{"_id":"5b37bc4b4f1c1b6c4d8b977c","slug":"15303793393-utter-kashi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांच साल से विभागों के बीच झूल रहा खरादी का झूला पुल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांच साल से विभागों के बीच झूल रहा खरादी का झूला पुल
Updated Sat, 30 Jun 2018 10:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बड़कोट (उत्तरकाशी)। धारमंडल ठकराल पट्टी के ग्रामीण पांच साल बाद भी आपदा से नहीं उबर पाए हैं। खरादी में बना झूला पुल यमुना नदी की बाढ़ में बहा, जो आजतक नहीं बन पाया हे। ग्रामीण जर्जर ट्राली से यमुना नदी पार कर रहे हैं।
जून 2013 में यमुना नदी की बाढ़ ने यमुनोत्री यात्रा मार्ग के खरादी कस्बे में भारी तबाही मचाई थी। तब यमुना नदी पर बना झूला पुल बह गया था, जिससे कई गांवों का संपर्क कट गया था। बाद में खरादी में पुल निर्माण का जिम्मा एनबीसीसी को सौंपा गया, लेकिन वन क्षेत्र में होने के कारण वन विभाग ने इसमें अड़ंगा लगा दिया। तब वन विभाग ने अपने स्तर से पुल निर्माण का प्रस्ताव भेजा, लेकिन तकनीकी कौशल नहीं होने के कारण यह प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुआ।
पुल निर्माण में देरी पर ग्रामीणों ने आंदोलन कर यमुनोत्री हाईवे पर सांकेतिक जाम लगाया, तो उनके खिलाफ मुकदमे तो दर्ज हुए, लेकिन पुल नहीं बना। इसके बाद पुल निर्माण की जिम्मेदारी लोनिवि विश्व बैंक को सौंपी गई और बीते साल इनसे हटाकर लोनिवि बड़कोट को खरादी पुल निर्माण का जिम्मा सौंपा गया है। पांच साल से यह पुल विभागों के बीच झूल रहा है। धारमंडल क्षेत्र के रणवीर रावत, भगवान सिंह, राम प्रसाद बिजल्वाण का कहना है कि गांवों के बच्चे पढ़ने के लिए खरादी इंटर कालेज आते हैं। ट्राली से आवाजाही के दौरान आए दिन अनहोनी का खतरा बना रहता है। ईई जेपी रतूड़ी का कहना है कि बीते साल ही खरादी पुल बनाने की जिम्मेदारी लोनिवि बड़कोट को सौंपी गई है। खरादी में यमुना नदी पर करीब पांच करोड़ रुपये से 120 मीटर स्पान के झूला पुल की निविदा करा दी गई है। जल्द ही अनुबंध कर जून 2019 तक पुल का निर्माण पूरा किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
जून 2013 में यमुना नदी की बाढ़ ने यमुनोत्री यात्रा मार्ग के खरादी कस्बे में भारी तबाही मचाई थी। तब यमुना नदी पर बना झूला पुल बह गया था, जिससे कई गांवों का संपर्क कट गया था। बाद में खरादी में पुल निर्माण का जिम्मा एनबीसीसी को सौंपा गया, लेकिन वन क्षेत्र में होने के कारण वन विभाग ने इसमें अड़ंगा लगा दिया। तब वन विभाग ने अपने स्तर से पुल निर्माण का प्रस्ताव भेजा, लेकिन तकनीकी कौशल नहीं होने के कारण यह प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुआ।
विज्ञापन
पुल निर्माण में देरी पर ग्रामीणों ने आंदोलन कर यमुनोत्री हाईवे पर सांकेतिक जाम लगाया, तो उनके खिलाफ मुकदमे तो दर्ज हुए, लेकिन पुल नहीं बना। इसके बाद पुल निर्माण की जिम्मेदारी लोनिवि विश्व बैंक को सौंपी गई और बीते साल इनसे हटाकर लोनिवि बड़कोट को खरादी पुल निर्माण का जिम्मा सौंपा गया है। पांच साल से यह पुल विभागों के बीच झूल रहा है। धारमंडल क्षेत्र के रणवीर रावत, भगवान सिंह, राम प्रसाद बिजल्वाण का कहना है कि गांवों के बच्चे पढ़ने के लिए खरादी इंटर कालेज आते हैं। ट्राली से आवाजाही के दौरान आए दिन अनहोनी का खतरा बना रहता है। ईई जेपी रतूड़ी का कहना है कि बीते साल ही खरादी पुल बनाने की जिम्मेदारी लोनिवि बड़कोट को सौंपी गई है। खरादी में यमुना नदी पर करीब पांच करोड़ रुपये से 120 मीटर स्पान के झूला पुल की निविदा करा दी गई है। जल्द ही अनुबंध कर जून 2019 तक पुल का निर्माण पूरा किया जाएगा।
विज्ञापन