्वतारोही दल मंगलवार को लौटा, जबकि भागीरथी-2 पर आरोहण के लिए गए पश्चिम बंगाल के अभियान दल में शामिल एक पर्वतारोही की मौत के कारण उन्हें कैंप-1 से लौटना पड़ा। एनएसजी के अभियान दल ने बीते 17 सितंबर को जोगिन पीक पर सफल आरोहण किया। दल दो-तीन दिन में लौटेगा, जबकि सेना की आर्टलरी का एक अभियान दल गंगोत्री-3 हिमशिखर पर आरोहण के लिए बेस कैंप से आगे बढ़ चुका है।
इनके अलावा जर्मनी के आठ सदस्यीय व जर्मनी, इटली और आस्ट्रेलिया के पांच सदस्यीय पर्वतारोही दल ने सतोपंथ हिमशिखर पर आरोहण के लिए बेस कैंप पर डेरा डाल दिया है। कोलकाता के पांच पर्वतारोही भागीरथी-2 पर आरोहण के लिए कैंप-1 से आगे बढ़ गए हैं। इनके अलावा 17 सितंबर को 13 सदस्यीय भारतीय पर्यटक दल व 18 सितंबर को रूस एवं लिथुआनिया का सात सदस्यीय और स्वीडन का तीन सदस्यीय अभियान दल रोमांच से भरपूर गंगोत्री-कालिंदी-बद्रीनाथ ट्रैक पर रवाना हुआ है।
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पर्वतारोहियों और ट्रैकर्स की पहली पसंद है गंगोत्री हिमालय
माउंटेनियरिंग एवं ट्रैकिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा, सचिव मनोज रावत, मदन गुसाईं, बिहारी लाल आदि का कहना है कि दुनिया की सबसे ज्यादा चढ़ी जाने वाली चोटियों और कालिंदी ट्रेक की वजह से गंगोत्री हिमालय देश-विदेश के पर्वतारोहियों और ट्रैकर्स की पहली पसंद है। बड़ी संख्या में स्थानीय युवा इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। कई बार सरकारी एजेंसियों द्वारा मनमाने नियम थोपे जाने से पर्वतारोही एवं ट्रैकर्स हिमाचल और लेह लद्दाख का रुख करते हैं, जिससे यहां माउंटेनियरिंग एवं ट्रैकिंग व्यवसाय को काफी नुकसान पहुंचता है।
कोट...
तय मानकों और नियमों के अनुसार पर्वतारोहियों एवं पर्यटकों को गंगोत्री हिमालय क्षेत्र में जाने की अनुमति दी जा रही है। मानसून सीजन के बाद यहां पर्वतारोहियों एवं ट्रैकर्स की संख्या में इजाफा हुआ है। आजकल आधा दर्जन पर्वतारोही दल और तीन ट्रैकिंग दल गंगोत्री हिमालय क्षेत्र में मौजूद हैं। -प्रताप सिंह पंवार, वन क्षेत्राधिकारी गंगोत्री नेशनल पार्क।
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सतोपंथ हिमशिखर पर सफल आरोहण कर सेना की सैकेंड जाट मुल्तान रेजीमेंट का पर्वतारोही दल मंगलवार को लौटा, जबकि भागीरथी-2 पर आरोहण के लिए गए पश्चिम बंगाल के अभियान दल में शामिल एक पर्वतारोही की मौत के कारण उन्हें कैंप-1 से लौटना पड़ा। एनएसजी के अभियान दल ने बीते 17 सितंबर को जोगिन पीक पर सफल आरोहण किया। दल दो-तीन दिन में लौटेगा, जबकि सेना की आर्टलरी का एक अभियान दल गंगोत्री-3 हिमशिखर पर आरोहण के लिए बेस कैंप से आगे बढ़ चुका है।
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इनके अलावा जर्मनी के आठ सदस्यीय व जर्मनी, इटली और आस्ट्रेलिया के पांच सदस्यीय पर्वतारोही दल ने सतोपंथ हिमशिखर पर आरोहण के लिए बेस कैंप पर डेरा डाल दिया है। कोलकाता के पांच पर्वतारोही भागीरथी-2 पर आरोहण के लिए कैंप-1 से आगे बढ़ गए हैं। इनके अलावा 17 सितंबर को 13 सदस्यीय भारतीय पर्यटक दल व 18 सितंबर को रूस एवं लिथुआनिया का सात सदस्यीय और स्वीडन का तीन सदस्यीय अभियान दल रोमांच से भरपूर गंगोत्री-कालिंदी-बद्रीनाथ ट्रैक पर रवाना हुआ है।
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पर्वतारोहियों और ट्रैकर्स की पहली पसंद है गंगोत्री हिमालय
माउंटेनियरिंग एवं ट्रैकिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा, सचिव मनोज रावत, मदन गुसाईं, बिहारी लाल आदि का कहना है कि दुनिया की सबसे ज्यादा चढ़ी जाने वाली चोटियों और कालिंदी ट्रेक की वजह से गंगोत्री हिमालय देश-विदेश के पर्वतारोहियों और ट्रैकर्स की पहली पसंद है। बड़ी संख्या में स्थानीय युवा इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। कई बार सरकारी एजेंसियों द्वारा मनमाने नियम थोपे जाने से पर्वतारोही एवं ट्रैकर्स हिमाचल और लेह लद्दाख का रुख करते हैं, जिससे यहां माउंटेनियरिंग एवं ट्रैकिंग व्यवसाय को काफी नुकसान पहुंचता है।
कोट...
तय मानकों और नियमों के अनुसार पर्वतारोहियों एवं पर्यटकों को गंगोत्री हिमालय क्षेत्र में जाने की अनुमति दी जा रही है। मानसून सीजन के बाद यहां पर्वतारोहियों एवं ट्रैकर्स की संख्या में इजाफा हुआ है। आजकल आधा दर्जन पर्वतारोही दल और तीन ट्रैकिंग दल गंगोत्री हिमालय क्षेत्र में मौजूद हैं। -प्रताप सिंह पंवार, वन क्षेत्राधिकारी गंगोत्री नेशनल पार्क।