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नहीं थमा रेसगी गांव में उल्टी दस्त का प्रकोप
Updated Sun, 01 Jul 2018 10:08 PM IST
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उत्तरकाशी। रेसगी गांव में उल्टी दस्त का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब भी गांव में करीब आधा दर्जन ग्रामीण डायरिया से पीड़ित हैं। शनिवार रात को गांव की एक महिला की तबियत ज्यादा बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
बीते एक पखवाड़े से टिपरा ग्राम पंचायत के रेसगी गांव में उल्टी दस्त का प्रकोप फैला हुआ है। अब तक गांव में दो लोगों की उल्टी दस्त से मौत हो चुकी है। अब भी गांव में करीब आधा दर्जन लोग डायरिया से पीड़ित हैं। गांव के उपप्रमुख मदन मोहन ने बताया कि कामेश्वरी देवी, महिमानंद एवं गंगोत्री देवी की तबियत ज्यादा खराब है, जबकि रविवार देर रात को चमना देवी (42) पत्नी गेंदालाल की तबियत ज्यादा बिगड़ने पर उसे 108 से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति नहीं होने के कारण वे गदेरे का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. विनोद नौटियाल का कहना है कि बरसात में दूषित पेयजल के कारण इस तरह के संक्रामक रोगों का खतरा रहता है। ब्रह्मखाल अस्पताल में तैनात चिकित्सकों को क्षेत्र के सभी गांवों के प्रधानों, आशा कार्यकत्रियों व एएनएम से संपर्क कर रिपोर्ट तैयार करने और बीमारी की सूचना मिलने पर संबंधित गांव तक पहुंचकर बीमारों का उपचार करने और उन्हें दवा देने के निर्देश दिए गए हैं।
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बीते एक पखवाड़े से टिपरा ग्राम पंचायत के रेसगी गांव में उल्टी दस्त का प्रकोप फैला हुआ है। अब तक गांव में दो लोगों की उल्टी दस्त से मौत हो चुकी है। अब भी गांव में करीब आधा दर्जन लोग डायरिया से पीड़ित हैं। गांव के उपप्रमुख मदन मोहन ने बताया कि कामेश्वरी देवी, महिमानंद एवं गंगोत्री देवी की तबियत ज्यादा खराब है, जबकि रविवार देर रात को चमना देवी (42) पत्नी गेंदालाल की तबियत ज्यादा बिगड़ने पर उसे 108 से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति नहीं होने के कारण वे गदेरे का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. विनोद नौटियाल का कहना है कि बरसात में दूषित पेयजल के कारण इस तरह के संक्रामक रोगों का खतरा रहता है। ब्रह्मखाल अस्पताल में तैनात चिकित्सकों को क्षेत्र के सभी गांवों के प्रधानों, आशा कार्यकत्रियों व एएनएम से संपर्क कर रिपोर्ट तैयार करने और बीमारी की सूचना मिलने पर संबंधित गांव तक पहुंचकर बीमारों का उपचार करने और उन्हें दवा देने के निर्देश दिए गए हैं।
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